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शुभ मुहूर्त:खरीदी, मांगलिक और शुभ कार्य के लिए आज से 9 श्रेष्ठ मुहूर्त

छतरपुर2 महीने पहले
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  • ज्येष्ठ महीने में शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी 21 जून को निर्जला एकादशी का व्रत रखेंगी महिलाएं

रवि पुष्य योग भले ही कोरोना कर्फ्यू के चलते रविवार को निकल गया हो और बाजार बंद होने से आप खरीदी नहीं कर पाए हों, लेकिन उदास होने की जरूरत नहीं है। अनलॉक के बाद अब जून के शेष दिनों में खरीदी और मांगलिक व शुभ कार्य के लिए अभी 9 श्रेष्ठ मुहूर्त और पर्व हैं।

इन दिनों में की गई खरीदारी या सौदा लाभदायक माना जाता है। इन दिनों में सभी प्रकार के मांगलिक व शुभ कार्य करना श्रेष्ठ होगा। जिसमें गंगा दशहरा भी इसी माह है। पंडित सतानंद पांडे ने बताया कि आज शनिवार 19 जून से 24 जून तक यह योग है। इस दौरान विभिन्न व्रत त्योहार भी आ रहे है।

23 और 26 जून को बन रहे शुभ योग, शुरू करें कार्य
पंडित पांडे ने बताया कि बुधवार 23 जून को सर्वार्थ सिद्धि व अमृत योग सुबह 5.50 से रात 11:47 बजे तक रहेगा। शनिवार 26 जून सर्वार्थ सिद्धि योग शाम 5 से रविवार सुबह 5.52 बजे तक रहेगा। इस दिन रवि योग भी रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग के नाम से ही स्पष्ट है कि इस दिन शुभ कार्य यदि किया जाता है तो वह सफल होता है। इस दिन भूमि, भवन खरीदी के लिए एडवांस देना, वस्त्र, आभूषण और वाहन खरीदने के लिए शुभ माना जाता है।

इस पांच दिनों में रहेंगे प्रमुख व्रत व त्योहार

  • 19 जून को महेश नवमी: माहेश्वरी समाज द्वारा महेश नवमी मनाई जाती है। इस दिन अभिषेक पूजन-आदि करते है।
  • 20 जून गंगा दशहरा-भैरव जयंती: ज्येष्ठ महीने के शुक्लपक्ष की दशमी को यह व्रत किया जाता है। इस तिथि को शास्त्रों में अबूझ मुहूर्त की श्रेणी में रखा है। इस दिन गृह प्रवेश, गृहारंभ, विवाह, मुंडन जैसे कार्यों को भी किया जा सकता है। गंगा दशमी के दिन गंगा स्नान और विशेष पूजा की जाती है। इसके साथ ही इस दिन दान का भी महत्व है। इसी दिन श्री बटुक भैरव जयंती होने से भैरव पूजन किया जाता है।
  • 21 जून निर्जला एकादशी : ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि यानी 21 जून को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। इस व्रत में पानी पीए बिना रहा जाता है, अर्थात निर्जल रहकर उपवास रखने का विधान है। इस दिन भगवान को आम का फल चढ़ाकर उसे ग्रहण किया जा सकता है।
  • 22 जून को प्रदोष व्रत : ज्येष्ठ माह द्वादशी मंगलवार 22 जून को मंगल प्रदोष रहेगा। इस दिन शाम की संध्या वेला में भगवान शिव-पार्वती का पूजन करना चाहिए।
  • 24 जून को वट सावित्री व्रत: पं. सतानंद पांडे ने बताया कि स्कंद पुराण और भविष्योत्तर पुराण के अनुसार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को वट सावित्री व्रत करने का विधान बताया गया है।
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