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अनदेखी:एजेंसियों को 6 माह से नहीं हुआ भुगतान, कोई तालाब अधूरा तो कोई हैंडओवर ही नहीं किया

दमोह2 महीने पहले
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  • छह सरोवर बनाने के लिए टेंडर हुए, कुछ काम भी हुआ, मगर न कंपलीट हो पाए, न ही हैंडओवर हुए

जिले में एक साल पहले मुख्यमंत्री सरोवर योजना के तहत बने छह तालाब न तो कंपलीट हो पा रहे हैं और न ही उन्हें हैंडओवर किया जा रहा है। ऐसा होने से इनका हितग्राहियों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। इनमें से कई तालाबों की गुणवत्ता पर सवाल भी खड़ा हो रहा है। स्थिति यह है कि तालाब किसानों को सिंचाई के लिए बने हैं, लेकिन उन्हें ही इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है।

आरईएस के अधिकारियों का कहना है कि एजेंसियों को निर्माण कार्य की राशि का भुगतान करना है, लेकिन बजट नहीं मिल रहा है। इसलिए एजेंसियां भी तालाबों को पूर्ण करने में गंभीरता नहीं दिखा रहीं हैं। यहां पर बता दें कि मुख्यमंत्री सरोवर योजना के तहत जिले में पांच ब्लाकों में तालाब बनाने की मंजूरी आरईएस को दी गई थी।

आरईएस ने ही तालाबों को बनाने के लिए टेंडर जारी किए थे और एजेंसियां तय की थीं। विभाग की ओर से हटा के दमोतीपुरा, नारायणपुरा, पथरिया के सतौआ, बटियागढ़ के कनोराकला, दमोह के बरपटी में तालाब बनाने का निर्णय लिया गया था। इन गांवों में खेतों की सिंचाई के लिए साधन न होने पर किसानों की जरुरत को देखते हुए तालाब मंजूर किए गए थे। इनमें एक-एक तालाब की लागत एक करोड़ रुपए से लेकर 90 लाख रुपए तक तय की गई थी।

किसानों को नहीं मिल पा रहा तालाबों का लाभ

वर्ष 2019 में मंजूरी के बाद तालाबों के टेंडर आरईएस की ओर से जारी किए गए थे, जिन एजेंसियों को काम दिया गया था, उनमें से कुछ के काम प्रगति पर हैं तो कुछ की प्रोग्रेस चल रही है, लेकिन इनमें छह तालाबों में से अब तक एक भी तालाब का उद्घाटन नहीं हो पाया है।

उद्घाटन न होने की वजह से किसानों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। एजेंसियों को पहले कुछ राशि जारी की गई थी, लेकिन दोबारा राशि जारी नहीं हुई है। जिससे एजेंसियों ने अपने पास से राशि लगा दी, मगर अब उनका भुगतान अटका है। पिछले 8 माह से एक पैसा भी एजेंसियों को नहीं मिला है।

कुछ तालाबों की गुणवत्ता पर सवाल

छह में से कुछ तालाबों की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा हो रहा है। टैंडर की शर्तों के अनुसार इसमें रेत और आरबीएम का भराव किया जाना था, इससे मजबूती आती, मगर कुछ जगह सरकारी जमीन से ही मिट्टी व पत्थर निकालकर तालाब में पुराव करके राजस्व की चोरी भी की गई है। इस तरह से इस काम में गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार व विभाग की मिलीभगत से शासकीय कार्य में गुणवत्ता से खिलवाड़ किया जा रहा है।

इसकी जांच की जाना चाहिए ताकि सारी सच्चाई सामने आ जाए। हटा क्षेत्र के एक तालाब की गुणवत्ता पर सवाल उठा था। पथरिया के तालाब की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। इस संबंध में आरईएस के ईई केएस मिर्धा का कहना है कि एजेंसियों को छह माह से कोई भुगतान नहीं हुआ है। राशि न होने की वजह से भुगतान नहीं हो पा रहा है। इसलिए न तो तालाब हेंडओवर हुए हैं और न ही उन्हें कंपलीट किया गया है।

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