पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

रीति रिवाज:शरीर एक घर है जो वास्तु से बना है: आचार्य निर्भय सागर

दमाेह11 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

वास्तु अंधविश्वास नहीं बल्कि वैज्ञानिक तथ्य है। वास्तु एक सत्य सिद्धांत है, रीति रिवाज नहीं। वास्तु अनादिल कालीन एक कला है। वास्तु एक सार्वभौमिक सिद्धांत है। वास्तु के सिद्धांत अंक विज्ञान एवं भौगोलिक परिस्थितियों पर आधारित हैं। वास्तु का जितना धार्मिक महत्व है उससे कहीं ज्यादा वैज्ञानिक महत्व है, जिसका उपदेश सर्वप्रथम तीर्थंकर आदिनाथ स्वामी ने अपने राज्य काल में दिया था। उसके बाद उन्हीं के पुत्र भरत चक्रवर्ती ने दिया था। 72 कलाओं में वास्तु एक कला है। वास्तु एक विद्या है उस विद्या को जानने वाले को चक्रवर्ती के राज्य में एक रत्न के रूप में स्वीकार किया जाता था।

भगवान के समवशरण, देवों के भवन, राजाओं के महल एवं मंदिर वास्तु के अनुसार ही प्राचीन काल से बनाए जाते रहे हैं। यह उपदेश वैज्ञानिक संत आचार्य निर्भय सागर महाराज ने असाटी वार्ड स्थित जैन धर्मशाला में दिया। उन्होंने कहा भवन या मकान के लिए वास्तु शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम आदिनाथ भगवान ने किया था। तत्वार्थ सूत्र आदि ग्रंथ में मकान को वास्तु शब्द का ही प्रयोग किया है।

आचार्य श्री ने कहा जब राजतंत्र था तब राजाओं के भवन वास्तु के अनुसार बनते थे, इसलिए वास्तु सिर्फ राजाओं तक सीमित था, लेकिन जब लोकतंत्र आया तब हर व्यक्ति राजा के वैभव की तरह अपना वैभव चाहता है। इसलिए आज इस वास्तु का महत्व ज्यादा बढ़ गया है। वास्तु का सिद्धांत लिखित रूप से शास्त्रों में भारतीय महापुरुषों की देन है। लेकिन यह कला धीरे-धीरे भारत से विलुप्त होती गई और विदेशों में फैल गई, लेकिन अब पुनः प्रचलन में आ चुकी है। आचार्य श्री ने कहा मानव शरीर एक घर है।

इसमें आत्मा निवास करती है। यह शरीर भी वास्तु के अनुसार बना है। इससे सिद्ध है कि वास्तु एक विज्ञान है, वास्तविक कला है। सुख शांति एवं समृद्धि के लिए घर वास्तु के अनुसार बनाना चाहिए।

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- आज का दिन पारिवारिक व आर्थिक दोनों दृष्टि से शुभ फलदाई है। व्यक्तिगत कार्यों में सफलता मिलने से मानसिक शांति अनुभव करेंगे। कठिन से कठिन कार्य को आप अपने दृढ़ विश्वास से पूरा करने की क्षमता रखे...

और पढ़ें