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  • 1800 Plants Planted In 7 Thousand Square Feet Grew To 8 Feet Within 11 Months, Now The Municipalities Across The State Have Been Instructed To Make Similar Oxygen Banks.

हरियाली अमावस्या पर विशेष:7 हजार वर्गफीट में लगे 1800 पौधे 11 माह के भीतर ही 8 फीट तक बढ़े, अब प्रदेशभर की नगर पालिकाओं को ऐसे ही ऑक्सीजन बैंक बनाने के निर्देश

सागर2 महीने पहलेलेखक: श्रीकांत त्रिपाठी
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  • सागर में सफल हुई मियावाकी तकनीक

हरियाली अमावस्या पर मिनी फॉरेस्ट की यह तस्वीर सागर के कलेक्टोरेट परिसर की है। जहां पिछले वर्ष सितंबर माह पहले जापान की मियावाकी तकनीक से 7 हजार वर्गफीट क्षेत्र में दो से तीन फीट ऊंचे 1800 पौधे रोपे गए थे। महज 11 माह के भीतर ही अब इन पेड़ों की ऊंचाई 8 से 9 फीट तक पहुंच चुकी है।

खास बात यह है कि गर्मी के मौसम में भी इस पौधारोपण का एक भी पेड़ नहीं मरा। अब यह इलाका मिनी फॉरेस्ट के रूप में विकसित हो चुका है, जहां सुबह और शाम पक्षियों की चहचहाट सुनाई देती है। एक साल पहले यह जगह ऐसी नहीं थी। यहां नए कलेक्टोरेट में हुए निर्माण कार्यों का मलबा पड़ा था। ऐसे में कलेक्टर दीपक सिंह की पहल से नगर निगम क्षेत्र में हुए मियावाकी तकनीक के इस सफल प्रयोग के बाद अब प्रदेश सरकार ने सभी नगरीय निकायों में इसी तकनीक से पौधारोपण कर ऑक्सीजन बैंक तैयार करने के निर्देश जारी किए हैं। जिसके बाद अब मकरोनिया के दीनदयाल नगर मुक्तिधाम समेत प्रदेशभर के नगरीय निकायों में भी इस तकनीक के इस्तेमाल से पौधारोपण का काम किया जा रहा है।

वर्ष 2017 में सागर के तत्कालीन डीएफओ ने किया था प्रदेश में पहला प्रयोग

प्रदेश में मियावाकी तकनीक का सबसे पहला प्रयोग सागर के तत्कालीन डीएफओ क्षितिज कुमार के द्वारा सिटी फॉरेस्ट में किया गया था। इस दौरान उन्होंने महज 150 पौधे रोपे थे। इसके बाद सबसे बड़ा प्लांटेशन एम्स भोपाल में हुआ, जहां 18 हजार वर्गफीट में 5600 से अधिक पौधे रोपे गए। चूंकि इस प्लांटेशन में पौधे आधे से एक फीट की दूरी पर लगाए जाते हैं, इसलिए वन विभाग द्वारा इसे पूर्व में मान्यता नहीं मिली थी। लेकिन सागर और भोपाल समेत अन्य स्थानों पर पहुंचे सफल पौधारोपण के बाद अब वन विभाग ने ही खुद इस तकनीक को लेकर जानकारी जारी की है।

यह है जापान की मियावाकी तकनीक

2014 में बॉटनिस्ट अकीरा मियावाकी ने हिरोशिमा के समुद्री तट के किनारे पेड़ों की एक दीवार खड़ी की, इससे न सिर्फ शहर को सुनामी से होने वाले नुकसान से बचाया जा सका, बल्कि दुनिया के सामने कम्युनिटी व घने पौधारोपण का एक नमूना भी पेश किया। इस तकनीक में महज आधे से एक फीट की दूरी पर पौधे रोपे जाते हैं।

तकनीक के यह हैं फायदे

  • 2 फीट चौड़ी और 30 फीट पट्टी में 100 से भी अधिक पौधे रोपे जा सकते हैं।
  • पौधे पास-पास लगने से मौसम की मार का असर नहीं पड़ता और गर्मियों के दिनों में भी पौधे के पत्ते हरे बने रहते हैं।
  • पौधों की ग्रोथ दोगुनी गति से होती है।
  • कम स्थान में लगे पौधे एक ऑक्सीजन बैंक की तरह काम करते हैं।
  • बारिश को आकर्षित करने में भी सहायक हैं।
  • इस तकनीक का इस्तेमाल केवल वन क्षेत्र में ही नहीं बल्कि घरों के गार्डन में भी किया जा सकता है।

शहर में नालों और सड़क के किनारे लगेंगे 50 हजार पौधे

हमने बहुत ही कम स्थान में मियावाकी तकनीक का इस्तेमाल एक प्रयोग के तौर पर किया था। इसके सफल होने के बाद अब शहर को हरा-भरा बनाने की दिशा कदम उठाए जा रहे हैं। स्मार्ट सिटी के माध्यम से जल्द ही 50 हजार पौधों का वर्क ऑर्डर जारी होगा, जिसमें नालों और सड़कों के किनारे पौधे रोपे जाएंगे। इसके अलावा मुक्तिधामों में भी मियावाकी तकनीक से रामवन बनाने की तैयारी है।
- दीपक सिंह, कलेक्टर सागर

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