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बजट की कमी:वृद्धाश्रम काे 5 माह से नहीं मिला बजट, राशन खत्म होने से दो दिन चाय भी नहीं हुई नसीब

दमोह8 महीने पहले
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  • दान से मिलने वाली सामग्री से भर रहा बुजुर्गों का पेट, समाजसेवी ने कराई व्यवस्था
  • पांच माह से वृद्धाश्रम के लिए नहीं आई कोई राशि

शहर के वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों को बजट की कमी से परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। शासन द्वारा बीते पांच माह से बजट न मिलने की वजह से यहां व्यवस्थाएं गड़बड़ा गई हैं। हालात यह है कि बीते दो दिन राशन खत्म होने की वजह से बुजुर्गों को चाय भी नसीब नहीं हो पा रही है। शनिवार को वृद्धाश्रम में शक्कर का एक दाना भी नहीं था।

जिससे बुजुर्गों के लिए चाय नहीं बन पाई, लेकिन जब इसकी जानकारी पास में रहने वाले एक समाजसेवी दुकानदार को लगी तो उन्होंने दो किलो शक्कर भेजी। जिसके बाद बुजुर्गों को सुबह शाम की शक्कर नसीब हो पाई। दूसरी ओर राशन भी खत्म हो गया है। खाना बनाने के लिए मसाले भी पूरी तरह से खत्म हो गए हैं। वर्तमान में केवल दान से मिली आटा, चावल से बुजुर्गों का पेट भर रहा है। दूसरी ओर भीषण गर्मी में भी बुजुर्गों के लिए कुलर चालू नहीं किए जा रहे हैं। जिससे यहां रहने वाले करीब 36 बुजुर्ग भीषण गर्मी से परेशान हैं। स्थिति यह है कि बुजुगों के लिए प्रशासन मास्क एवं सैनीटाइजर भी उपलब्ध नहीं करा पा रहा है।

अब दुकानदारों ने सामग्री भी उधार देना बंद कर दी है
बुजुर्ग विमल कुमार, फूल बाई, प्रेमबाई, नंदनी ने बताया कि अब तेल व साबुन तो पहले से ही बंद है, अब चाय मिलना भी मुश्किल हो गया है। प्रशासन द्वारा मास्क एवं सैनीटाइजर भी नहीं दे रहा है। इस भीषण गर्मी में रात के समय एक पल नींद भी नहीं आती है। उन्होंने बताया कि एक ओर सरकार चुनाव के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, दूसरी ओर बुजुुर्गों के लिए पांच माह से आवंटन नहीं भेजा है।

गौरतलब है कि वृद्धाश्रम में करीब एक साल से प्रबंधक का पद खाली है। जिससे यहां की व्यवस्था दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के भरोसे चल रहीं हैं। दूसरी ओर राशि न आने से अब दुकानदारों ने सामग्री उधार देना भी बंद कर दी है। इसके बावजूद भी जिम्मेदारों को बुजुर्गों की कोई फिक्र नहीं है।

कर्मचारियों को पांच माह से नहीं मिला वेतन
वृद्धाश्रम में काम करने वाले कर्मचारियों ने बताया कि हम लोगों को बीते 6 माह से वेतन नहीं मिला है। जिससे परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो रहा है। अब भी यहां-वहां से कर्ज लेकर काम चलाया, लेकिन अब भूखों मरने की नौबत आ गई है। यहां पदस्थ रसोईया गीता सेन, उषा सेन, आया सुनीता बाल्मीकी, स्वीपर बृजेंद्र, भृत्य भैयाराम, दरबारी ने बताया कि हम लोगों ने कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन हर बार यही कहा जाता है कि भोपाल से आवंटन नहीं आया। आखिर हम लोग कब तक बिना वेतन के परिवार चलाएंगे।
मामले को दिखवाता हूं

  • मैं अभी जरूरी मीटिंग में हूं। इस मामले को दिखवाता हूं। - तरूण राठी, कलेक्टर
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