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बाल विवाह की कुप्रथा:साढ़े तीन साल में 294 बाल विवाह रोके लेकिन इतनी ही बेटियां परिवार-समाज के डर से बन गईं बालिका वधु

सागर24 दिन पहलेलेखक: अतुल तिवारी
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साढ़े तीन साल में 294 बाल विवाह रुकवाए - Dainik Bhaskar
साढ़े तीन साल में 294 बाल विवाह रुकवाए
  • सूचना न मिलने से महिला बाल विकास और किशोर इकाई 50% बाल विवाह ही रुकवा पाती है

बुंदेलखंड में पिछले दो साल में बाल विवाह की कुप्रथा ज्यादा सामने आ रही है। साढ़े तीन साल में 294 बाल विवाह सागर की किशोर इकाई टीम ने रोके। इनमें से 70 बाल विवाह 2021 के छह महीने ही रुकवाए गए। यह तो वे मामले हैं जो सामने आ गए। बुंदेलखंड के 6 जिलों में सूचना न मिलने से इतनी ही बेटियां बालिका वधु बन चुकी होंगी। क्योंकि उन्हें परिवार की लाज और समाज का डर रहता है। गांव में यह कुप्रथा फलफूल रही है। सागर में डेढ़ साल में बाल विवाह के 30% मामले बढ़ गए हैं। 27% मामलों में सूचना न मिलने या देर से मिलने के कारण बाल विवाह हो रहा है। सागर में करीब 55 बाल विवाह पिछले दो माह में रुकवाए गए हैं। तो वहीं अन्य जिलों की बात करें तो दमोह में तीन माह में 53 और टीकमगढ़ में 30 बाल विवाह रोके गए हैं, जबकि 5 बाल विवाह हुए हैं। सागर में हर साल औसतन 91 बाल विवाह रुकवाए जा रहे हैं, जबकि 50 से अधिक मामलों में सूचना न मिलने के कारण बाल विवाह हो रहा है।

आरक्षक ज्योति तिवारी ने बताया कि 2018 में विशेष किशोर इकाई के गठन के बाद से अब तक 294 बाल विवाह रोके जा चुके हैं। इनमें से 80% मामले ग्रामीण क्षेत्रों के हैं। दमोह में पिछले तीन माह में 53 बाल विवाह रोके गए हैं। इनमें बेटों के महज 20 और बेटियों के 33 बाल विवाह रुकवाए गए हैं। यानी 40% बाल अधिक हो रहे हैं। दमोह में भी 99% बाल विवाह ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहे हैं। छतरपुर में महिला बाल विकास विभाग ने इस वर्ष 6 माह में सिर्फ 12 बाल विवाह ही रोके हैं। टीकमगढ़ में इस वर्ष अब तक 30 बाल विवाह रोके गए हैं और 5 बाल विवाह हो चुके हैं। जिनमें टीम को देर से सूचना मिली।

1- बमौरा गांव की किशोरी बोली- पढ़ाई के लिए रुकवाई खुद की शादी
बहेरिया थाना के बमौरा गांव में मां-बाप 17 साल की बेटी की शादी करा रहे थे। बेटी आगे पढ़ना चाहती थी। इसलिए उसने फोन कर पुलिस को सूचना दे दी। भास्कर को विशाखा (परिवर्तित नाम) ने बताया कि वह अभी 12वीं में है और मां-बाप ने इमोशनली बोला तो उसे मजबूरी में शादी के रस्में निभानी पड़ी, लेकिन वह अभी शादी करना नहीं चाहती।
2- मां बोली- बेटी का प्रेम-प्रसंग चल रहा था, इसलिए करा रही थी शादी
तिली गांव की 16 साल की लड़की की मां उसकी जबरदस्ती शादी करा रही थी। टीम ने जाकर शादी रुकवा दी। भास्कर को लड़की की मां विमला (परिवर्तित नाम) ने बताया कि उसका पति नहीं है। बेटी को कोरोना हुआ तो वह आइसोलेशन सेंटर में भर्ती रही। वहां किसी से अफेयर हो गया। बेटी अब उससे शादी करने की जिद कर रही है। मां ने पहले ही किसी और से शादी तय कर दी है।
3- यूपी के महरौनी गांव में धोखे में रखकर करा दी नाबालिग बेटी की शादी
कमल प्रजापति की पत्नी का बाल विवाह हुआ है। कमल ने बताया कि 14 मई को उसकी यूपी के महरौनी में शादी हुई। ससुर ने बताया कि बेटी 20 साल की है और फर्स्ट ईयर में पढ़ रही है। कमल को शादी के बाद पता चला कि उसकी पत्नी 17 साल की है। इसके बाद उसने पत्नी से अलग होने की ठान ली तो ससुर उसे दहेज प्रताड़ना में फंसाने की धमकी दे रहे हैं।

बाल विवाह होने के ये हैं 5 कारण
1) मजदूरी करने जाते हैं बाहर गांवों में मां-बाप मजदूरी के लिए बाहर दूसरे जिलों व राज्यों तक जाते हैं। इसलिए शादी करा देते हैं।
2) माता या पिता का न होना
किसी नाबालिग बेटी के पिता नहीं है तो किसी की मां नहीं है। ऐसे मामलों में रिश्तेदार शादी करवा देते हैं।
3) प्रेम-प्रसंग का डर
मां-बाप को यह डर रहता है कि बेटी बड़ी हो रही है, कहीं उसका किसी से प्रेम-प्रसंग न हो जाए।
4) बेटी की जिद
कम उम्र में न समझी में लड़कियां अफेयर कर बैठती हैं, शादी न कराने पर धमकियां देती हैं।
5) टीम का सक्रिय न होना
ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी बेटियों की कम शिक्षा, जागरूकता का अभाव व महिला बाल विकास की टीम का अधिक सक्रिय न होना भी बाल विवाह होने का एक मुख्य कारण है।

देर से सूचना मिलने से ये बाल विवाह हो गए

  • मछरयाई में दुल्हा-दुल्हन दोनों नाबालिग थे। जिनका बाल विवाह हो चुका है। लड़की पक्ष के ललितपुर के हैं। जो सागर आकर शादी करके चले गए।
  • मोतीनगर थाना क्षेत्र में पेट्रोल पम्प के पीछे बनी कॉलोनी में 15 साल की लड़की की शादी करा दी गई। इस मामले में टीम को देर से सूचना मिली। हालांकि टीम ने लड़की की विदा रुकवा दी।
  • सूबेदार वार्ड में 18 साल के लड़के की शादी करवा दी। देर से सूचना मिलने के कारण बारात शिवपुरी जा चुकी थी। इस केस में लड़की 19 साल की है।
  • शाहगढ़ के बगरोही गांव में पूर्व सरपंच ने 10वीं में पढ़ने वाले अपने 17 साल के नाबालिग बेटे की शादी 14 मई को छतरपुर जिले के डगरई गांव में करा दी।
  • बाल विवाह रोकने के लिए ये हैं तीन कदम

छेड़छाड़ पर हो सख्त एक्शन
15-17 साल की किशोरियों के साथ स्कूल आते-जाते वक्त अक्सर छेड़छाड़ की घटनाएं होती हैं। कई मामलों में पुलिस तुरंत एक्शन नहीं लेती। ग्रामीण क्षेत्रों में दबंग अक्सर गरीब मां-बाप पर बेटी की शादी करने का दवाब बनाते हैं।
गांव में ही मिले रोजगार
पंचायत द्वारा ऐसे परिवारों को चिंहित किया जाना चाहिए। जिनकी बेटियां 15-17 साल की हैं और मां-बाप मजदूरी करने गांव से बाहर दूसरे जिलों में जाते हैं। ऐसे परिवारों को हर हाल में गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
महिला बाल विकास हो सक्रिय
बेटियों की शिक्षा व जागरूकता के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में महिला एवं बाल विकास की टीम को सक्रिय होने की जरूरत है। खासतौर से 15-17 साल की बेटियों से विभाग की कार्यकर्ताएं मिलें और उनकी समस्याओं को सुनें। बेटियां अपनी आत्मरक्षा कर सकें इसके लिए ट्रेनिंग भी दी जाए।

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