अकुशल मजदूर को कुशल श्रेणी में नियुक्त किया:हादसा हुआ तो हितलाभ देने से मुकरी कंपनी, श्रम विभाग पहुंचा मामला

दमोहएक महीने पहले
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हादसे के बाद तीन साल से पलंग पर है काेमल विश्वकर्मा। - Dainik Bhaskar
हादसे के बाद तीन साल से पलंग पर है काेमल विश्वकर्मा।
  • तीन साल पहले हादसे का शिकार हुआ था टेक्नीशियन हेल्पर, कमर खराब होने से नहीं कर पा रहा काम, परिवार आर्थिक तंगी से जूझने को मजबूर

नॉन टेक्नीकल होने के बाद भी पहले एक मजदूर को टेक्नीशियन हेल्पर के पद पर पदस्थ किया। काम के दौरान करंट लगने पर कंपनी ने इलाज के साथ-साथ परिवार का भरण पोषण करने का आश्वासन दिया। लेकिन जैसे ही कुछ समय गुजरा कंपनी के अधिकारी अपनी जुबान से मुकर गए। कंपनी से इलाज और मदद नहीं मिलने पर पीड़ित ने जिला श्रम विभाग की न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत कर दिया।

कंपनी की लापरवाही से तीन से खाट पर लेटे इस पीड़ित को अब लेवर कोर्ट से उम्मीद है। दरअसल यह मामला जिला मुख्यालय से 45 किमी दूर हटा-मड़ियादो मार्ग पर हिम्मतपटी गांव के पास स्थित सुनार नदी के सकसुमा बिजली प्लांट का है। जहां पर हटा का नवोदय वार्ड निवासी कोमल विश्वकर्मा 28 टेक्नीशियन हेल्पर के पद पर काम कर रहा था। इसके बाद बदलने में कंपनी की ओर से उसे 6500 रुपए वेतन और पीएफ राशि दी जा रही थी। जून 2019 में प्लांट में काम करते समय अचानक लाइट चालू होने से कोमल को करंट लग गया। गंभीर हालात में उसे हटा से जिला अस्पताल भेजा गया। लेकिन गंभीर रूप से घायल होने की वजह से कोमल के शरीर में किसी तरह का सुधार नहीं हुआ। जिस पर कंपनी ने कोमल को आश्वासन दिया कि यदि वह पुलिस में शिकायत नहीं करता है तो उसे मदद के साथ-साथ वेतन की राशि भी दी जाएगी। कुछ दिन तक तो सब ठीक-ठाक चला। बाद में कंपनी के अधिकारी मदद करने से पीछे हट गए।

श्रम विभाग के अधिकारी बोले- पीड़ित परिवार को श्रम कोर्ट में प्रकरण पेश करने की सलाह दी है
जबकि करंट का असर अधिक होने की वजह से कोमल की कमर ने काम करना बंद कर दिया। पिछले तीन साल से कोमल पलंग पर पड़ा है। उसकी पत्नी सोमवती, और बेटे के सामने आर्थिक संकट है। कोमल ने बताया कि जब वह हादसे का शिकार हुआ था तो कंपनी ने काफी मदद की लेकिन 2 से तीन महीने गुजरने के बाद अधिकारियों ने संपर्क करना बंद कर दिया। यहां तक कि पीएफ की राशि भी कटना बंद हो गई। कंपनी ने पहले उन्हें लेबर के रूप में रखा, फिर हेल्पर के रूप में ज्वाइनिंग करा दी। लेकिन जब करंट लगा तो अधिकारियों ने संपर्क पूरी तरह से बंद कर दिय। अधिकारियों ने मदद नहीं की तो उसने जिला मुख्यालय पर स्थित श्रम विभाग की न्यायालय में मामला प्रस्तुत किया है। इस संबंध में जिला श्रम अधिकारी जीडी गुप्ता का कहना है कि मामला गंभीर है। इसलिए यहां पर नहीं निपटेगा। पीड़ित को मामला श्रम कोर्ट में प्रस्तुत करने के लिए कहा है।

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