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जागरूकता कार्यक्रम:6 माह के बच्चे को अर्ध ठोस आहार देना शुरू करें: हेमलता

बकस्वाहाएक महीने पहले
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  • पोषण माह के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों में आयोजित हो रहे जागरूकता कार्यक्रम

कुपोषण दूर करने के लिए शासन द्वारा पोषण अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गांव गांव कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को पोषण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

पोषण माह सितंबर 2020 के तहत महिला एवं बाल विकास अधिकारी हेमलता ठाकुर के निर्देशानुसार आंगनवाड़ी केंद्र वार्ड क्रमांक 12 में कोविड-19 को ध्यान में रखते हुए टीकाकरण सत्र बीएचएनडी के माध्यम से सामुदायिक ग्रह भेंट के द्वारा एवं अन्य कार्यक्रमों से समुदाय के लोगों को पोषण के प्रति जागरूक किया गया।

पोषण माह के द्वितीय सप्ताह मे आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा वायरस कोविड-19 ध्यान में रखते हुए पोषण मटका कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसके माध्यम से पोषण के लिए आवश्यक विभिन्न पोषक तत्वों के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम में 6 माह से 2 वर्ष के बच्चों की माताओं को परियोजना अधिकारी हेमलता ने बताया कि समाज में कुछ भ्रांतियां हैं जैसे बच्चे के ऊपरी आहार की शुरुआत मामा के यहां से की जाती है।

परंतु जब बच्चा मामा के यहां जाता है तो कभी-कभी वह 6 माह से कम उम्र का होता है अथवा कभी-कभी 1 वर्ष तक भी मामा के यहां नहीं पहुंच पाता है। तो क्या ऐसे में बच्चे के ऊपरी आहार की शुरुआत मामा के यहां से ही की जाए। ऐसा नहीं है बच्चे के ऊपरी आहार की शुरुआत 6 माह पूरा होने पर ही करना चाहिए। क्योंकि जन्म के 6 माह के बाद बच्चे को मां के दूध के अलावा ऊपरी आहार की आवश्यकता होती है।

अतः 6 माह पूरा होते ही बच्चे को अर्ध ठोस आहार देना शुरू कर देना चाहिए। अक्सर 6 माह से 2 वर्ष के बीच के बच्चे ही अधिक बीमार होते हैं एवं कुपोषण का शिकार होते हैं। क्योंकि इस उम्र में बच्चा चलना फिरना सीख जाता है जिससे वह जमीन में पड़ी हुई गंदी वस्तु को मुंह खाने लगता है। जिसके कारण वायरस अंदर चले जाते हैं और बच्चा बीमार पड़ जाता है।

उन्होने बताया कि समुदाय में ऐसी भ्रांतियां होती हैं कि बच्चे को नजर लग गई है और वह झाड़-फूंक के चक्कर में फंस जाते हैं तथा बच्चा दिन पर दिन बीमार होता चला जाता है एवं कुपोषण का शिकार हो जाता है। हम सभी को अपने बच्चे पर ज्यादा ध्यान देना है उसके पोषण आहार पर ज्यादा ध्यान देना है न कि झाड़-फूंक पर। यदि बच्चा बीमार पड़ता है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए ताकि बच्चों को सही समय पर इलाज मिल सके।

इस अवसर पर आंगनवाड़ी सहायिका ने पोषण गीत के माध्यम से पोषण संबंधी शिक्षा प्रदान की। इस कार्यक्रम में पोषण प्रदर्शनी भी लगाई गई।

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