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गेहूं का हुआ अच्छा उत्पादन:काले गेहूं का हुआ अच्छा उत्पादन, दाना भी बाेल्ड आया, रबी सीजन में बढ़ सकता है रकबा

खुरई11 दिन पहले
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(हेमंत जैन) ब्लाॅक में आने वाले गांवाें में उपजाऊ काली मिट्टी है, जिससे यहां शरबती गेहूं की उपज अच्छी हाेती है। शरबती गेहूं के लिए यह क्षेत्र प्रसिद्ध है, यहां का गेहूं मिठास वाला हाेता है और मुलायम राेटी बनती है। इसकी सप्लाई बड़े-बड़े महानगराें में हाेती है, यहां का गेहूं पहले विदेश भी सप्लाई हाे चुका है।
पिछले दाे साल से क्षेत्र में काले गेहूं की खेती भी प्रारंभ हुई है। इस साल काले गेहूं का उत्पादन अच्छा हुओ और दाना भी बाेल्ड आया। काला गेहूं सेहत के लिए अच्छा माना जाता है।

पिछले साल इसका रकबा करीब 40 एकड़ रहा, दाे किसानाें ने ही यह गेहूं बाेया था। अच्छी उपज हाेने के कारण काले गेहूं का रकबा क्षेत्र में बढ़ने की उम्मीद है, आसपास के क्षेत्राें में भी काले गेहूं की खेती शुरू हाे सकती है। खुरई ब्लाॅक के ईशरवारा गांव के किसान शैलेन्द्र प्रताप सिंह बताते हैं कि काले गेहूं की खेती पिछले रबी सीजन में 20 एकड़ में की थी। इसमें दाे बैरायटी बाेई थी एक काला और दूसरा काॅफी रंग का जिसे ब्राउन गेहूं कहते हैं बाेया था।

गहरी जुताई करके खेत काे तैयार किया था, आधे हिस्से में जैविक खेती की थी, इसमें काेई रसायनिक दवा नहीं डाली। आधे हिस्से में रसायनिक खाद का प्रयाेग किया था। दाेनाें बैरायटियाें के गेहूं ने अच्छा उत्पादन दिया। 400 क्विंटल उपज प्राप्त हुई। काला गेहूं का औसत एक एकड़ में 18 क्विंटल तथा ब्राउन गेहूं का औसत 22 क्विंटल प्रति एकड़ निकला। बीज के दाम ज्यादा थे, बाकी लागत ज्यादा नहीं आई।

वह बताते हैं कि काले गेहूं का जाे बीज लाए थे, वह पतला था, लेकिन जब फसल हुई ताे दाना भरा हुआ आया। शरबती के गुण काले गेहूं में आए। काली मिट्टी हाेने से गेहूं का दाने में चमक भी आई। यह गेहूं स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। आसपास के क्षेत्र में इसकी खेती बढ़ने का अनुमान है। काेई तकनीकी सलाह या अन्य सलाह मांगेगा ताे उन्हें जरूर देंगे।

उन्हाेंने अपना माेबाइल नंबर 9754607742 भी दिया है। उन्हाेंने बताया कि खेताें में नए प्रयाेग करते हैं, खरीफ माैसम में 50 एकड़ में संकर मक्का लगाई है। जिसकी ऊंचाई 10 से 12 फीट तक गई है। गहरी जुताई पर दाे साल से ध्यान दे रहे हैं, जिससे अच्छे परिणाम आ रहे हैं।

एसएडीओ एसपी भारद्वाज का कहना है कि काली मिट्टी उपजाऊ है, इसलिए यहां शरबती गेहूं उच्च स्तर का हाेता है। मिट्टी के कारण ही किसी भी गेहूं की क्वालिटी बनती है। गहरी जुताई बहुत जरूरी है। फसल चक्र अपनाना और रासायनिक खादाें का प्रयाेग संतुलित मात्रा में करना जरूरी है। किसानाें काे इस ओर ध्यान देना हाेगा, तभी मिट्टी उपजाऊ बनी रहेगी।

भास्कर नॉलेज: यह है काले गेहूं की विशेषता
किसान शैलेन्द्र प्रताप सिंह बताते हैं कि काले गेहूं काे डाॅ. माेनिका गर्ग ने खाेजा था। यह गेहूं बहुत पाैष्टिक हाेता है, इसमें एंथ्राेसाइनिन एक प्राकृतिक एंटी ऑक्सीडेंट, एंटीबायाेटिक है, जाे शुगर सहित कई राेगाें से लड़ने में शरीर काे सक्षम बनाता है। काले रंग के बारे में पूछने पर पता चला था कि फलाें, सब्जियाें और अनाजाें के रंग उनमें माैजूद प्लांट पिगमेंट या रंजक कणाें की मात्रा पर निर्भर हाेते हैं। काले गेहूं में एंथ्राेसाइनिन पिगमेंट हाेते हैं। जिससे रंग नीला, काला, बैंगनी हाे जाता है। आम गेहूं में एंथ्राेसाइनिन महज 5 पीपीएम हाेता है, लेकिन काले गेहूं में 100 से 200 पीपीएम के आसपास हाेता है। जिंक, आयरन की मात्रा भी ज्यादा हाेती है।

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