धार्मिक आयोजन:जीवन में दान करने से धन नहीं घटता: राधा सर्वेश्वर

हटा7 महीने पहले
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  • नवोदय वार्ड ककराई में श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु

आज तक संसार में कोई स्थिर नहीं रह पाया। मौत सभी की आती है इसलिए जीवन में हमेशा सत्कर्म करने चाहिए ताकि मृत्यु मंगलमय हो सके। मृत्यु जिसकी मंगलमय होती है वह कभी उससे घबराता नहीं है और सत्कर्म करने वाला व्यक्ति मृत्यु से घबराता नहीं वह उसे प्रेम पूर्वक आलिंगन करता है लेकिन जो हठधर्मी आसुरी प्रवृत्ति होता है वह मृत्यु को समाप्त करने का प्रयास करता है उक्त सद विचार नवोदय वार्ड ककराई में आहूत श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिवस में पंडित राधा सर्वेश्वर महाराज के द्वारा कहे गए हैं उन्होंने कहा कि यह संसार सागर एक मोह माया है क्योंकि जब तक हमारी सांस चलती है तभी तक हमारे रिश्ते नाते हमारे साथ होते हैं और जैसे ही मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं तो उसके बाद सारे रिश्ते नाते खत्म हो जाते हैं इसलिए जीवन जीते हमें दान धर्म दीन हीनो की सेवा माता-पिता की सेवा करनी चाहिए ताकि मृत्यु उपरांत भी हमारे कर्म को याद किया जाएं और परलोक सुधर जाएं। उन्होंने कहा कि धनी व्यक्ति कभी किसी पर भरोसा नहीं करता और न ही वह कभी सत्य बोलता है क्योंकि हमेशा धन ही झूठ बोल पाता है। धन ऐसा है जिसके लिए पति अपने पत्नी से और पत्नी अपने पति से भी झूठ बोलने से नहीं चूकते, लेकिन थोड़ा सा विचार किया जाए क्या धन कभी स्थायी रहा है। कहीं कोई मोदी जी जैसा आ गया तो एक ही रात में हमारे उन छुपे हुए नोटों की कीमत खत्म हो जाती है।

भागवत कथा के विविध प्रसंग सुनाते हुए कहा कि वेद पुराणों में ब्राह्मण को भूसूर कहा गया है यानी ब्राह्मण पृथ्वी का देवता है। उसके चरणों और उसकी वाणी में धन होता है। उनका पूजन और सम्मान से ठाकुरजी स्वयं प्रसन्न होते हैं और ब्राह्मण का अपमान पाप माना जाता है। विदुर नीति में कहा गया है धनी होकर दान न करने वाला व्यक्ति भी दरिद्र माना गया है।

सुदामा चरित्र का व्याख्यान करते हुए कहा गया कि सुदामा की पत्नी के मन में सदा ही अभाव बना रहता था कि कम से कम इतना तो हो हम अपना परिवार पाल सकें और कोई साधु आता है तो उसका भी पेट भर सकें। कथा में कहा गया कि अगर कोई याचक आपके घर आता है तो उसको कुछ ना कुछ अवश्य ही देना चाहिए।

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