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स्मृति शेष:2017 में अपने मित्र अब्दुल शकूर द्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन करने दमोह आए थे राहत इंदौरी

दमोह2 महीने पहले
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  • जहां पर एमएलबी स्कूल में आयोजित जश्ने अंजुम दमोही व ऑल इंडिया मुशायरा में उन्होंने शिरकत की थी

अंतर्राष्ट्रीय शायर डॉ.राहत इंदौरी 70 का मंगलवार की शाम 5 बजे इंदौर में निधन हो गया। उनका दमोह से विशेष लगाव रहा है। वर्ष 2017 में अपने मित्र अब्दुल शकूर अंजुम दमोही द्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन करने वह दमोह आए थे। जहां पर एमएलबी स्कूल में आयोजित जश्ने अंजुम दमोही व ऑल इंडिया मुशायरा में उन्होंने शिरकत की थी। इस आयोजन में अनेक राष्ट्रीय कलाकारों ने भी शिकरत की थी। अब्दुल शकूर अंजुम के बेटे आशिफ अंजुम ने बताया कि डॉ. राहत इंदौरी का उनके पिताजी के साथ विशेष लगाव था। जब वह अंतर्राष्ट्रीय मंच पर जाते थे तो बड़ा नजराना लेते थे, लेकिन उनके पिताजी से मित्रता के कारण उन्होंने कुछ भी नजराना नहीं लिया।
मुझे विदेश ले जाना चाहते थे इसलिए पासपोर्ट बनवाया आसिफ ने कहा कि डॉ. राहत इंदौर का हमारे परिवार पर विशेष स्नेह था। मैं भी एक शायर हूं, इसलिए वह मुझे विदेश लेकर जाना चाहते थे, इसके लिए मैंने पासपोर्ट भी बनवा लिया था, लेकिन वह हमें छोड़कर चले गए। उनके निधन से एक युग का अंत हो गया। उर्दू साहित्य को अपूूर्णीय क्षति हुई है। हिंदी-उर्दू एकता की मिशाल उनसे बेहतर और कोई नहीं हो सकती। उन्होंने अपनी शायरी में दमोह के मंच से कहा था.... मैं मर जाऊं...तो मेरी इक अलग पहचान लिख देना... लहू से मेरी पेशानी पे हिंदुस्तान लिख देना...। इसी तरह उन्होंने दूसरी शायरी में कहा कि... यहां पर खत्म हैं ऊंची उड़ानें... जमीं पर आसमां वाला पड़ा है।

गौरतलब है कि डॉ राहत इंदौरी हार्ट की बीमारी से पीड़ित थे हाल ही में उनकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई गई थी जिसका उन्होंने ट्वीट भी किया था।

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