पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

नया प्रयोग:दमोह में पहली बार एक साथ 20 किसानों ने बोया काला गेहूं, पथरिया और दमोह में प्रयोग

दमोह2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • कैंसर और डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद होता है ये गेहूं

जिले में इस बार किसानों ने काला गेहूं की बोवनी को लेकर नया प्रयोग किया है। तकरीबन 20 किसानों ने इस प्रजाति के गेहूं की बोवनी की है। नरसिंहगढ़, खिरिया मड़ला सहित आसपास के किसानों ने अपने खेत में बोवनी भी कर दी है। यदि सबकुछ ठीक ठाक रहा तो आने वाले समय में यहां के किसान काले गेहूं की पैदावार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। फिलहाल इन किसानों ने 5-5 एकड़ के रकबे में काला गेहूं बो दिया है।

रोचक बात यह है कि दमोह में पहली बार काले गेहूं की खेती होने जा रही है। इससे पहले भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने इसे स्वीकृत किया और नेशनल एग्री फूड बायोटेक्नॉलॉजी इंस्टीट्यूट ने इसे नाबी एमजी नाम दिया। काले गेहूं में फाइबर कंटेट होने के कारण इसे कैंसर और डाइबिटीज रोगियों के लिए गुणकारी माना गया है। दमोह और पथरिया के किसानों ने काले गेहूं की पहली फसल ली है।

नरसिंहगढ़ के पास रहने वाले युवा किसान मनोज पटेल ने बताया कि अपने गांव में पांच एकड़ में काले गेहूं की बुआई की। सामान्य गेहूं की बाेवनी पहले की जा रही थी, मगर इस बार ऐसा किया है। उन्होंने बताया कि 120 दिनों में गेहूं की फसल मिलने की संभावना है।

उन्होंने खुद अपने खेत में काले गेहूं की बोवनी करने के साथ-साथ 20 किसानों को भी बीज उपलब्ध कराया है। खिरिया मड़ला के वीरेंद्र पटेल ने बताया कि उन्होंने पांच एकड़ में काले गेहूं की बोवनी की है। हालांकि अभी पैदावार के संबंध में कुछ कहा नहीं जा सकता है, क्योंकि अभी हाल ही में बोवनी हुई है, पैदावार के बाद स्थिति का पता चलेगा।

इसलिए इस गेहूं का रंग होता है काला

पटेल ने बताया कि सात बरसों के रिसर्च के बाद पंजाब के मोहाली स्थित नेशनल एग्री फूड बायोटेक्नॉलॉजी इंस्टीट्यूट ने विकसित किया है। इस गेहूं की खास बात यह है कि इसका रंग काला है। काले गेहूं में कैंसर, डायबिटीज, तनाव, दिल की बीमारी और मोटापे जैसी बीमारियों की रोकथाम करने की क्षमता है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि फलों, सब्जियों और अनाज के रंग उनमें मौजूद प्लांट पिगमेंट या रंजक कणों की मात्रा पर निर्भर होते हैं। काले गेहूं में एंथोसाएनिन नाम के पिगमेंट होते हैं।

एंथोसाएनिन की अधिकता से फलों, सब्जियों, अनाजों का रंग नीला, बैंगनी या काला हो जाता है। एंथोसाएनिन नेचुरल एंटीऑक्सीडेंट भी है। इसी वजह से यह सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। आम गेहूं में एंथोसाएनिन महज 5 पीपीएम होता है, लेकिन काले गेहूं में यह 100 से 200 पीपीएम के आसपास होता है। एंथोसाएनिन के अलावा काले गेहूं में जिंक और आयरन की मात्रा में भी अंतर होता है। काले गेहूं में आम गेहूं की तुलना में 60 फीसदी आयरन ज्यादा होता है।

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- आज कोई लाभदायक यात्रा संपन्न हो सकती है। अत्यधिक व्यस्तता के कारण घर पर तो समय व्यतीत नहीं कर पाएंगे, परंतु अपने बहुत से महत्वपूर्ण काम निपटाने में सफल होंगे। कोई भूमि संबंधी लाभ भी होने के य...

और पढ़ें

Open Dainik Bhaskar in...
  • Dainik Bhaskar App
  • BrowserBrowser