पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

घुवारा में राशन वितरण में धांधली:पर्ची धारी उपभोक्ताओं को केवल दो माह का मिला खाद्यान्न, चावल भी नहीं दिया

छतरपुरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
घुवारा| खाद्यान्न में कटौती होने से परेशान महिला उपभोक्ता। - Dainik Bhaskar
घुवारा| खाद्यान्न में कटौती होने से परेशान महिला उपभोक्ता।
  • ग्रामीण और नगरीय क्षेत्र में 49 हजार 31 कार्डधारी पंजीकृत हैं

क्षेत्र की सहकारी समितियों से जुड़ी शासकीय उचित मूल्य दुकानों पर वितरण प्रणाली में जमकर धांधली की जा रही है। दुकान संचालक कोरोना काल में राशन पर्ची धारकों के खाद्यान्न में कटौती कर गोलमाल कर रहे हैं। बडामलहरा विधानसभा क्षेत्र में 19 सेवा सहकारी समितियां पंजीकृत हैं। समितियों के अंतर्गत बडामलहरा, घुवारा व बकस्वाहा तहसील क्षेत्र में 119 शासकीय उचित मूल्य की दुकानें हैं। बडामलहरा, घुवारा व बकस्वाहा नगरीय इलाके में 7 उपभोक्ता भंडारों के माध्यम से ग्रामीण व नगरीय क्षेत्र में 49 हजार 31 कार्डधारी पंजीकृत हैं।

योजना अनुसार इन्हें प्रत्येक परिवार के सदस्य को एक रुपए प्रति किग्रा की दर से 3 किग्रा गेंहू, 1 किग्रा चावल, 1 किग्रा बाजरा व 1 किग्रा नमक मिलना चाहिए। लेकिन गरीबों की खुराक में कटौती को लेकर समितियों की कार्यशैली अक्सर चर्चा में रहती है। शासकीय उचित मूल्य दुकान संचालक की साजिश के तहत उपभोक्ताओं के राशन में कटौती कर अपना पेट भरने में लगे हैं। उचित मूल्य दुकान संचालकों ने उपभोक्ताओं को माह अप्रैल व मई का राशन गेंहू, बाजरा व नमक वितरण किया है।

शनिवार को और रविवार को भी दुकान बंद रहेगी: कोरोना संक्रमण के समय सरकार ने राशन पर्ची धारकों को अप्रैल, मई व जून में नि:शुल्क खाद्य सामग्री प्रदान करने का आदेश जारी किया है। अप्रैल, मई व जून माह में उपभोक्ताओं को दोगुना राशन वितरण इन दिनों चर्चा में है। बताया जाता है कि, उपभोक्ताओं को 3 माह का राशन निशुल्क वितरण किया जाएगा। हालांकि विधानसभा क्षेत्र में निशुल्क राशन वितरण की प्रक्रिया अभी शुरु नहीं हुई है। लापरवाही के चलते शुक्रवार को उचित मूल्य दुकान खोली ही नहीं गई, पता चला कि शनिवार को और रविवार को भी दुकान बंद रहेगी।

ऐसे में उपभोक्ताओं का परेशान होना लाजिमी है। उपभोक्ताओं ने बताया कि शासकीय उचित मूल्य दुकान संचालकों ने भुगतान लेकर अप्रैल व मई का राशन एक साथ वितरण किया है। जबकि चावल हजम कर लिए हैं उन्हें संदेह है कि कहीं वह सरकार द्वारा मिलने वाला राशन और न डकार जाएं। कई उपभोक्ताओं को पिछले वर्ष कोरोना संक्रमण समय में आधा अधूरा निशुल्क राशन वितरण कर धोखा दिया गया था।

गरीबों का आखिर 2 माह का चावल कहां गया
उपभोक्ताओं को इन दोनों माह का चावल वितरण नहीं किया। माना जा रहा है कि, कोरोना काल के प्रथम चरण की तरह इस बार पुन: समितियों द्वारा राशन का व्यापक घोटाला किया जा रहा है। प्रशासन के लिए यह जांच का विषय है कि, आखिर 2 माह का चावल कहां गया। उपभोक्ताओं का कहना है कि आपदा के समय अधिकारियों को न्यायिक जांच कराकर चावल वितरण कराना चाहिए।

ये हैं इनके जिम्मेदार

खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारी

क्यों : उचित मूल्य दुकानदार इस आपदा की घड़ी में गरीब उपभोक्ताओं के पेट में लात मार रहे हैं। इसकी जानकारी संबंधित खाद्य विभाग एवं अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को है। लेकिन इसके बावजूद दोषियों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। कुल मिला कर आपदा की घड़ी में परेशान गरीबों को छला जा रहा है।

20 अप्रैल को मुफ्त राशन वितरण का आदेश प्राप्त हुआ है। मई, जून एवं जुलाई माह का राशन उपभोक्ताओं को निशुल्क वितरित किया जाएगा। दुकान संचालकों ने अगर उपभोक्ताओं से राशन का पैसा लिया है तो अगले उसका समायोजन किया जाएगा। चावल का स्टाक न होने से वितरण नहीं किया गया। आगामी माह में कार्डधारियों को शेष चावल प्रदान किया जाएगा।
राकेश कन्हौआ, सहायक खाद्य आपूर्ति अधिकारी।

खबरें और भी हैं...