ग्वालियर तक पहुंचा टिड्डी दल / टिड्‌डी दल को किसान थाली, ढोलक, वाहन के सायलेंसर व खाली टीन के डिब्बे बजाकर भगाएं

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  • बचाव के लिए किसान कल्याण विभाग ने की किसानों को की सलाह जारी

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

छतरपुर. किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के उप संचालक ने टिड्डी दल से फसलों के बचाव के लिए किसानों से सतर्क रहने काे कहा है। उन्होंने टिड्डी दल से फसलों के बचाव के लिए जिले के किसानों को सलाह देते हुए बताया कि प्रदेश के कई भागों में टिड्डी दल के प्रकोप की सूचनाएं प्राप्त हो रही हैं, जो जिले में भी पहुंच सकती है। 

टिड्डा-टिड्डी दल फसलों को नुकसान पहुंचाने वाला कीट हैं, जो समूह में एक साथ चलता है और बहुत लंबी-लंबी दूरियों तक उड़ान भरता है। यह फसल को चबाकर अौर काटकर खाने से नुकसान पहुंचाता है। इसलिए उद्यानिकी फसलों, वृक्षों एवं कृषि की फसलों को बहुत बड़े स्वरूप में एक साथ हानि पहुंचा सकता है। यदि जिले में टिड्डी दल का प्रकोप आता है तो इसके नियंत्रण के लिए किसान दो प्रकार के साधन अपना सकते है।
भौतिक साधन या रसायनिक नियंत्रण से 
उप संचालक मनोज कश्यप ने बताया कि किसान भाई टोली बनाकर विभिन्न प्रकार से परंपरागत उपाय जैसे शोर मचाकर, ध्वनि वाले यंत्रों को बजाकर डराकर भगाया जा सकता है। इसके लिए मांदल, ढोलक, ट्रैक्टर या बाइक का सायलेंसर, खाली टीन के डिब्बे, थाली के सामूहिक प्रयास से ध्वनि की जा सकती है। ऐसा करने से टिड्डी दल नीचे नहीं आकर फसलों पर न बैठकर आगे निकल जाता है। उन्होंने बताया कि रसायनिक नियंत्रण में सुबह से कीटनाशी दवा ट्रैक्टर चलित स्ने पंप, पावर स्प्रेयर द्वारा, जैसे क्लोरोपायरीफॉस 20 ईसी 1200 मिली या डेल्टामेथरिन 2.8 इसी 600 मिली या लेम्डाईलोथिन 5 इसी 400 मिली, डाईफलूबिनज्यूरॉन 25 डब्ल्यूटी 240 ग्राम प्रति हैक्ट 600 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

100 से 150 किमी की गति से उड़ता है दल
टिड्डी दल वर्तमान में ग्वालियर संभाग तक पहुंच गया है, जो कि हवा की गति अनुसार लगभग 100-150 किमी प्रति घंटा की गति से उड़ता है। सभी किसानों से अनुरोध है कि, सतत निगरानी रखें और टिड्डी दल का प्रकोप होने पर बताई गई विधियों को अपनाकर फसलों का बचाव करें।

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