लाॅकडाउन का डर:29 दिन में इंदौर-कोटा से 3531 विद्यार्थी, यूपी-गुजरात से 1372 लोग फिर घर लौटे

सागरएक वर्ष पहले
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  • पिछली साल 52 हजार लोग वापस लौटे थे, जिनमें 18 हजार प्रवासी मजदूर थे

देश भर में कोरोना के बढ़ते हुए मामलों और जगह-जगह लग रहे लॉकडाउन का असर अब लोगों की घर वापसी पर पढ़ने लगा है। सागर जिले में भी विद्यार्थियों से लेकर मजदूरों और उनके परिवारों का घर लौटने का सिलसिला शुरू हो गया है। 16 मार्च से लेकर अब तक 29 दिन के भीतर ही 4903 लोग गांवों में वापस लौट चुके हैं। हालांकि इनमें सबसे ज्यादा 3531 विद्यार्थी हैं। जो पढ़ाई के सिलसिले में इंदौर, भोपाल, कोटा आदि शहरों में गए हुए थे। इसके साथ ही अन्य राज्यों से भी वापसी लगातार जारी है। 764 प्रवासी मजदूर भी वापस लौट आए हैं। 608 लोगों की वह संख्या भी वापस लौटने वालों में शामिल है, जो कि मजदूरों और विद्यार्थियों के परिजन हैं और उनके साथ गए हुए थे। जिला पंचायत द्वारा 16 मार्च से ही गांव में वापस लौटने वाले लोगों की एंट्री कराई जा रही है। जो कि ग्राम पंचायतों के माध्यम से जनपद में एकत्र कर सागर भेजी जा रही है। जिला पंचायत सीईओ डॉ. इच्छित गढ़पाले ने बताया सामुदायिक भवन, आंगनवाड़ी बिल्डिंग को इमरजेंसी में क्वारंटीइन सेंटर बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

लौटने वालों को घर में ही कर रहे क्वारेंटाइन

मजदूरों की वापसी के मद्देनजर भोपाल से आए निर्देश पर 15 मार्च से ही गांव में अलर्ट जारी कर दिया गया था। इसके बाद से ही लौटने वाले लोगों को होम क्वॉरेंटाइन किया जा रहा है नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में उनकी जांच भी कराई जा रही है। फिलहाल एक भी केस ऐसा नहीं निकला है जो बाहर से आकर यहां पॉजिटिव निकला हो। इसकी एक वजह यह भी है कि इस बार लोग बस, रेल में सुरक्षा इंतजामों के साथ या फिर निजी स्तर पर वाहन की व्यवस्था कर कर वापस लौट रहे हैं। ऐसे में रास्ते में ज्यादा लोगों के संपर्क में आने जैसी स्थिति नहीं बन रही है। लोग लॉकडाउन के डर की वजह से पहले से ही व्यवस्था करके वापस लौट रहे हैं। ताकि पिछली साल की तरह पैदल आने के लिए परेशान न होना पड़े।

सूरत से लौटे 17 लोग, बोले- अब नहीं जाएंगे, इंदौर से लौटे लोग बोले- कोरोना के डर से वापस आए

सीहोरा गांव में सूरत से 17 लोग लौटे हैं। दीपक प्रजापति ने बताया हम लोग हीरा कारोबारी के यहां काम करते थे। अब लॉकडाउन भी लगने लगा है। ग्राम बोबई में लौटे ललन सिंह ने बताया इंदौर में टेंट का काम करते थे। हरिद्वार टेंट लगाने जाना था, कोरोना के बढ़ते हुए मामलों के कारण मैं वापस लौट आया। अन्य लोग भी वापस लौटे हैं। हड़ली से रोहित विश्वकर्मा भी मजदूरी के लिए वापस गए थे जो लौट आए।

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