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तीसरी लहर से बच्चों को डराना नहीं, बचाना है:जिले में साढ़े 3 लाख से अधिक बच्चे, जिला अस्पताल में केवल एक वेंटिलेटर

दमोह18 दिन पहले
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  • बच्चों के लिए जिला अस्पताल में 50 बेड का सिर्फ 1 वार्ड

कोरोना की तीसरी लहर की आशंका तेजी से बढ़ रही है। इसमें बच्चों में संक्रमण का ज्यादा खतरा बताया जा रहा है। जिला सांख्यिकी विभाग के अनुसार जिले में एक माह से 6 साल आयुवर्ग के बच्चों की आबादी 1 लाख 70 हजार 668 है। वहीं 6 से 15 साल आयुवर्ग के बच्चों की संख्या 2 लाख के आसपास है।

लेकिन तीसरी लहर से बचाने के लिए मौजूदा हालात में स्वास्थ्य विभाग के पास संसाधन नाकाफी हैं। बच्चों की हालत नाजुक होने पर जिला अस्पताल में अभी केवल एक ही वेंटिलेटर उपलब्ध है। इसके अलावा 2 सीपेप मशीनेें, 2 बाइपेप मशीनें हैं।

यहां तक कि जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भी पलंग के हिसाब से मशीनों की भारी कमी है। इसके अलावा छोटे बच्चों के हिसाब से न तो ऑक्सीमीटर हैं और न ही हाइ मास्क उपलब्ध हैं। मल्टी पैरामॉनीटर, ब्रीथिंग मास्क सहित अन्य जरूरी दवाओं की भी कमी है।

जमीनी हकीकत : जिला अस्पताल में 6 डॉक्टर, 7 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एक भी डॉक्टर नहीं
जिला अस्पताल में बच्चों के लिए 6 डॉक्टर पदस्थ हैं। जिनमें डॉ. राजेश नामदेव, डॉ. जलज बजाज, डॉ. सुनील जैन, डॉ. अनिकेत श्रीवास्तव, डॉ. सोनू व डॉ. रोहित शामिल हैं। लेकिन ब्लॉक स्तर पर संचालित सिविल अस्पताल हटा, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जबेरा, तेंदूखेड़ा, पथरिया, पटेरा, बटियागढ़ एवं हिंडोरिया में भी बच्चों के डॉक्टर नहीं हैं। जबकि ग्रामीण अंचलों की अधिकांश आबादी ब्लॉक स्तर पर ही इलाज कराने आती है।

जिला अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश नामदेव के अनुसार ऐसे करें बच्चों की सुरक्षा

  • बच्चों में कोरोना के लक्षण बड़ों के समान हैं। इसमें मामूली अंतर है। तेज बुखार आना, उल्टी-दस्त, शरीर में दाने पड़ना या रेशे बन जाना, 8 से 10 साल के बच्चों में स्मेल और टेस्ट नहीं आने के भी लक्षण हो सकते हैं।
  • सोशल डिस्टेंसिंग, भीड़-भाड़ में बच्चों को न ले जाएं।
  • स्वयं एवं बच्चों के हाथ बार-बार साबुन से 20 सेकंड तक धाेएं।
  • बाहर से आते समय सबसे पहले स्नान करें। इसके बाद ही बच्चों के पास जाएं।
  • जिन्हें संक्रमण का ज्यादा खतरा है, वह बच्चों से दूर रहें।
  • माता-पिता बच्चों के साथ समय बिताएं और उन्हें पेंटिंग, डांस, संगीत एवं इंडियन गेम्स जैसे केरम, चेस खिलाएं।
  • बच्चों को पानी ज्यादा पिलाएं, फल, संतरे, नींबू, अंगूर, चना खिलाएं।
  • यदि बच्चे को सर्दी, खांसी, बुखार जैसे लक्षण हैं तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
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