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  • Not A Single Train Stopped At Small Railway Stations For 10 Months, 40 Villagers Are Paying 7 Times More Fare

स्टेशन पर सन्नाटा:छोटे रेलवे स्टेशनों पर 10 माह से नहीं रुकी एक भी ट्रेन, 7 गुना अधिक किराया दे रहे हैं 40 गांव के यात्री

दमोह6 महीने पहले
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दमोह|दमोह के छोटे स्टेशनों पर एक भी ट्रेन नहीं रुक रही है, जिससे यात्री परेशान हैं। - Dainik Bhaskar
दमोह|दमोह के छोटे स्टेशनों पर एक भी ट्रेन नहीं रुक रही है, जिससे यात्री परेशान हैं।
  • लॉकडाउन के बाद दमोह रेलवे स्टेशन से एक्सप्रेस ट्रेनों की संख्या बढी लेकिन पैसेंजर ट्रेनें न चलने से यात्रियों को हो रही परेशानी

लॉकडाउन के बाद दमोह रेलवे स्टेशन से धीरे-धीरे एक्सप्रेस ट्रेनों की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन पैसेंजर ट्रेनों न चलने की वजह से यात्रियों को खासी परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी छोटे रेलवे स्टेशन व उनसे जुड़े आसपास के सैकड़ों गांव के लोगों को हो रही है, जहां पर 25 मार्च के लॉकडाउन के बाद लगातार 10 माह बीतने के बाद भी कोई ट्रेन नहीं रूकी है। ऐसे में छोटे रेलवे स्टेशनों से सफर करने वाले यात्रियों को 6 से 7 गुना अधिक किराया देकर आवागमन करना पड़ रहा है।

असलाना, पथरिया, करैया भदौली, बांदकपुर, घटेरा, गोलापट्‌टी, रतनगांव, सगौनी व सलैया स्टेशन पर बीते 10 माह से सन्नाटा छाया हुआ है। जबकि लॉकडाउन के पहले प्रत्येक स्टेशनों पर आसपास के 40 से 50 गांव के दो हजार से अधिक यात्री नियमित सफर करते थे, लेकिन अब इन गांव के लोगों को बस या निजी वाहनों से कई गुना अधिक खर्च करके आना पड़ रहा है। गौरतलब है कि लॉकडाउन के पहले तक इन स्टेशनों पर भोपाल-बिलासपुर एवं बीना-कटनी पैंसेजर ट्रेन आवागमन का प्रमुख साधन थीं। कम किराया होने की वजह से अप-डाउन करने वाले कर्मचारी, व्यापारी, स्कूल कॉलेज एवं अन्य लोग भी इन्हीं पैसेंजर ट्रेनों से प्रतिदिन आवाजाही करते थे, लेकिन यह ट्रेनों बंद होने से लोग खासे परेशान हैं। हालांकि ट्रेनें बंद होने से रेलवे को भी राजस्व का घाटा हो रहा है।

ट्रेन में 10 रुपए में दमोह आते थे, अब बस में लग रहे 70 रुपए
कुम्हारी पटेरिया निवासी राजेश राय, शैलेंद्र ठाकुर, विजय ठाकुर, प्रिया, रागिनी लोधी ने बताया कि हम लोग पहले सगौनी रेलवे स्टेशन से पैसेंजर ट्रेन में 10 रूपए में दमोह कॉलेज पढ़ने आते थे, लेकिन पैसेंजर ट्रेन बंद होने की वजह से बस में 70 रूपए लगते हैं। इस तरह दमोह से आने-जाने में कुल 140 रूपए खर्च करना पड़ते हैं, इसलिए हम लोग कॉलेज नहीं जा पा रहे हैं। इसी तरह कोई व्यक्ति बीमार हो जाए तो उसे भी अब दमोह तक बस या निजी वाहन से आने में कई काफी पैसे खर्च करना पड़ते हैं, जिसकी वजह से लोग स्थानीय झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराने मजबूर हैं। पैसेंजर बंद होने से दूध बेचने वालों लोगों का धंधा भी चौपट हो गया है। अब उन्हें कम दामों पर गांव में ही दूध की बेचना पड़ रहा है। इसी तरह अपडाउन करने वाले लोग भी परेशान हैं।

राज्यरानी एक्सप्रेस की मांग ठंडे बस्ते में
रेलवे द्वारा दमोह से चलने वाले 39 नियमित व सप्ताहिक ट्रेनों में से 14 ट्रेनों का संचालन तो शुरू कर दिया गया है, लेकिन दमोह से चलने वाली सबसे महत्वपूर्ण राज्यरानी एक्सप्रेस को शुरू करने के लिए अब तक कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जबकि दो बार डीआरएम व एक बार जीएम के आगमन के दौरान स्थानीय लोगों द्वारा इस मांग को उठाया जा चुका है। रेल संघर्ष समिति के प्रांजल चौहान, सुरेंद्र दबे ने बताया कि हम लोग राजरानी एक्सप्रेस को चालू कराने रेल मंत्री को भी पत्र लिख चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ध्यान नहीं दिया गया। जबकि सतना, जबलपुर, इटारसी रूट पर लगातार ट्रेनों की संख्या बढ़ रही है।

ट्रेनों में मिलने वाली छूट अभी भी बंद
रेलवे द्वारा सीनियर सिटीजन, दिव्यांग व कैंसर व अन्य गंभीर बीमारी से पीड़ित यात्रियों के लिए रेलवे किराया में विशेष छूट दी जाती थी, लेकिन वर्तमान में जो एक्सप्रेस ट्रेनें चल रहीं हैं, उसमें किसी भी तरह की छूट यात्रियों को नहीं मिल रहीं हैं।

मार्च के बाद हो सकता है विचार
मार्च माह तक पैंसेजर ट्रेन चालू होने की उम्मीद नहीं हैं। वैक्सीनेशन होने से कोराना संक्रमण कोरोना संक्रमण में कमी आती है, इसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
- संजय विश्वास, डीआरएम

मैं बात करता हूं
राज्यरानी ट्रेन चालू कराने के लिए मैं रेलवे अधिकारियों से बात करता हूं।
- प्रहलाद पटेल, दमोह सांसद केंद्रीय राज्यमंत्री

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