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सिस्टम की बदइंतजामी:रेलवे प्लेटफॉर्म पर ढाई हजार टन से ज्यादा यूरिया बारिश में भीगा, अफसरों ने सैंपल जांच कराने भेजे

हरपालपुर11 दिन पहले
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बारिश से बचाने न रेलवे ने की व्यवस्था, न ठेकेदार ने इंतजाम, छतरपुर-टीकमगढ़ के किसानों को बंटना था - Dainik Bhaskar
बारिश से बचाने न रेलवे ने की व्यवस्था, न ठेकेदार ने इंतजाम, छतरपुर-टीकमगढ़ के किसानों को बंटना था
  • एक दिन पहले ही ट्रेन की 42 बोगियों में आया था एनएफएल कंपनी गुना से

रेलवे स्टेशन हरपालपुर के रैक पाइंट पर मंगलवार को विजयवाड़ा गुना से लोड होकर ट्रेन की 42 बोगियों में 2628.74 मीट्रिक टन यूरिया हरपालपुर रेलवे स्टेशन पर आया। इसे ट्रांसपोर्टर ने बारिश से बचाव के इंतजाम किए बगैर प्लेटफार्म पर डंप कर लिया गया। यह यूरिया छतरपुर और टीकमगढ़ जिले के लिए आया था। लेकिन बारिश के कारण खेताें तक पहुंचने से पहले ही यूरिया पानी में भीग गया।

इसकी शिकायत कृषि विभाग से की गई। नौगांव से आई कृषि विभाग की टीम में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एसके मिश्रा, कृषि विकास अधिकारी वीजे सिंह, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एसके अग्रवाल एवं बीके शुक्ला को भेजा गया। उन्होंने रैक पाइंट पर ही यूरिया का सैंपल लिया और परीक्षण के लिए भेजा है। यदि यूरिया में कोई भी तत्व मानक से कम पाया जाएगा तो उसे वापस किया जाएगा।

इसके पूर्व भी इस टीम द्वारा एक रैक के सैंपल को फैल कर दिया गया था और जो यूरिया ट्रांसपोर्टर द्वारा भीगा हुआ भेज दिया गया है उसके परीक्षण के लिए भी टीम द्वारा सैंपलिंग के लिए आदेशित कर दिया गया है। एनएफएल कंपनी का यूरिया हरपालपुर के लिए 225 मीट्रिक टन, छतरपुर के लिए 400 मीट्रिक टन, पलेरा जिला टीकमगढ़ के लिए 300 मीट्रिक टन, बमीठा 175 मीट्रिक टन, लवकुशनगर के लिए 100 मीट्रिक टन और बिजावर के लिए 100 मीट्रिक टन भेजा जाना था। शेष 1328.74 मीट्रिक टन यूरिया प्राइवेट फर्मों को भेजा जाना था।

रैक पाइंट पर रखने से भीगा खाद
ट्रक मालिकाें का कहना है कि यदि यदि ट्रेन की बाेगी से सीधे ट्रकों में यूरिया लाेड किया जाता ताे बिल्कुल भी नहीं भीगता। लेकिन ट्रांसपोर्टर ने पैसा बचाने के लिए ट्रेन काे जल्दी खाली कराके खाद काे रैक पाइंट पर रखवा दिया। रैक पाइंट पर पानी के बचाव का काेई इंतजाम नहीं किया। ट्रक मालिक अपनी सुविधानुसार परिवहन करते हैं। इसी कारण यह माल पानी में भीगा इसकी जवाबदारी ट्रांसपोर्टर पर होगी।

इसकी जवाबदारी ट्रांसपोर्टर की है
शासकीय गोदामों में माल डंप होने के बाद यदि खराब निकलता है तो उसकी जवाबदारी कंपनी की होगी। लेकिन इसके पहले यदि माल भीगता है। खराब होता है तो उसकी जवाबदारी ट्रांसपोर्टर की होगी।
- राशि रघुवंशी, जिला विपणन अधिकारी छतरपुर

ट्रांसपोर्टर से की जाना चाहिए नुकसान की भरपाई
यह माल अभी ट्रांसपोर्टर के संरक्षण में है। इस कारण इस माल की सुरक्षा की जवाबदारी ट्रांसपोर्टर की होगी। नुकसान की भरपाई ट्रांसपोर्टर से की जाना चाहिए।
- भैयाजी पटेल, क्षेत्रीय मैनेजर एनएफएल कंपनी गुना

रेलवे ने माल की सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए
रेलवे को हम 6000 रुपए प्रति घंटा के हिसाब से पेनाल्टी देते हैं। लेकिन रेलवे द्वारा माल की सुरक्षा के लिए कोई भी इंतजाम नहीं किए गए, जो बोरी खराब हो गई है। शासन द्वारा रिजेक्ट होगी। वह कंपनी को वापस की जाएगी।
- रणछोड़ चौरसिया, ट्रांसपोर्टर

कबार सेट के लिए कई बार लिखा पत्र
रेलवे स्टेशन पर माल के लिए कबार सेट के लिए कई बार विभागीय पत्राचार किया जा चुका है। 5 एवं 9 जुलाई को भी इसके लिए पत्र भी लिखा जा चुका है।
- डीके सिंह, स्टेशन मास्टर हरपालपुर

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