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गहनों की सुरक्षा में 24 घंटे तैनात रहते हैं पुलिसकर्मी:12 तोला सोना और 10 किलो चांदी से होता है माता का श्रृंगार, सालभर बैंक के लॉकर में रखे जाते हैं आभूषण

दमोह8 दिन पहले
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माता के दरबार के बहार तैनात पुलिस जवान - Dainik Bhaskar
माता के दरबार के बहार तैनात पुलिस जवान

दमोह में नवरात्रि के दौरान महाकाली के पंडाल की सुरक्षा के लिए सशस्त्र पुलिस बल तैनात की जाती है। यहां महाकाली चौराहे पर हर साल नवरात्रि के समय मां महाकाली की प्रतिमा स्थापित होती है। पंडाल में महाकाली की प्रतिमा पर हर साल सोने और चांदी के अनेकों आभूषण चढ़ाए जाते हैं। जेवरातों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शस्त्रधारी पुलिस बल तैनात किए जाते हैं। जो शिफ्ट अनुसार 24 घंटे ड्यूटी करते हैं।

75 साल की परंपरा, 21 साल से तैनात हो रहे पुलिसकर्मी
महाकाली की प्रतिमा को गहने चढ़ाने का रिवाज आज से नहीं, बल्कि पिछले 75 सालों से चला आ रहा है। प्रतिमा के विसर्जन से पहले यह गहने उतार कर सुरक्षित रखे जाते हैं। जिसके बाद ही पुलिस की ड्यूटी खत्म होती है। महाकाली चौराहे के निवासी निर्गुण खरे (68) बताते हैं कि देश की आजादी के बाद 1947 में पहली बार यहां महाकाली की प्रतिमा स्थापित की गई थी। जिसे लक्ष्मीचंद असाटी, मूलचंद ताम्रकार और श्याम नारायण टंडन ने मिलकर रखा था। इस प्रतिमा की स्थापना सराफा व्यापारी मिलकर करते थे और उन्होंने ही प्रतिमा पर जेवरात चढ़ाने के रिवाज की शुरुआत की थी। पहले चांदी और कुछ सोना मां को चढ़ाया जाता था, लेकिन अब माता का पूरा श्रंगार ही सोने और चांदी के जेवरात से किया जाता है।

महाकाली का 12 तोला सोना और 10 किलो चांदी से होता है श्रृंगार
महाकाली का 12 तोला सोना और 10 किलो चांदी से होता है श्रृंगार

12 तोला सोना और 10 किलो चांदी से होता है श्रृंगार

50 साल तक सराफा व्यापारियों ने इस प्रतिमा की स्थापना की, बाद में उन्होंने बकोली चौराहे के पास अपनी अलग प्रतिमा की स्थापना करना शुरू कर दिया। जिसके बाद एक नई समिति किया गया, जिसका नाम सार्वजनिक महाकाली सेवा समिति रखा गया। 55 वर्षीय ज्ञानेश ताम्रकार ने बताया कि समिति के पास करीब 12 तोला सोना और 10 किलो चांदी है। सभी आभूषणों को बैंक के लॉकर में सुरक्षित रखा जाता है। जिस दिन प्रतिमा की स्थापना होती है, उससे एक दिन पहले ही लॉकर से गहनों को निकाला जाता है। पहले यहां पुलिस तैनात नहीं की जाती थी क्योंकि पहले समय इतना खराब नहीं था। धीरे-धीरे जब समय में बदलाव हुआ और चोरियां भी बढ़ने लगी। तब समिति के लोगों ने वर्ष 2000 में मिलकर फैसला लिया कि गहनों की सुरक्षा के लिए 24 घंटे पुलिस तैनात रहनी चाहिए और तभी से यहां 24 घंटे चार पुलिस के जवानों की तैनात होने लगी।

प्रतिमा के विसर्जन के बाद समाप्त होती है पुलिसकर्मियों की ड्यूटी
दशहरा के दिन जब महाकाली की प्रतिमा को विसर्जन के लिए फुटेरा तालाब लाते हैं, तभी पुलिस सुरक्षा के बीच आभूषणों को उतारा जाता है। इसके बाद पुलिस की सुरक्षा में ही गहनों को बैंक के लॉकर में सुरक्षित रखा जाता है। जिसके बाद से पुलिस का दायित्व समाप्त होता है।

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