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राठी का तबादला:पहले कोरोना फिर जलसंकट से निपटेंगे : एस कृष्ण

दमोहएक महीने पहले
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  • 2013 बैच के आईएएस अधिकारी हैं एसकृष्ण चैतन्य, कलेक्टर के रूप में दमोह पहली पोस्टिंग

विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिली करारी हार के बाद शासन ने कलेक्टर तरुण राठी का स्थानांतरण करके उप सचिव भोपाल बना दिया है। उनकी जगह नगर पालिका निगम इंदौर में अपर आयुक्त पद पर पदस्थ वर्ष 2013 बैच के आईएएस अधिकारी एसकृष्ण चैतन्य को दमोह का कलेक्टर बनाया है। चैतन्य पहली बार कलेक्टर बने हैं। उनकी पहली ज्वाइनिंग रीवा के मऊगंज में एसडीएम के रूप में हुई थी। इसके बाद से शहडोल में जिला पंचायत सीईओ और उसके बाद अपर आयुक्त नगर निगम इंदौर बने थे। चैतन्य मूलरूप से हैदराबाद के रहने वाले हैं।

उन्होंने भास्कर से चर्चा में बताया कि वे शनिवार को दमोह पहुंचकर ज्वाइन करेंगे। उनकी पहली प्राथमिकता कोरोना संक्रमण से जिले को बचाना है। इसको लेकर वे पूरी प्लानिंग के साथ काम करेंगे और जो परिस्थितियां सामने होगीं, उनसे निपटेंगे। उन्होंने बताया कि इंदौर और दमोह में बहुत अंतर है। इंदौर में कोरोना के केस हैं, लेकिन जिस तरह के संसाधन हैं, उनसे काफी कुछ कंट्रोल किया जा रहा है। कर्फ्यू के चलते जल्द चीजें सामान्य होगीं। लेकिन ग्रामीण अंचलों में अभी काम करने की जरूरत है। उन्हाेंने बताया कि पहले कोरोना से निपटेंगे, उसके बाद बुंदेलखंड में जलसंकट से निपटने का काम करेंगे। फिलहाल शासन का पूरा ध्यान कोविड पर है और उसे ठीक करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। संभवत: चैतन्य शनिवार को देर शाम ज्वाइन करेंगे।

कोविड बड़ा टास्क था : राठी
दमोह कलेक्टर तरुण राठी ने जून 2019 में ज्वाइन किया था। करीब दो साल तक कलेक्टर रहे राठी ने बताया कि वर्तमान में सबसे बड़ा टास्क कोविड है। इसके लिए रात-दिन काम करना पड़ा। जिस हिसाब से मरीजों की संख्या बढ़ी, संसाधन जुटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। यहां तक कि दमोह से मरीजों को जबलपुर और सागर रेफर करना पड़ा। यहां पर सुविधाएं भी कुछ हद तक कम हैं। लेकिन जिस तरह से स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मिलकर काम किया, उस हिसाब से चीजें सुधरी हैं। उन्होंने बताया कि दमोह का कार्यकाल अच्छा रहा। यहां के लोग हर कठिन और मुश्किल घड़ी में सहयोग करते हैं। एकजुटता का परिचय देते हैं।

दमोह कलेक्टर को हटाने के तीन कारण?

  • विधानसभा चुनाव में मिली हार
  • कोरोना की बिगड़ती स्थिति
  • जनप्रतिनिधियों से सामंजस्य न बन पाना

नए कलेक्टर के सामने ये तीन चुनौतियां?

  • कोरोना की दूसरी लहर से निपटना, तीसरी की तैयारी करना
  • केंद्रीय मंत्री, बसपा विधायक, कांग्रेस विधायक और बीजेपी के विधायकों के बीच सामंजस्य बनाना
  • शहर की स्वच्छता रैकिंग को सुधारना
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