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जिला अस्पताल:लीकेज छिपाने के लिए 70 लाख खर्च करके बनवाया टीनशेड, वॉटर प्रूफिंग पर 30 लाख रुपए खर्च होंगे

दमोह5 दिन पहले
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  • भवनों की गुणवत्ता घटिया होने पर पहले से आ रही थी लीकेज की शिकायतें

शासकीय जिला अस्पताल में भवनों की घटिया गुणवत्ता और उनसे हर साल होने वाले लीकेजों को छिपाने के लिए प्रबंधन करीब 70 लाख रुपए की राशि से बिल्डिंग पर टीनशेड बन रहा है। संभवत: मध्यप्रदेश में दमोह जिला अस्पताल का पहला मामला है। यहां पर गड़बड़ी छिपाने के लिए छत पर टीनशेड बनाया जा रहा है।

टीनशेड बनाने के लिए बाकायदा एजेंसी को टेंडर दिया गया है और एजेंसी अनुबंध के हिसाब से पूरी बिल्डिंग टीनशेड से कवर्ड कर रही है। इतना ही नहीं अधिकारियों के प्रस्ताव पर इस समस्या को दूर करने के लिए शासन से एक करोड़ रुपए की बाकायदा स्वीकृति मिली है। जिसमें से 70 लाख रुपए टीनशेड और बाकी 30 लाख रुपए वॉटर प्रूफिंग पर खर्च होने हैं। फिलहाल 5 हजार 150 स्क्वायर फीट में टीनशेड लगना था, जिसमें से अब तक 4 हजार 960 स्क्वायर फीट में काम हो चुका है। बाकी का काम जोरों पर चल रहा है।

बार-बार लीकेज की शिकायतें मिलती थीं

सीएमएचओ कार्यालय में पदस्थ उपयंत्री चतुर्वेदी ने बताया कि जिला अस्पताल में भवनों में बार-बार लीकेज की समस्या आ रही है। इस समस्या को देखते हुए शासन को एक करोड़ रुपए से टीनशेड और वाटर प्रूफिंग का एस्टीमेट बनाकर भेजा गया था।

जिसकी स्वीकृति मिलने के बाद एजेंसी ने काम प्रारंभ किया है। ज्यादातर काम हो चुका है। कुछ काम रह गया है, जिसे जल्द ही पूरा करा लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि टीनशेड लगने के बाद से अस्पताल के वार्डों में लीकेज की समस्या खत्म हो जाएगी और मरीजों के लिए टीनशेड के नीचे ठहरने की सुविधा भी मिलने लगेगी।

योजना बनाकर शासन को भेजी गई थी जहां से स्वीकृति मिली

इस संबंध में जिला अस्पताल की सिविल सर्जन डाॅक्टर ममता तिमोरी का कहना है कि पूरी अस्पताल में लीकेज थे और बारिश के दिनों में पानी टपकता था जिससे मरीजों व स्टाफ को परेशानी होती थी। कार योजना बनाकर शासन को भेजी गई थी जहां से स्वीकृति मिलने के बाद अस्पताल के ऊपर टीन सेट लगवाने का काम कराया जा रहा है।

इन वार्डों पर बनाया गया टीनशेड

जिला अस्पताल में छोटे-बड़े करीब 20 वार्ड हैं। इनमें सर्जिकल वार्ड, महिला सर्जिकल वार्ड, हड्‌डी रोग विभाग, बच्चा वार्ड, मेटरनिटी वार्ड, बर्न वार्ड, मेडिकल वार्ड, एसएनसीयू, एनआरसी केंद्र, ड्रामा वार्ड, पैथलॉजी, इमरजेंसी वार्ड, ओपीडी, दंत रोग विभाग सहित अनेक वार्ड शामिल हैं। जिनकी छत बारिश के दिनों में लीकेज होती हैं और पूरी व्यवस्थाएं गड़बड़ा जाती हैं।

कई बार मरीजों को बारिश में छाता तक लगाकर बैठना पड़ता है। क्योंकि जो भवन बने, उनकी गुणवत्ता पर सवाल खड़ा किया गया। विभाग की ओर से घटिया काम करने वाली एजेंसियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, उल्टा गड़बड़ी छिपाने के लिए अस्पताल के ऊपर टीनशेड बनवा दिया गया है, ताकि गड़बड़ी भी छिप जाए और निर्माण कार्य पर कोई अंगुली भी न उठाए।

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