मनमानी / फिक्स दुकानों पर पांच गुना मंहगे दामों पर बिक रहीं निजी स्कूल की किताबें

Private school books are being sold at five times more expensive prices at fix shops
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Private school books are being sold at five times more expensive prices at fix shops

  • पहली की किताबें 2909 तो 8वीं की 5480 में, एनसीईआरटी की अधिकतम 550 रु.

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

दमोह. कोरोना वायरस एवं लॉकडाउन की वजह से आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवारों को राहत देने राज्य शासन ने इस साल निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर रोक लगा दी है, लेकिन अभिभावकों की परेशानी कम नहीं हुई। लॉकडाउन की वजह से दो माह से स्कूल बंद हैं, इसके बावजूद भी निजी स्कूलों में किताबों का धंधा शुरू हो गया है। स्कूल संचालक अभिभावकों के मोबाइल पर मैसेज भेजकर उन्हें किताब खरीदने का दबाव बना रहे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि हर निजी स्कूल संचालक ने अपनी स्टेशनरी की दुकानें फिक्स कर रखीं हैं। फिक्स दुकानों से अभिभावक मंहगी किताबें खरीदकर लुट रहे हैं। 
इतना ही नहीं सीबीएसई स्कूलों में न तो गाइडलाइन का पालन हो रहा है और न ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निर्देश माने जा रहे हैं। इन स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों के बजाय निजी प्रकाशकों की किताबें चलाई जा रही हैं। जो पांच गुना तक अधिक मंहगी होती हैं। जिससे अभिभावकों को महंगी किताबों का सेट खरीदना पड़ रहा है। 
कोई बच्चा पुरानी पुस्तकों का प्रयोग न कर सके इसलिए प्रत्येक वर्ष प्रकाशन या कोर्स बदल दिया जाता है। ऐसे में किताबों के दाम बीते वर्ष के मुकाबले 10 से 15 प्रतिशत बढ़े हैं। कॉपियों के मामले में भी स्कूल ही लाभ की स्थिति में है। स्टेशनरी संचालकों ने स्कूलों के नाम वाली कॉपियां बिक्री के लिए रखी हैं। इनके दाम लागत से अधिक वसूले जा रहे हैं।  

भास्कर ने शहर में संचालित सीबीएसई स्कूलों में संचालित की जा रही किताबों के दामों की स्टेशनरी दुकानों से पड़ताल की। जिसमें एक प्राइवेट स्कूल की कक्षा के नर्सरी की किताबों का सेट 1413 रुपए, पांचवीं का पूरा सेट 4 हजार 525 रुपए एवं कक्षा आठवीं की किताबों का सेट 5 हजार 480 रुपए में आ रहा है। इस तरह किताबों की कीमत कक्षावार बढ़ती जाती है। यही हाल अन्य निजी स्कूलों का भी है। जबकि एनसीईआरटी की कक्षा आठवीं तक की पुस्तकें बाजार में अधिकतम 500 रुपए की हैं।  इन किताबों में केवल प्रिंटिंग क्वालिटी में अंतर होता है। खास बात यह है कि यह सभी किताबें फिक्स दुकानों पर ही मिल रही हैं। 
अभिभावक बोले-हमारी मजबूरी
अभिभावक एडवोकेट लक्ष्मीकांत तिवारी, कमल तिवारी, जहीर खान, मनीष नगाइच, नितिन मिश्रा, प्रमेंद्र खरे, दीपक जैन, श्रवण जैन, गृहणी ज्योति खरे, हेमलता पटेल ने बताया कि स्कूलों में प्रतिस्पर्धा चल रही है। अभिभावक अपने बच्चों को अच्छे विद्यालयों में पढ़ाना चाहते हैं। ऐसी स्थिति में उनके पास पहले तो एडमिशन की मजबूरी होती है। एडमिशन होने के बाद स्कूल के नियम व कानून भले ही कठिन व मुश्किल होते हैं उसके नियम में बंधना पड़ता है। स्कूल जो किताबें कहेगा उस किताब को खरीदना जरूरी है। 
एक्सपर्ट व्यू: मनमानी पर सख्ती से रोक लगना चाहिए
निजी सीबीएसई स्कूलों में गाइड लाइन के मुताबिक एनसीईआरटी की किताबें ही चलाने के आदेश हैं, लेकिन निजी स्कूलों में इन नियमों का कोई पालन नहीं हो रहा है। ऐसे स्कूलों में शिक्षा का व्यवसायीकरण चल रहा है, जिससे अभिभावकों व बच्चों का शोषण हो रहा है। 
- अनूप अवस्थी, प्राचार्य केंद्रीय विद्यालय दमोह
फीस न भर पाने पर कोई भी स्कूल काट नहीं सकता नाम
डीईओ पीपी सिंह ने बताया कि हालही में राज्य शासन ने आदेश जारी किया है कि निजी स्कूल इस साल किसी भी तरह से फीस नहीं बढ़ा सकते। हालांकि लॉकडाउन की अवधि में शिक्षण शुल्क ले सकते हैं, लेकिन इसमें अन्य कोई फीस शामिल नहीं होगी। इसके अलावा यदि कोई अभिभावक किसी कारणवश फीस नहीं भर पाता तो किसी भी हालत में बच्चे का नाम स्कूल से काटा नहीं जाएगा। अभिभावक से दो से तीन किश्त में फीस ली जाएगी।  
डीईओ बोले -
जल्द ही जांच कराएंगे
^अभी हमें इस तरह से कोई शिकायत नहीं मिली है। गाइड लाइन का पालन कराने के लिए एक टीम बनाई जाएगी। यदि निजी स्कूल गड़बड़ी कर रहे हैं तो निश्चित ही कार्रवाई की जाएगी।
- पीपी सिंह, डीईओ

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