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समीक्षा बैठक:घर या क्लीनिक पर मरीज को उपचार देने वाले डॉक्टरों पर होगी एफआईआर

छतरपुर2 महीने पहले
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  • जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने स्वास्थ्य अधिकारियों को दिए निर्देश
  • हर मगंलवार को होगी जिला अस्पताल की समीक्षा

कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति की गहन समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस दौरान दो टूक शब्दों में जिला अस्पताल के डॉक्टरों से कहा गया कि उपचार के लिए आने वाले रोगियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए निर्धारित ड्यूटी टाइम के अनुसार गंभीरता से करें। डॉक्टर रोगी को उपचार के लिए स्वयं के निवास या निजी अस्पताल में न बुलाएं।

कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने कहा कि निर्देश के बावजूद जो डॉक्टर ऐसा करते पाएं जाएंगे, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी और शासकीय दायित्व निर्वहन की अव्हेलना की कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में सीएमएचओ डॉ. विजय पथौरिया, सिविल सर्जन डाॅ. लखन तिवारी सहित जिले के बीएमओ व संबंधित समिति के अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिला अस्पताल की हर मंगलवार को समीक्षा की जाएगी। इस बैठक के लिए संबंधित अधिकारियों को भी उपस्थित रहने के लिए नामांकित किया गया है। बैठक के प्रारंभ में गत मीटिंग के पालन प्रतिवेदन की समीक्षा की गई।

उन्होंने कहा कि डॉक्टर लक्ष्य के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण तरीके से कार्य करते हुए उपलब्धि हासिल करें और आम, गरीब तबकों व समाज के कमजोर लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराएं। योजना के प्रभारी अधिकारी पूरी जिम्मेदारी से गुणवत्तापूर्ण तरीके से कार्य करें।

पूर्णा अभियान की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिए कि ऐसे गांव जहां जननी माता और बच्चे की कुपोषण सहित गंभीर रोगों के कारण आकस्मिक मृत्यु हुई है, उन ग्रामों में जनजागृति अभियान चलाएं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि डॉक्टर सहित स्वास्थ्य व महिला बाल विकास के सभी संबंधित अधिकारी, कर्मचारी सफल डिलेवरी होेने तक सजगता से उत्तरदायित्व का निर्वहन करेें और मां एवं बच्चे दोनों को पोषित व स्वस्थ रखें। एनआरसी अभियान की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि जहां अति कुपोषित बच्चे पाए गए हैं, उन क्षेत्रों के बीएमओ से स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए हैं।

संस्थागत डिलेवरी कराने पर दिया जोर

कलेक्टर ने जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में निर्देश दिए कि शत प्रतिशत प्रसूति माता व नवजात बच्चे के सुरक्षित जीवन के लिए संस्थागत प्रसूति पर सजगता से ध्यान दें और चिन्हित प्रसूति माता सहित उनके परिवारजनों को संस्था में प्रसव कराने के लिए प्रेरित करें।

उन्होंने कहा कि संस्था की अपेक्षा घर में प्रसूति कराना न सिर्फ जननी माता अपितु बच्चे के लिए खतरनाक होता है। साथ ही मां एवं बच्चे पर आकस्मिक स्थिति निर्मित होने का खतरा बना रहता है। प्रसूति महिला, उसके परिवार और उसके निवास स्थान की जानकारी के आधार पर प्रसूति होने के अनुमानित दिवस की जानकारी के आधार पर संबंधित महिला को संस्था में सुरक्षित प्रसव कराने के लिए उसे संस्था में लाने से जुड़ी कार्रवाई समय पर करें, जिससे मां और बच्चे सुरक्षित रहें।

उन्होंने कहा कि घर में प्रसव होने पर संक्रमण का खतरा होने के साथ परिवार का अनावश्यक बोझ बढ़ता है, साथ ही उन्हें संस्था में प्रसव कराने की स्थिति में सरकार की ओर से दी जाने वाली सहायता राशि का नुकसान भी होता है। घर में प्रसव को रोकने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और आशा कार्यकर्ता के साथ क्षेत्र के डॉक्टर मिलकर संस्थागत प्रसव कराने की जिम्मेदारी लें। इसके लिए प्लानिंग करने के साथ फाॅलोअप भी करें, जिससे शत प्रतिशत संस्थागत डिलेवरी कराई जा सके।

अन्य कार्यक्रमों की भी हुई समीक्षा

बैठक में नीति आयोग सूचकांक, मिनी आरकेएस, आरबीएसके, आंगनबाड़ी केंद्रों से वितरित होने वाली आयरन टेबलेट, 10 से 19 वर्ष के शाला त्यागी बच्चों को दी जाने वाली आयरन टेबलेट, नवजात बच्चे के वजन, टीकाकरण, आयुष्मान भारत, आरसीएच पोर्टल, जननी एक्सप्रेस, अंतरा योजना, कोरोना संक्रमण में सैंपल टेस्ट, कायाकल्प अभियान सहित लेप्रोसी कार्यक्रम की समीक्षा की गई।

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