पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

अस्तित्व की लड़ाई:बकस्वाहा में मौजूद शैलचित्र आदिवासी समाज की धरोहर और पूर्वजों की निशानी : शरद कुमरे

छतरपुरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
छतरपुर। बकस्वाहा के जंगलों में मौजूद शैल चित्र। - Dainik Bhaskar
छतरपुर। बकस्वाहा के जंगलों में मौजूद शैल चित्र।
  • बकस्वाहा में आग की खोज के पहले के शैल चित्रों को बचाने आगे आए सामाजिक कार्यकर्ता

जिले के बकस्वाहा क्षेत्र में आग की खोज के पहले के शैल चित्र अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। करीब 25 हजार ईसा पूर्व के अति प्राचीन यह शैलचित्र अपनी उपेक्षा की कहानी खुद बयान कर रहे हैं। इनमें से कई शैल चित्रों को शरारती तत्वों ने क्षतिग्रस्त कर दिया है तो कई शैल चित्रों पर गहरी काई जम गई है।

सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने इन शैल चित्रों के संरक्षण व संवर्धन की मांग करते हुए आदिम काल के इन शैलचित्रों को विश्व धरोहर घोषित करने की मांग उठाई है। पर्यावरण बचाओ अभियान के संस्थापक सदस्य शरद सिंह कुमरे ने कहा कि यह शैलचित्र आदिवासी समाज की धरोहर और हमारे पूर्वजों की निशानी हैं।

इन्हें सुरक्षित रखना चाहिए और विश्व धरोहर के रूप में घोषित करना चाहिए। कुमरे ने मांग की है कि इसके लिए प्रशासन, सरकार और पुरातत्व विभाग को प्रयास करना चाहिए। इससे भारत की दुनिया में प्रतिष्ठा बढ़े। उन्होंने बताया कि इन शैल चित्रों को विश्व धरोहर घोषित कराने के लिए पर्यावरण बचाओ अभियान द्वारा सभी आवश्यक प्रयास किए जाएंगे।

पर्यावरण विद आफताब आलम हाशमी, डॉ. शुभम सैयाम ने कहा कि सरकार को पर्यावरण को प्रदूषित किए बिना संतुलित विकास करना चाहिए। दुनिया में ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज की समस्या भयानक रूप धारण कर रही है।

भीमबैठका विश्व धरोहर में शामिल: यहां सबसे प्राचीन 12000 साल पुराने हैं शैल चित्र

अमित का कहना है कि भीमबैठका में सबसे प्राचीन शैल चित्र 12000 साल पुराने हैं। इस भीमबैठका का नाम विश्व धरोहर में शामिल है। बड़ी संख्या में देसी व विदेशी पर्यटक इन शैल चित्रों को देखने व इनका अध्ययन करने आते हैं। जबकि बकस्वाहा में पाए जाने वाले शैल चित्र उससे लगभग 2 गुना पुराने हैं।

कुमरे का कहना है कि महाराजा कॉलेज के पुरातत्व विभाग के प्रोफेसर एसके छारी ने इन प्रागैतिहासिक शैल चित्रों का अध्ययन कर इस पर शोध पत्र जारी किया है। उन्होंने इसकी जानकारी सभी जिम्मेवार लोगों को दी है। फिर भी इस अति प्राचीन धरोहर की उपेक्षा की जा रही है।

पर्यटक स्थल के रूप में हो सकता विकसित
वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि इस स्थल के पास में ही भीमकुंड व जटाशंकर है। जिससे इस क्षेत्र को एक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे लाखों पर्यटक आएंगे और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। बता दें कि बकस्वाहा के जंगलों को बचाने के लिए भोपाल से पर्यावरण बचाओ अभियान के संस्थापक सदस्य शरद कुमरे, अमित भटनागर, आफताब आलम हाशमी व डॉ शुभम सैयाम सहित भोपाल के पर्यावरण कार्यकर्ता इन दिनों जंगल का भ्रमण कर रहे हैं।

खबरें और भी हैं...