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तेल में तेजी:मलेशिया, इंडोनेशिया, ब्राजील से आवक रुकी, प्लांट पूरी क्षमता से चालू नहीं, फसल बिगड़ी

छतरपुर2 महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो
  • नतीजा; 85 से 135 रु. किलो हुआ सोयाबीन का तेल
  • व्यापारी बोले; अभी और भी बढ़ सकती है कीमत, मार्च में सरसों की फसल आने पर थोड़ी राहत मिलने की संभावना

सोयाबीन के तेल की कीमत में रिकॉर्ड तोड़ उछाल आया है। कोरोना महामारी से पहले सोयाबीन तेल 85 से 87 रुपए किलो था अब इसकी कीमत बढ़कर 135 रुपए हो गई हैं। यानी एक किलो पर सीधे 50 रुपए बढ़ गए। परेशानी वाली बात तो ये कि कीमत आगे और बढ़ने की बात कही जा रही हैं। इन तमाम परिस्थितियों के बीच आम व्यक्ति का बजट गड़बड़ाने लगा है। व्यापारियों के मुताबिक तेज में तेजी की वजह अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की परिस्थितियों के साथ ही पिछले साल सोयाबीन फसल को हुआ नुकसान भी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोयाबीन के भाव 2014 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर है।

ये हैं खास कारण जिससे तेल की कीमतें बढ़ रही...

  • सोयाबीन की फसल खराब हुई। लिहाजा तेल उत्पादन भी प्रभावित हुआ।
  • सोयाबीन के दामों में 800 से लेकर हजार रुपए क्विंटल तक की बढ़ोत्तरी।
  • कुछ बिचौलिए व दलाल सक्रिय हैं, जो तेल का स्टाक कर या उसे रोककर मांग व आपूर्ति में अंतर बढ़ाते हुए कीमत बढ़ने की परिस्थितियां पैदा कर रहे हैं।
  • इंडोनेशिया में हड़ताल के चलते वहां से तेल के जहाज नहीं आ पा रहे हैं।
  • ब्राजील में सरकार बदली है। उस पर सोयाबीन से बनने वाली चीजों पर टैक्स जमा करने का भार है। वे उत्पादन पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।
  • (जानकारी तेल के थोक व्यापारी राहुल माेदी के मुताबिक)

हम पर ये असर: एक परिवार पर 200 रुपए का भार बढ़ापांच लोगों के एक परिवार में 4 से 6 किलो खपत महीने की होती है। गर्मी में यह खपत चार किलो के आसपास होती है तो बारिश और 5 से 6 किलो तक पहुंच जाती है। सितंबर में दाम 85 से 90 रुपए प्रतिकिलो थे, जबकि अभी 135 रुपए प्रतिकिलो तक पहुंच गए हैं। यानी एक परिवार पर न्यूनतम 200 रुपए का भार बढ़ गया है।

आगे क्या: राहत के लिए अगली फसल तक करना पड़ सकता है इंतजारव्यापारियों का कहना है कि भाव में 5-10 रुपए की तेजी और आ सकती है। फरवरी अंत व मार्च शुरु में सरसों की फसल आएगी। इसके बाद सोयाबीन तेल की डिमांड कुछ कम होने लगेगी। तब कुछ कीमत कम हो सकती है लेकिन ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। ऐसे में लोगों सोयाबीन के तेल की कीमत कम होने के लिए अगली फसल तक का भी इंतजार करना पड़ सकता है।

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