गलती प्रशासन की, भुगते जनता:2500 की आबादी वाला अमाव गांव 4 माह तक बन जाता है टापू, जूता हाथ में लेकर घरों से निकलते हैं लोग

रीवा10 महीने पहले
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  • 500 मीटर नाली बनाने से हो सकता है समस्या का समाधान, 200 मीटर के ऐरिया में भरा रहता है पानी

जिला मुख्यालय से 100 किमी. दूर रीवा के अंतिम छोर का अमाव एक ऐसा गांव है। जहां के ग्रामीण वर्षा ऋतु ​में चार माह अपने-अपने घरों में कैद रहते है। घर से वही आदमी निकलता है जिसको अति-आवश्यक कार्य होता है। दावा है कि बारिश के मौसम में मरीज सहित गांव के छोटे-छोटे बच्चे घुटने तक भरे हुए पानी में गोते लगाते हुए स्थानीय प्रशासन को कोसते हुए जाते है।

पानी भरे रहने के कारण विद्युत पोल से करंट उतरने की आशंका बनी रही है। पर शायद जिम्मेदारों को हादसे का ही इंतजार है। इसीलिए कोई समस्या का समाधान करना ही नहीं चाहता है। जबकि 500 मीटर की नाली बना देने से 200 मीटर के निचले ऐरिया में भरा पानी निकल सकता है। लेकिन सांसद और विधायक की उपेक्षा के कारण 1600 मतदाता वाले गांव के 2500 लोग घर में कैद रहने को मजबूर हैं।

सड़क में पानी के बीच निकलते मासूम बच्चे।
सड़क में पानी के बीच निकलते मासूम बच्चे।

पूर्व मंत्री का ननिहाल है अमाव
बता दें कि दिवंगत पूर्व मंत्री व कई बार त्योंथर विधानसभा से विधायक रहे स्वर्गीय रमाकांत तिवारी का ननिहाल अमाव गांव में ही था। उनके रहते गांव में कई विकास कार्य भी हुए थे। लेकिन उनके निधन के बाद गांव की ओर किसी जनप्र​तिनिधि ने मुड़कर नहीं देखा। जबकि बीते एक दशक में गांव की जनसंख्या तो बढ़ी है। पर आबादी के हिसाब के गांव की सड़के ढलान वाले क्षेत्र में ही बना दी गई। जिससे बारिश के समय गांव का एकत्र हुआ पानी वहीं पर सिमटता है। जो चार माह इसी तरह भरा रहता है।

दो भागों में बंटा रहता है गांव
युकां के त्योंथर विस अध्यक्ष रावेन्द्र तिवारी ने बताया कि बारिश के कारण अमाव गांव दो भागों में बंटा रहा है। वर्षा ऋतु में जो जिस ओर रहता है। उसी ओर थम जाता है। क्योंकि घुटने तक भरे पानी में रोजाना आना जाना आसान नहीं है। हर पल लोग खतरे का सामना करते हुए आते जाते रहते हैं। फिर भी अमाव ग्राम पंचायत के सरपंच-सचिव इस समस्या पर गौर नहीं कर रहे है। दावा है कि कई बार स्थानीय लोग ​जनपद पंचायत के आला अधिकारियों को सूचित कर चुके है पर कोई निदान नहीं किया गया।

निचले क्षेत्र में बिना हाइट दिए बना दी थी सड़क
आरोप है कि ग्राम पंचायत द्वारा सड़क निर्माण कराते समय मानकों का पालन न करते हुए जल्दबाजी में सड़क बना दी गई थी।​ निर्माण एजेंसी द्वारा भविष्य को न सोचते हुए निचले क्षेत्र में बिना हाइट दिए 200 मीटर की सड़क बना दी थी। जिससे बारिश के मौसम का पानी मुख्य सड़क के पास ही एकत्र हो रहा है। जबकि 500 मीटर की नाली बनाकर ये पानी निकल सकता है। पर स्थानीय अमला ध्यान नहीं दे रहा है।

बिजली के पोल से करंट फैलने की आशंका
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के मध्य में पानी भरा रहने से बिजली के रेल पोलों से करंट उतरने की आशंका है। जिससे आम जनता से लेकर मवेशियों की जान का भी खतरा मडरा रहा है। क्यों​कि पूर्व टोला और पश्चिम टोला के ग्रामीण इसी एक रास्ते से निकलते है। ऐसे में बारिश के समय एक गांव दो भागों में विभाजित रहता है। जबकि अमाव ग्राम पंचायत में टोंकी गांव भी शामिल है। लेकिन वहां हद तक व्यवस्थाएं सही है।

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