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हनुमान मंदिरों में हो रहे कई आयोजन:आषाढ़ माह में बीना और खुरई के मंदिरों में लगा भक्तों का तांता, बुंदेलखंड में आज भी चल रही प्राचीन परंपरा

बीना3 महीने पहले

आषाढ़ माह में पूजा पाठ का विशेष महत्व होता है। आषाढ़ माह के दूसरे मंगलवार को आज सभी हनुमान मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। वहीं देव स्थानों पर महिलाएं दाल बांटी बनाकर अपने परिवार और परिचितों को खाना खिलाती है।

मंदिरों में हो रहे कई आयोजन

आषाढ़ माह के दूसरे मंगलवार को बीना और खुरई के हनुमान मंदिरों में हनुमान जी का विशेष पूजन किया जा रहा है। बीना के गुलौआ हनुमान मंदिर, कटरा हनुमान मंदिर के साथ खुरई के पुराने हनुमान मंदिर, पतालिया हनुमान मंदिर, पठार पर स्थित सिद्धि सागर हनुमान मंदिर सहित सभी हनुमान मंदिरों में सुबह से ही बजरंग बाण, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, रामायण का पाठ आयोजित किया जा रहा है। इसी के साथ बड़ी संख्या में लोग मंदिरों में भगवान सत्यनारायण की कथा भी करवा रहे है। शुभ फल पाने के लिए भक्त हनुमान जी की विशेष आराधना कर रहे हैं।

आषाढ़ माह में पूजा का रहता है विशेष महत्व

पंडित हरिओम शर्मा ने बताया कि हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार आषाढ़ माह में भगवान की पूजा करने और दान देने से ही बहुत पुण्य फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस माह में किया गया दान सुखदायक और फलदायक होता है। इसी के चलते हनुमान मंदिरों में भक्तों के ओर से चोला चढ़ाने बड़ी संख्या में मंदिर पहुंच रहे है।

आषाढ़ माह में बुंदेलखंड में यह प्राचीन परंपरा है प्रसिद्ध

बुंदेलखंड में आज भी आषाढ़ माह में देव स्थानों पर घर के बाहर देव स्थानों पर खाना बनाने की परंपरा बहुत प्राचीन है। पंडित हरिओम शर्मा ने बताया कि आषाढ़ माह में परिवार सहित परिचित लोगों को देव स्थानों पर भोजन कराने व दान पुण्य करने से सभी मनोरथ पूरे होते हैं।

देव स्थानों पर महिलाएं दाल बांटी व लड्डू, आम सभी प्रकार के स्वादिष्ट भोजन अपने हाथों से तैयार करके भगवान को भोग लगाकर अपने परिवार और परिचित लोगों को भोजन कराती है।

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