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अंतिम संस्कार:केन नदी के पठाई केंप में नर बाघ पी-123 का क्षतविक्षत शव मिला

पन्नाएक महीने पहले
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  • पीटीआर के सकरा क्षेत्र में बाघिन टी-6 और नर बाघ पी-431 की मैंटिंग में पहुंच गया था बाघ पी-123

पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बाघों की लगातार मौतें हो रहीं हैं। बीते रोज नर बाघ पी-123 का क्षतबिक्षत शव हिनौता परिक्षेत्र के पठाई कैंप के पास कैन नदी में उतराता हुआ मिला है। विभाग ने पीएम कराने के बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया है।
रविवार शाम केन नदी पर बाघ का क्षतबिक्षत शव मिला था। खबर मिलते ही पीटीआर में खलबली मच गई। शव को बाहर निकाल कर रखा गया। पीटीआर के क्षेत्र संचालक केएस भदौरिया ने बताया कि नर बाघ पी- 123 एवं नर बाघ पी-431 के बीच सकरा क्षेत्र में काफी संघर्ष हुआ। संघर्ष में घायल होने के बाद बाघ पी-123 की मौत हो गई। इसके बाद पानी में सकरा से बह कर करीब 8 किमी. दूर हिनौता परिक्षेत्र के पठाई कैंप के पास केन नदी में उतराता हुआ आया। उन्होने बताया कि पानी में रहने के कारण बाघ का शव फूल चुका था। पानी के अंदर मगरमच्छों ने उसका शरीर क्षतबिक्षत कर दिया था, उसका सिर धड़ से गायब था। सोमवार को सुबह मौके पर जाकर डा संजीव कुमार गुप्ता ने बाघ के शव का पीएम किया। पोस्टमार्टम के दौरान ही नर बाघ पी-123 के रूप में मृतक की पहचान की गई है। पोस्टमार्टम उपरांत मृत बाघ का अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
सूचना प्राप्त होते ही क्षेत्र संचालक, उप संचालक, सहायक संचालक, परिक्षेत्र अधिकारी एवं वन्यप्राणी चिकित्सक मौके पर पहुंचे। मौके पर बाघ पी-431 एवं बाघिन टी-6 पाए गए लेकिन तीसरे बाघ का पता नहीं चला। तीसरे बाघ के न दिखने पर घटना स्थल के आस-पास के जंगलों में सचिंग की गई। लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला।
डेढ़ माह में तीन बाघों की हुई मौत
पन्ना टाईगर रिजर्व में बाघों की मौंत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। डेढ़ माह के अंदर 3 बाघों की मौत हुई है। जबकि 7 माह के अंदर 5 बाघों की मौत हो चुकी है।

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