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धर्म:सिद्धचक्र विधान ऐसा अनुष्ठान है जो पाप, ताप और संताप नष्ट कर देता है: महाराज

छतरपुर2 दिन पहले
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  • सिद्धचक्र विधान के समापन पर शहर में निकाली शोभायात्रा, श्रावकों ने भगवान का किया स्वागत

शहर में पुराना पन्ना नाका स्थित अतिशय क्षेत्र डेरा पहाड़ी में सिद्धचक्र विधान पिछले आठ दिनों से तक चल रहा था। जिसका पूर्ण आहुति के साथ विश्व शांति महायज्ञ करते हुए समापन किया गया। इसके बाद भगवान की प्रतिमा चांदी के रथ में रखकर शहर में शोभा यात्रा निकाली गई।
जैन समाज प्रवक्ता अजित जैन ने बताया कि मुनि आदित्य सागर महाराज, मुनि अप्रमित सागर महाराज, मुनि सहज सागर ससंघ जैन धर्मशाला में विराजमान है। उनके सानिध्य में चल रहे सिद्धचक्र विधान का समापन किया गया। अतिशय क्षेत्र डेरा पहाड़ी में भगवान का अभिषेक, शांतिधारा सहित पूजन के कार्यक्रम के बाद अतिशय डेरा पहाड़ी से पुलिस लाइन, पुरानी तहसील, सिटी कोतवाली से होते हुए चांदी के रथ के साथ श्री जी की शोभायात्रा बैंड बाजों के साथ शहर में निकाली गई। इस दौरान सभी श्रावकों एवं भक्तों द्वारा भक्ति कराते हुए और झूमते हुए नेमिनाथ जिनालय तक शोभायात्रा पहुंचाई। तत्पश्चात प्रतिमाओं का फिर से अभिषेक कर यथा स्थान मूर्ति स्थापित की गई।
भगवान की शोभायात्रा बैड बाजों के साथ बड़ी धूमधाम से मुख्य मार्गों से निकाली गई, जिसमे सभी महिला, पुरुष बच्चे लाइन में मास्क लाकर पंक्तिबद्ध होकर चले। सब श्रावकों के परिवारों ने अपने अपने घर के पास श्रीजी की आरती उतार कर वंदना की।
जैसे ही श्री जी का रथ घर के पास आता, सभी श्रावक भक्ति में झूमते हुए खुशियां मनाते। विधान और शोभायात्रा में प्रमुख रूप से जैन समाज अध्यक्ष जय कुमार जैन, महामंत्री सुदेश जैन, प्रदीप चौधरी, देवेंद्र पंडित, कमल जैन, अजित जैन, गोपाल जैन, अंकुर भईया, आकाश जैन, विनी जैन, स्वप्निल जैन विधानकर्ता परिवार संजीव बासल, अजित जैन, विमल जैन सहित समाज के अनेकों लोग मौजूद रहे।
सिद्धचक्र विधान से दिव्य शक्तियां होती हैं प्रकट
मुनि आदित्य सागर महाराज द्वारा विधान का समापन करते हुए बताया कि यह विधान सभी विधान का राजा है, इसमें सभी विधान शामिल हैं। यह एक ऐसा अनुष्ठान है जो हमारी जीवन के सभी पाप, ताप और संताप को नष्ट कर देता है। सिद्ध शब्द का अर्थ है कृत्य-कृत्य, चक्र का अर्थ समूह और मंडल का अर्थ एक प्रकार के वृत्ताकार यंत्र से है।

जिसमें कई प्रकार के मंत्र व बीजाक्षरो की स्थापना की जाती है। मंत्र शास्त्र के अनुसार इसमें अनेक प्रकार की दिव्य शक्तियां प्रकट हो जाती है। सिद्ध चक्र मंडल विधान सभी सिद्ध समूह की आराधना मंडल की साक्षी में की जाती है, जो हमारे सभी मनोरथों को पूरा करता है। मैना सुंदरी ने अपने कोड़ी पति को कामदेव जैसा सुंदर बना दिया। पुराणों के अनुसार मैना सुंदरी ने इसी सिद्धचक्र महामंडल विधान के आयोजन से अपने कोड़ी पति श्रीपाल को कामदेव जैसा सुंदर बना दिया था।

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