फ्लू ओपीडी के आंकड़ों में खुलासा:सर्दी, खांसी, बुखार के 30% मरीज पहुंच रहे बीएमसी, लेकिन फ्लू ओपीडी में केवल 2 फीसदी की ही सैंपलिंग

सागरएक महीने पहले
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कोरोना की तीसरी लहर को लेकर एक तरफ जहां शासन-प्रशासन तैयारियों में जुटा हुआ है। वहीं दूसरी तरफ बीएमसी के मेडिसिन विभाग में आने वाली ए सिम्टोमैटिक मरीजों की सैंपलिंग ही नहीं कराई जा रही। इस बात का खुलासा फ्लू ओपीडी के आंकड़ों से हुआ। पिछले 13 दिन में 360 मरीज फ्लू ओपीडी में कोविड की जांच के लिए पहुंचे हैं।

इनमें से 60 फीसदी ट्रेवल हिस्ट्री वाले, 30 फीसदी ऑपरेशन के मरीज, 8 फीसदी जेल के बंदी और सिर्फ 2 फीसदी मरीज लक्षण वाले मिले हैं। जबकि मेडिसिन विभाग की ओपीडी के आंकड़े देखें तो 13 दिन के भीतर 2743 मरीज इलाज कराने पहुंचे, यानी हर दिन 200 से अधिक मरीज।

इनमें से 30 फीसदी मरीज सर्दी, खांसी और बुखार के लक्षण वाले थे, लेकिन डॉक्टरों ने इन्हें सामान्य मानते हुए दवाएं देकर घर वापस भेज दिया। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब सिर पर कोविड की तीसरी लहर का खतरा मंडरा रहा है तो डॉक्टर इसे लेकर गंभीरता क्यों नहीं दिखा रहे।

अधिकांश बाहर जाने वाले करा रहे आरटीपीसीआर टेस्ट

फ्लू ओपीडी के आंकड़ों के अनुसार आरटीपीसीआर टेस्ट कराने वाले लोगों में 60 फीसदी व्यक्ति ऐसे हैं, जिन्हें बाहर जाने के लिए टेस्ट की अनिवार्यता के चलते फ्लू ओपीडी पहुंचना पड़ रहा है। वहीं बीएमसी में ऑपरेशन से पहले कोविड टेस्ट जरूरी है, इसलिए 30 फीसदी लोग ऑपरेशन के मरीज हैं, इनका रैपिड एंटीजन टेस्ट किया जाता है।

हाल ही में कोविड पॉजिटिव निकली संत कंवरराम वार्ड की 66 वर्षीय महिला बीएमसी में आंख का ऑपरेशन कराने ही आईं थीं, जो ऑपरेशन से पहले हुए कोविड टेस्ट में पॉजिटिव निकली। जबकि महिला में कोविड के कोई लक्षण नहीं थे।

कोविड के लक्षण वाले मरीजों को अनिवार्य रूप से फ्लू ओपीडी में भेजना है। यदि मेडिसिन विभाग में मरीजों को आरटीपीसीआर टेस्ट एडवाइज नहीं किया जा रहा है तो मैं इसे कल ही दिखवाता हूं। इस संबंध में आदेश भी जारी किया जाएगा। - डॉ. आरएस वर्मा, डीन बीएमसी

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