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कार्यक्रम का आयोजन:आदित्य सागर ने कहा सिद्ध भगवानों के समूह की आराधना करना ही सिद्धचक्र कहलाता है

छतरपुर11 दिन पहले
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  • अतिशय क्षेत्र डेरा पहाड़ी पर विश्व शांति महायज्ञ के साथ होगा सिद्ध चक्र विधान का समापन

शहर में पुराना पन्ना नाका स्थित अतिशय क्षेत्र डेरा पहाड़ी में सिद्धचक्र विधान 30 मार्च से चल रहा है। यह आयोजन आचार्य विशुद्ध सागर महाराज के परम शिष्य मुनि आदित्य सागर महाराज, मुनि अप्रमित सागर महाराज, मुनि सहज सागर महाराज के सानिध्य में डेरा पहाड़ी पर बड़े उत्साह और धूम धाम से मनाया जा रहा है। वर्तमान में मुनि आदित्य सागर महाराज ससंघ डेरा पहाड़ी में विराजमान हैं।

मुनि आदित्य सागर महाराज ने इस अवसर पर कहा कि सिद्ध भगवानों के समूह की आराधना करना सिद्धचक कहलाता है। एक दृष्टांत सुनाते हुए उन्होंने कहा कि एक राजा को इस बात का घमंड हो गया कि सभी उसका दिया हुआ खाते हैं। एक दिन उसने अपनी दोनों पुत्रियों को बुलाया। जिसमें से एक पुत्री ने अपने भाग्य से खाने की बात कही।

इस पर राजा नाराज हो गया और उसने पुत्री मेना सुंदरी का विवाह कोढ़ी से करा दिया। जैन मंदिर में उसे सिद्धचक्र विधान करने के बारे में बताया। सिद्धचक्र विधान करने पर उसके पति का कोढ़ दूर हो गया। पहले दिन 8, इसके बाद 16, 32, 64, 128, 256, 572 व आखिरी दिन 1024 अर्घ क्रम से प्रतिदिन चढ़ाए जाते हैं। इस अवसर पर जैन समाज अध्यक्ष जय कुमार जैन, महामंत्री सुदेश जैन, विधानकर्ता शैलेंद्र जैन, सुधीर बड़कुल,संजू बड़कुल, राजेश बड़कुल, संजीव, प्रदीप चौधरी, देवराज जैन, राजेंद्र जैन, विमल जैन, कमल जैन, अजित जैन, प्रवीण जैन, प्रेमचंद्र जैन सहित सैकड़ों की संख्या में महिला, पुरुष मौजूद रहे।

जैन समाज के प्रवक्ता अजित जैन ने बताया कि विधान के आयोजक शैलेंद्र जैन एवं उनके परिवार द्वारा जैन समाज के सहयोग से मुनि के सानिध्य में भोपाल से आए संगीतकार की मधुर आवाज में बड़े धूमधाम से अतिशय क्षेत्र डेरा पहाड़ी पर सिद्धों की आराधना की जा रही है। सिद्धचक्र महामंडल विधान विधानों का राजा है। विधान में व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि सिद्ध परमेष्ठी भगवान की आराधना की जाती है।

सिद्धचक्र विधान में आज अंतिम दिन 1024 अर्घ चढ़ाए गए। प्रत्येक दिन विधान की शुरुआत भगवान के अभिषेक, शांति धारा और पूजन के साथ की गई। इसके बाद क्रमशा अर्घ चढ़ाया गया। इस सिद्धचक्र महामंडल विधान में अनेक विधान समाहित हैं। मोह चक्र के वशीभूत प्राणी को सांसारिक चक्र से पार पाने के लिए सिद्धचक्र की आराधना करनी होगी, सिद्धचक्र का विधान मैना सुंदरी और श्रीपाल ने किया था। सकारात्मक और सफल जीवन के लिए सभी लोगों को अपने जीवन में धर्म को महत्व देना चाहिए।

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