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खजुराहो नृत्योत्सव:शिव जी की बारात पर भूत पिशाच के चित्रण पर कलाप्रेमियों ने की तारीफ

खजुराहो12 दिन पहले
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47वें नृत्योत्सव की चौथी शाम ओडिसी युगल, सत्रिया समूह और कथक नृत्य की प्रस्तुतियां हुईं। - Dainik Bhaskar
47वें नृत्योत्सव की चौथी शाम ओडिसी युगल, सत्रिया समूह और कथक नृत्य की प्रस्तुतियां हुईं।
  • विनोद-वृंदा ने विष्णु के दस अवतार, अनीता ने कंश वध दिखाया

47वें नृत्योत्सव की चौथी शाम ओडिसी युगल, सत्रिया समूह और कथक नृत्य की प्रस्तुतियां हुईं। चौथी शाम आयोजन स्थल पर कलाप्रेमी दर्शकों की खासी मौजूदगी और तालियों की गड़गड़ाहट कलाकारों का उत्साहवर्धन करती रही।

नृत्योत्सव की चौथी शाम का आगाज विनोद केविन बच्चन एवं वृंदा चड्‌ढा के शानदार ओडिसी युगल नृत्य से हुआ। नृत्यकारों ने अपनी पहली प्रस्तुति “अर्धनारीश्वर’’ की दी। इसमें उन्होंने शिव पार्वती के एकाकार होने का सजीव नृत्य चित्रण किया। जो राग मालिका में निबद्ध था। उन्होंने दूसरी प्रस्तुति ओडिसी नृत्य के शुद्ध नृत्य को “पल्लवी’’ में मनमोहक ढंग से प्रस्तुत किया।

अंत में उन्होंने “दस अवतार’’ नाम की प्रस्तुति दी। जिसमे भगवान विष्णु के 10 अवतारों का शानदार विवरण, चित्रण था। इस प्रस्तुति को कला प्रेमियों ने खूब सराहा। पल्लवी नाम की प्रस्तुति ताल “एक ताली’’ और “राग भैरवी’’ में निबद्ध थी।

ताल रूपक और एक ताल में निबद्ध थी कृष्ण वंदना

दूसरे चरण में सत्रिया नृत्य की नृत्यांगना अनीता शर्मा एवं समूह ने श्रीकृष्ण वंदना से अपने नृत्य का शुभारंभ किया। यह नृत्य “ताल रूपक’’ एवं “एक ताल’’ में निबद्ध थी। उन्होंने सत्रिया नृत्य के शुद्ध पक्ष को भी बहुत ही सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया। उन्होंने “लीला पुरुषोत्तम’’ की अभिनय युक्त प्रस्तुति दी। यह नृत्य गीत “जय जय रघुकुल कमल’’ के बोल पर लय ताल के साथ पेश किया।

अनीता शर्मा ने “लीला गोविंद’’ नाम की प्रस्तुति में महाभारत के “वकासुर वध और कंश वध’’ के प्रसंग को अपने नृत्य में पिरोकर मनभावन अंदाज में चित्रित किया। विशाल परिसर गगनभेदी करतल ध्वनि से गुंजायमान हो उठा। इस प्रस्तुति को देख महाभारत के अनेक प्रसंग नजरों के सामने चलचित्र की भांति चित्रित होने लगे।

कथक: शिव-पार्वती विवाह का चित्रण

चौथी शाम के अंतिम चरण में नृत्यांगना प्रिया श्रीवास्तव ने कथक नृत्य पेश किया। उन्होंने अपने नृत्य की शुरुआत कथक शैली में “शिव स्तुति’’ से की। उन्होंने रायगढ़ घराने की शैली में वंदिशें, ताल, तोड़े, टुकड़े, गत, निकास आदि प्रस्तुत कर सुधि दर्शकों को सम्मोहित कर दिया। उन्होंने अंत में राजा चक्रधर की रचना “नव रस’’ पर एक भाव गीत पर ठुमरी प्रस्तुत किया।

जिसके बोल थे “गोरी सलोनी तोरे नैन नवल मध्य हंसत हैं’’ यह राग खमाज पर निबद्ध था को प्रस्तुत कर कलाप्रेमियों को लुभाया। इस प्रस्तुति में भगवान शिव और पार्वती के शुभ विवाह का चित्रण था। जिसमें शिव के रूप से लेकर बारात में भूत पिशाच आदि का काफी आकर्षक चित्रण था। उनके नृत्य पर तबले पर रामचंद्र सरपे ने, पड़न पर पूनम सरपे ने, हारमोनियम एवं गायन पर एल आर लूनिया और सारंगी पर सलमान खान ने संगत दी।

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