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अन्नकूट महोत्सव:बकस्वाहा के पड़रिया धाम में बांके बिहारी को लगाया छप्पन भोग

बकस्वाहा2 महीने पहले
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बकस्वाहा के समीप स्थित पड़रिया धाम में दीपावली के उपलक्ष्य में अन्नकूट महोत्सव मनाया गया। यह आयोजन वृंदावन धाम से आए महंत किशोर दास जू महाराज के सानिध्य में हुआ, जिससे दूर दराज से हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।

दीपावली के दूसरे दिन उत्तर और मध्य भारत खास कर बुंदेलखंड में गोवर्धन पूजा का प्रचलन है। इस दिन को अन्नकूट महोत्सव भी कहते हैं। इस दिन गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर पूजा की जाती है। पुराणों के मुताबिक द्वापर युग में सबसे पहले भगवान श्री कृष्ण के कहने पर ही गोवर्धन पर्वत की पूजा की गई थी। व्यवहारिक नजरिए से देखा जाए तो इस परंपरा के पीछे प्रकृति पूजा का संदेश छुपा है।

इस उपलक्ष्य में भगवान के निमित्त छप्पन भोग बनाया गया और भगवान को भोग लगाया गया। इस दौरान देश के दूर दराज से हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने शामिल होकर पूजन अर्चन में भाग लिया। कहते हैं कि अन्नकूट महोत्सव मनाने से मनुष्य को लंबी आयु तथा आरोग्य की प्राप्ति होती है।

अन्नकूट महोत्सव इसलिए मनाया जाता है, क्योंकि इस दिन नए अनाज की शुरुआत भगवान को भोग लगाकर की जाती है। इस दिन गाय-बैल आदि पशुओं को स्नान कराके धूप-चंदन तथा फूल माला पहनाकर उनकी पूजा की जाती है और गोमाता को मिठाई खिलाकर आरती उतारते हैं। इसके बाद परिक्रमा भी करते हैं।

इस दिन घर के मुख्य द्वार पर गाय के गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। ग्रंथों में बताया गया है कि गाय के गोबर में भी लक्ष्मी का निवास होता है। इसलिए सुख और समृद्धि के लिए भी गोवर्धन पूजा करने की परंपरा है। इस दिन गायों की सेवा का महत्व है। गोवर्धन पूजा कुछ जगहों पर सुबह की जाती है, वहीं कुछ हिस्सों में इस पूजा के लिए प्रदोष काल को शुभ माना गया है।

महाराज छत्रसाल आते थे दर्शन करने

इस मंदिर का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है, कहते हैं कि भगवान श्री बांके बिहारी के दर्शन करने महाराज छत्रसाल पड़रिया धाम आया करते थे। वह यहां कई-कई दिनों तक अपने लश्कर के साथ रुकते थे।

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