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  • Hundreds Of Crores Of Rupees Spent On Stop Dams, Due To Lack Of Maintenance Due To The Opening Of The Gates, No Water Harvesting

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बकस्वाहा में जलसंकट:स्टाप डैम पर करोड़ों खर्च, रखरखाव के अभाव में फाटक खुले होने से नहीं हुआ जलसंग्रहण

छतरपुर13 दिन पहले
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  • जलसंरक्षण के प्रतीक स्टाप डैम शासन प्रशासन के अधकारियों की लापरवाही के कारण आज खाली पड़े हैं

बकस्वाहा तहसील क्षेत्र में बुंदेलखंड पैकेट से करोड़ों की लागत से करीब 50 स्टापडेम बनाए गए थे। इन स्टाप डैम के पीछे शासन का उद्देश्य जल संग्रह करना था। लेकिन आज जिम्मेदारों की लापरवाही व उदासीनता के चलते यह अधिकांश स्टाप डैम फाटक विहीन हैं, जिससे पानी का संग्रहण नहीं हो सका। परिणाम स्वरूप सभी स्टाप डैम सूखे पड़े पड़े हैं।

बकस्वाहा क्षेत्र में कम बारिश होने के कारण किसानों के सामने यही नदी नाले भरोसे के लायक होते हैं। लेकिन प्रशासन की लापरवाही के चलते इन अधिकांश स्टाप डैम में फाटक नहीं लगाए, अगर लगाए गए हैं तो उन्हें लोग चुरा कर ले गए। जिससे आज अधिकांश फाटक विहीन हैं और सूखे पड़े हैं। जलसंरक्षण के नाम पर केवल करोड़ों रुपयों को ठिकाने लगाया गया है। यह जलसंरक्षण के प्रतीक स्टाप डैम शासन प्रशासन की कार्यप्रणाली की पोल खोल रहे हैं। इस ओर किसी अधिकारी का ध्यान ही नही हैं।

पानी की कमी के कारण प्यासे मर रहे मवेशी, स्टापडेम क्षतिग्रस्त होते जा रहे हैं
सरकार द्वारा स्टापडेम बनाने का मुख्य उद्देश्य मवेशियों को जल उपलब्ध कराने का होता है। पर इनमें गेट न होने से जल संग्रह नहीं हो पाता जिससे पानी की तलाश में आए मवेशियों को पानी भी नसीब नहीं हो पाता। जल संरक्षण योजना के तहत ग्राम पंचायत बम्हौरी के आसपास क़रीब 15, बीरमपुरा पंचायत के करीब 10, निबार में 5, सुनहरा में 15, बकस्वाहा में 5 स्टापडैम बनाए गए हैं।

उनमें से कुछ स्टापडेम क्षतिग्रस्त होते जा रहे हैं। स्टापडेम को जल संग्रह के उद्देश्य से बनाया गया था पर न तो इनमें गेट दिखाई देते हैं और न ही जल रोकने की कोई युक्ति अपनाई जा रही है। दैनिक भास्कर ने एक ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार पाया कि किसी भी स्टापडैम में गेट नहीं मिले। जिससे उनमें जल भराव नहीं हुआ।

ये हैं इनके जिम्मेदार

पंचायत व जनपद पंचायत के अधिकारी

क्यों : स्टाप डैम को जलसंरक्षण के उद्देश्य से करोड़ों रुपए खर्च कर बनाया गया। लेकिन उनमें फाटक नहीं लगाए गए। कुछ में लगे तो लोग निकाल कर ले गए। जिम्मेदारों ने करोड़ों की राशि खर्च होने के बावजूद इनका रखरखाव नहीं किया, न ही फाटक लगाने का प्रयास किया। अगर इनमें फाटक लगाए गए होेते और इनका रखरखाव किया गया होता तो यह नौवत नहीं आती।

आपके माध्यम से जानकारी मिली है, अभी बरसता आने मे लगभग एक माह का समय बाकी है। तब तक मैं सभी स्टाप डेमो मे गेट लगवाने की व्यवस्था करता हूं।
हर्ष खरे,सीईओ, जनपद पंचायत बकस्वाहा

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