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नियमों को ठेंगा:जहां की लीज, वहां पत्थर हुआ खत्म, फिर भी धड़ल्ले से संचालित हो रहे क्रेशर

छतरपुर25 दिन पहले
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बकस्वाहा|क्रेशर संचालकों द्वारा की जा रही धांधली। उड़ते धूल का गुबार पर्यावरण नियंत्रण के नियमों को ठेंगा दिखा रहा है। - Dainik Bhaskar
बकस्वाहा|क्रेशर संचालकों द्वारा की जा रही धांधली। उड़ते धूल का गुबार पर्यावरण नियंत्रण के नियमों को ठेंगा दिखा रहा है।
  • 2-3 क्रेशर ऐसे हैं इनकी लीज जितनी जगह की है, उसमें पत्थर समाप्त हो गया

ब्लॉक के जुझारपुरा में चल रहे 2-3 क्रेशरों की लीज वाली जगह से पत्थर खत्म हो गए हैं। लेकिन क्रेशर बदस्तूर संचालित हो रहे हैं, क्रेशर में पत्थर आ रहे हैं, बाकायदा गिट्‌टी तैयार होकर बेची जा रही है। क्रेशर में खुद के पत्थर खत्म होने के बाद इधर उधर से चोरी से पत्थर खपाए जा रहे हैं। बकस्वाहा ब्लॉक में करीब 12 क्रेशर इस समय संचालित हैं। इनमें सबसे अधिक क्रेशर बकस्वाहा- दमोह मार्ग पर स्थित ग्राम जुझारपुर के पास संचालित हो रहे हैं। यहां 2-3 क्रेसर ऐसे हैं, इनकी लीज जितनी जगह की है, उसमे पत्थर बिल्कुल समाप्त हो गया है।

लेकिन फिर भी पत्थरों का अवैध उत्खनन कर दिन रात क्रेशर चल रहे हैं। यह क्रेसर संचालक जहां अवैध उत्खनन कर रहे हैं, वहीं शासन को लाखों के राजस्व की क्षति पहुंचा रहे हैं।इन क्रेशर से उड़ने वाली धूल से न केवल ग्राम वासी परेशान हैं।

बल्कि छतरपुर जबलपुर मार्ग से निकलने वाले राहगीर के साथ साथ काॅलेज मे पढाई करने वाले छात्र - छात्राएं भी परेशान हैं। क्रेशरों की शिकायत ग्रामीणों व छात्र - छात्राओं द्वारा कई बार प्रदूषण विभाग, खनिज विभाग, राजस्व विभाग से की गई। लेकिन कोई सुधार नहीं किया गया।

स्टोन क्रेशर के चारो तरफ ऊंची बाउंड्री बॉल का निर्माण करना

चौबीस घंटे धूल और डस्ट से उडने की वजह से दमोह रोड के आसपास के गॉव जुझारपुरा, गढीसेमरा, कुई, किशनपुरा में लोगो को असमय स्वांस, दमा जैसी बीमारिंयों का भय बना रहता है। डॉक्टरों के अनुसार क्रेशर से उठने वाली धूल सीधे मनुष्य के फेफडों पर असर करती है जिससे स्वॉस दमा एवं अस्थमा जैसे रोगो को बढावा देती है।

जिस क्षेत्र में क्रेशर ज्यादा है वहां के गांव मे ये केस ज्यादा आते हैं। इनके आसपास लगी कृषि भूमि और फसल को भी भारी नुकसान झेलना पड़ता है जिसका सीधा असर किसानों की आर्थिक हालात पर पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार स्टोन क्रेशर उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए कुछ जरूरी व्यवस्थाएं करनी होती हैं।

जैसे स्टोन क्रेसर के चारो तरफ ऊंची बाउंड्री बॉल का निर्माण करना और बाउंड्री बॉल के पास सधन वृक्षारोपण करना,परिवहन मार्गो पर पानी छिड़काव कराना, क्रेसिंग मशीन एवं स्क्रीन को पूर्ण रूप से एम एस सीट से कवर करना, क्रेशर मशीन के पास जल छिड़काव की व्यवस्था करना एवं डस्ट कन्वेयर में भी पानी के छिड़काव की व्यवस्था करना जरूरी है।

पर इन संचालित स्टोन क्रेसरों पर ये सारी व्यवस्थाएं देखने को नहीं मिलती फलस्वरूप सारा दिन उड़ता धूल का गुबार पर्यावरण नियंत्रण के नियमों को ठेंगा दिखा रहा है धूल हाईवे 37 पर बहुत ज्यादा फैली: कुछ दिनों पहले तत्कालीन एसडीएम राहुल सिलाड़िया ने भी क्रेशरों का मुआयना कर उन्हे हिदायत दी थी।

अभी बकस्वाहा से दमोह मार्ग पर जाने वाले राहगीरों ने बताया कि क्रेशरों से निकलने वाली धूल स्टेस्ट हाईवे 37 पर इतनी ज्यादा फैली हुई होती है कि राहगीरों को सामने आने वाली गाड़ियां भी दिखाई नहीं देतीं। ऐसे में रोज सड़क हादसे होते रहते हैं विभाग से शिकायत की गई कि प्रदूषण रोधी कवर लगाया जाएं।

पर आज तक न प्रदूषण विभाग में खनिज विभाग ने इस ओर कोई ध्यान दिया। छतरपुर से जबलपुर को जोड़ने वाला स्टेट हाइवे व्यस्ततम मार्गो में से एक है। जहां रोजाना हजारों की तादाद में वाहनों का आना जाना है। वहीं स्टेट हाइवे से महज 200 मीटर की दूरी पर संचालित स्टोन क्रेशरों से निकलने वाले धूल के गुबार से राहगीरों को खांसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
शिकायत के बाद नहीं होती कार्रवाई
जुझारपुर में संचालित स्कूल में बच्चे जाते हैं और धूल वहां तक उड़ कर जाती है। आए दिन होने वाली ब्लास्टिंग से बच्चे सहम जाते हैं। ग्रामीणों से जब बात की गई। उन्होंने कहा कि शिकायतों के बाद अधिकारी केवल सेटिंग बनाने तक ही सीमित हैं। जिस कारण क्रेशरों संचालकों द्वारा की जा रही अनियमितताएं नजर नहीं आतीं।
राजनैतिक संरक्षण के चलते हैं आरोप
सूत्रों पर भरोसा करें तो इन क्रेशर संचालकों को राजनैतिक संरक्षण प्राप्त है। इसलिए उनको किसी अधिकारी का कोई डर नही है। जिसके चलते क्रेशर संचालक लगातार अनियमितता करते हैं ओर अधिकारी कार्रवाई करने से बचते नजर आते है। उन सब के बीच मे बुरा हाल आम लोगों का ग्रामीणों का है।

खनिज विभाग के अधिकारी

क्यों : क्रेसर संचालकों द्वारा जमकर मनमानी और धांधली की जा रही है। लेकिन शिकायतों के बावजूद प्रशासन और खनिज विभाग के अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती। इन क्रेशरों के पास जाकर कभी निरीक्षण नहीं किया जाता। जिससे संचालक मनमानी कर रहे हैं।
क्रेशरों की लीज में पर्याप्त पत्थर है, लेकिन अगर कहीं पत्थर खत्म हो गए हैं। क्रेशर संचालक धांधली कर रहे हैं तो मैं इसे दिखवाता हूूं। जरूर कार्रवाई होगी।-अमित मिश्रा, जिला खनिज अधिकारी छतरपुर।

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