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अनदेखी:एग्रीकल्चर स्कूलः कैफेटेरिया की जमीन हुई बंजर, अधिकारियों ने बनवा दिए दो हॉस्टल

दमोह7 दिन पहले
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  • नहीं बची खेती के लिए जगह, परिसर में दो हॉस्टल बनने से जगह हो गई खुर्द-बुर्द
  • केंद्र सरकार के चलो खेत की ओर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शामिल किया गया था स्कूल

केंद्र सरकार ने भले ही चलो खेत की ओर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में दमोह के एग्रीकल्चर स्कूल को शामिल किया है, लेकिन हकीकत में जमीनी स्तर पर जो इस स्कूल का हाल है, वह कुछ और ही बयां करता है। एक्सीलेंस स्कूल के पीछे संचालित शासकीय एग्रीकल्चर स्कूल का कैफेटेरिया अब शासकीय अतिक्रमण का शिकार हो गया है और छात्रों के लिए आवंटित करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन बंजर हो गई है।

प्रयोग के नाम पर यहां न तो कोई खेती की जा रही है और न ही कोई वनस्पति लगाई गई है। हैरानी की बात यह है कि अधिकारियों ने कैफेटेरिया की जमीन पर दो हास्टल बनाने की अनुमति दे दी। पिछले दो साल से परिसर में हाॅस्टल का काम चल रहा है। ऐसे में पायलट प्रोजेक्ट कागजों में दब कर रह गया है।

दरअसल इस स्कूल में 11 वीं से 12 तक एग्रीकल्चर विषय से पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को पशु व मुर्गी पालन, फसल उत्पादन और कृषि उपयोगी विज्ञान और गणित मूल तत्व विषय की पढ़ाई कराई जाती है। इन छात्र-छात्राओं को प्रयोग करने के लिए कैफेटेरिया पहले से तय किया गया था।

एग्रीकल्चर विषय से हायर सेकेंडरी की पढ़ाई कराने वाले विद्यालयों को खेतिहर साढ़े तीन एकड़ जमीन आवंटित थी। उसका उपयोग केवल विद्यार्थियों के हित में स्पेशल स्टडी और प्रायोगिक खेती के लिए किया जाना था। इस जमीन पर कोई निर्माण नहीं किया जाए।

एक्सीलेंस स्कूल के प्राचार्य केके पांडे का कहना है कि स्कूल में अलग से कोई बजट इस काम के लिए नहीं आया। छात्र स्वयं ही परिश्रम करके फसलें उगाते थे और प्रयोग करते थे। लेकिन अब पूरी जमीन बंजर हो गई है। वहां पर हाॅस्टल बनने से वाहनों का आवागमन हो रहा है, गेट हटा दिया गया है। जिससे मवेशी अंदर प्रवेश कर जाते हैं।

जिससे काफी नुकसान हो गया है। फिलहाल ऑन लाइन पढ़ाई चल रही है। प्रयोग अभी नहीं कराए जा रहे हैं। तीन माह में निर्माण एजेंसी काम खत्म कर लें। उसके बाद फिर से सुधार कार्य किया जाएगा। इधर हाॅस्टल बनने से अब स्कूल को आवंटित जमीन का उपयोग प्रायोगिक खेती व अध्ययन के लिए छात्र-छात्राएं आगे नहीं कर पाएंगे।

पहले जारी किया गया था आदेश, फिर भी दरकिनार कर दिया

लोक शिक्षण विभाग के तत्कालीन आयुक्त जयश्री कियावत ने पहले आदेश जारी किए थे। जिसमें राज्य शासन ने मप्र के 15 कृषि स्कूलों को केंद्र सरकार के चलो खेत की ओर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शामिल किया गया था। इनमें सागर के अलावा इंदौर, होशंगाबाद, भोपाल, उज्जैन, बुरहानपुर, रायसेन, दमोह, नरसिंहपुर के स्कूल शामिल थे।

इन सभी स्कूलों को पायलट प्रोजेक्ट के तहत 10-10 लाख रुपए की राशि भी आवंटित की गई थी। जिसका उपयोग इस विषय के सुदृढ़ीकरण में करना था। लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसा कुछ भी नहीं हो पाया। दो साल में कृषि भूमि पर कोई प्रयोग नहीं हुआ। उल्टा अधिकारियों ने कृषि संकाय की जमीन हाॅस्टल बनाने में उपयोग कर ली। जबकि तीन संकायों के छात्रों के लिए यहां पर कोई काम नहीं किया गया। पूरी की पूरी जमीन पड़त और बंजर हो गई।

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