अनदेखी:5 दिन से जननी वाहन बंद, अधिक राशि खर्च कर प्रसव कराने जिला अस्पताल पहुंच रही महिलाएं

छतरपुरएक महीने पहले
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जिले भर की महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराने के लिए प्रदेश शासन द्वारा निशुल्क जननी वाहन संचालित किए जाते हैं। पिछले सप्ताह टेंडर बदल जाने से निजी संचालकों ने अपने-अपने वाहन चलाना पांच दिन से बंद कर दिया है। इन वाहनाें के अचानक बंद हो जाने से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के परिजन को अधिक राशि खर्च कर सुरक्षित प्रसव कराना पड़ रहा है। इस बात की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को होने के बाद भी कार्रवाई नहीं की जा रही।

बता दें कि जिले भर की गर्भवती महिलाओं का शासकीय अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव करने के लिए प्रदेश शासन द्वारा 21 जननी वाहन संचालित किए जा रहे थे। अब तक यह वाहन जेडएचएल संस्था के माध्यम से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से संचालित कर गर्भवती महिलाओं को नजदीकी शासकीय अस्पताल पहुंचाया जाता था। पिछले सप्ताह इस संस्था का अनुबंध खत्म हो गया और नया टेंडर जय अंबे प्राइवेट लिमिटेड का हो गया। इसलिए जेडएचएल संस्था के माध्यम से जननी वाहन चलाने वाले प्राइवेट लोगों ने अपने-अपने वाहन चलाना बंद कर दिए हैं। प्राइवेट वाहन संचालकों का कहना है कि सभी जननी वाहनों का तीन-तीन माह से भुगतान नहीं हुआ, साथ ही कंपनी का टेंडर भी खत्म हो गया है। यदि वाहन चलाते हैं तो इसका भुगतान कौन करेगा, इसकी भी जानकारी नहीं है। इसलिए हम लोगों ने अपने-अपने वाहन चलाना बंद कर दिए हैं।

जिले भर में मौजूद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से एक-एक जननी वाहन चालित होता है। ताकि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर इलाज कराने पहुंची गर्भवती महिलाओं को रेफर कर जिला अस्पताल तक पहुंचाया जा सके। साथ ही जिला मुख्यालय से लगे ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को इलाज में परेशान न हो इसके लिए 3 वाहन यहां से संचालित होते हैं। पर पुरानी कंपनी का टेंडर बदल जाने और तीन माह से राशि का भुगतान न होने के कारण संचालकों ने वाहन चलाना बंद कर दिए हैं।

लवकुशनगर में 22 वर्षीय रुचि पति नरेश मिश्रा का सुरक्षित प्रसव कराने के लिए चार दिन पहले परिजन निजी वाहन से जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। मंगलवार की सुबह ड्यूटी डॉक्टर ने जच्चा और बच्चा को सुरक्षित बताते हुए डिस्चार्ज कर दिया। काफी समय तक इंतजार करने के बाद परिजन को जननी वाहन नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने निजी वाहन किराए से लिया और अपने घर गए। परिजन ने बताया कि प्रसव पीड़ी अधिक होने पर प्रसूता को निजी वाहन से जिला अस्पताल लेकर आए। यहां पर काफी इंतजार करने के बाद जब जननी वाहन नहीं मिला, तो निजी वाहन से लेकर जा रहे हैं। जननी वाहन बंद होने कारण प्राइवेट वाहन चालक अधिक रुपए मांग रहे हैं।

प्राथमिकता से शुरू कराएंगे जननी एंबुलेंस : कलेक्टर
इस मामले में कलेक्टर संजीव राजप्पा का कहना है कि उनकी ज्वाइनिंग का पहला दिन है। वे सीएमएचओ से जानकारी लेकर जल्द से जल्द जननी एंबुलेंस वाहनों को शुरू कराएंगे। वहीं सीएमएचओ डाॅ. विजय पथौरिया का कहना है कि संचालकों ने जननी वाहन चलाना बंद कर दिए हैं। इस बात की जानकारी लगने पर उनसे बात कर प्रति किमी की दरें बढ़ा दी गई हैं, जितने वाहन बंद हैं, उनके स्थान पर 108 एंबुलेंस सेवाएं दे रहा है। जल्द ही नई कंपनी अपना कार्य शुरू कर देगी और गर्भवती महिलाओं को होने वाली समस्या हल हो जाएगी।

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