नारी सशक्तिकरण:लॉकडाउन में महिलाओं ने मास्क, सैनिटाइजर और हैंडवॉश किए तैयार, बनीं आत्मनिर्भर

बीना9 महीने पहले
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ग्राम मेवली में महिलाएं मास्क और सैनिटाइजर बनाने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की। - Dainik Bhaskar
ग्राम मेवली में महिलाएं मास्क और सैनिटाइजर बनाने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की।

कोरोना संक्रमण के कारण लगे लॉकडाउन में जहां सभी लोग अपने अपने घरों में बंद रहे। वहीं ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं ने मास्क, सैनिटाइजर, हैंड वॉश एवं वाशिंग पाउडर बनाकर जहां देश की सेवा की वहीं आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार का पालन पोषण भी किया। हम बात कर रहे हैं मेवली और पीपरखेड़ी गांव की जहां महिलाओं के समूहों ने आजीविका मिशन से जुड़कर कोरोना काल से कार्य कर आत्मनिर्भर बनी हैं। इन दोनों स्थानों पर महिलाओं ने डेढ़ लाख के आसपास मास्क एवं बड़ी मात्रा में सैनिटाइजर तैयार किया है।

समूह सीआरपी मेवली निवासी रश्मि राय ने बताया कि क्षेत्र में 4 स्व सहायता समूह में 52 महिलाएं कार्य कर रही हैं। जिसमें श्रीगणेश स्व सहायता समूह में 12 महिलाएं काम कर रही है। यह समूह वॉशिंग पावडर, स्कूल गणवेश और मास्क बना रहा है। दूसरा समूह भोले बाबा स्व सहायता समूह है, जिसमें 14 महिलाएं चप्पल बना रही है। वैभव लक्ष्मी स्व सहायता समूह में 12 महिलाएं काम कर रही है जो हैंड वॉश, सैनिटाइजर बना रही है। इसके अलावा भारतीय स्व सहायता समूह में 12 महिलाएं है, जो एमडीएम का काम देखती है।

50 हजार मास्क, 300 लीटर सैनिटाइजर तैयार
लॉकडाउन के दौरान सभी ने एकजुटता का परिचय देते हुए कोरोना काल में सभी ने करीब 50 हजार मास्क बनाए, इसके अलावा 100 लीटर हैंड वॉश बनाया जिसे बंडा में भेजा गया। वहीं करीब 300 लीटर सैनिटाइजर तैयार किया गया, जिसे सागर में बेंचा गया। उन्होंने बताया कि महिलाओं को कम से कम 3 हजार रुपए की प्रतिमाह इनकम हुई है। साथ ही यह महिलाएं 10 रुपए सप्ताह एवं 40 रुपए प्रतिमाह के हिसाब से बचत भी कर रही है। कुछ महिलाएं इससे भी अधिक कमा रही है। जिससे वह आत्म निर्भर बन रही है।

वहीं विकास खंड प्रबंधक आजीविका मिशन रवि भूषण भटेले ने बताया कि करीब एक लाख के आसपास पीपलखेड़ी में समूह की 14 महिलाओं ने करीब एक लाख मास्क बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि दोनों सथानों पर महिलाओं ने करीब दो लाख मास्क तैयार किए है।

तीन गौशालाएं को भी चला रहीं महिलाएं
विकास खंड प्रबंधक आजीविका मिशन भटेले ने बताया कि इसके अलावा महिलाओं के समूह ग्राम देवल, लखाहर एवं ऐरन की गौशालाओं का भी 12-12 महिलाओं के समूह संचालन कर रहे है। लेकिन इनका अभी शुरुआती दौर है। लेकिन अभी ये महिलाएं गोबर के कंडे एवं गोवर से निर्मित लकड़ी बनाने का कार्य कर रही है।

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