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  • 4 Dead In Sagar And One Infected In Khargone: No Oxygen For Three Days At Bundelkhand Medical College

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कोरोना सांसों पर भारी और अस्पतालों में ऑक्सीजन बंद:सागर में 4 और खरगोन में एक संक्रमित की मौत: बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में तीन दिन से ऑक्सीजन नहीं

सागर/खरगोन12 दिन पहले
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आईसीयू में प्रेशर बढ़ाने के लिए बच्चों के एनआईसीयू की सप्लाई बंद की, उन्हें सिलेंडर के साथ दूसरी जगह शिफ्ट किया गया। - Dainik Bhaskar
आईसीयू में प्रेशर बढ़ाने के लिए बच्चों के एनआईसीयू की सप्लाई बंद की, उन्हें सिलेंडर के साथ दूसरी जगह शिफ्ट किया गया।
  • जान बचाने वाले अस्पतालों में हो रही हैं दर्दनाक मौतें
  • जंबो सिलेंडर से चला रहे थे काम, प्रेशर कम हुआ तो तड़पने लगे मरीज

ऑक्सीजन नहीं मिलने से बीते 24 घंटे में दो शहरों में पांच मरीजों की मौत हो गई। पहली घटना सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज की है। यहां आईसीयू में चार कोविड मरीज भर्ती थे। अस्पताल में 3 दिन से ऑक्सीजन नहीं थी। जंबो सिलेंडर से सेंट्रल लाइन में सप्लाई हो रही थी। मंगलवार देर रात लाइन में ऑक्सीजन प्रेशर कम होने लगा और इससे सुबह प्लांट की इमरजेंसी लाइन में आग लग गई। लाइन को सुधारने और आईसीयू में सप्लाई प्रेशर बराबर रखने के लिए नॉन कोविड वार्डाें और शिशु रोग विभाग के एनआईसीयू की सप्लाई बंद कर दी गई, लेकिन तब तक चार मरीजों की मौत हो चुकी थी।

एनआईसीयू में भर्ती नवजात बच्चों को ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ दूसरे वार्डाें में शिफ्ट किया गया। हालांकि बीएमसी के डीन डॉ. आर एस वर्मा का कहना है कि जिनकी मौत हुई, उनकी हालत बहुत गंभीर थी। ऑक्सीजन की कमी से किसी की मौत नहीं हुई है। दूसरी घटना खरगोन जिला अस्पताल में हुई। यहां कोविड वार्ड में भर्ती मरीज रामेश्वर सेन की बुधवार सुबह मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि मंगलवार रात ऑक्सीजन खत्म हो गई थी। इंदौर से 100 सिलेंडर मंगाए गए, लेकिन तब तक रामेश्वर की हालत बिगड़ गई थी और सुबह उन्हें बचाया न जा सका।

पत्नी का ऑक्सीजन मास्क दूसरे मरीज को लगा दिया

भास्कर लाइव; बीएमसी में भर्ती भास्कर के फोटोजर्नलिस्ट मनुज नामदेव की आपबीती

पत्नी का ऑक्सीजन मास्क दूसरे मरीज को लगा दिया

मैं चार दिन से सागर के बीएमसी में ऑक्सीजन सपोर्ट पर हूं। कल रात पत्नी को भी ऑक्सीजन लगा दी गई। देर रात अचानक ऑक्सीजन का प्रेशर कम होने लगा। मुझे लगा जल्द सब ठीक हो जाएगा, लेकिन थोड़ी ही देर बाद दूसरे वार्डों से दो-तीन गंभीर मरीजों की शिफ्टिंग करने लगे। लापरवाही का आलम यह था कि पत्नी का ऑक्सीजन मास्क निकालकर दूसरे पॉजिटिव मरीजों को लगा दिया। पत्नी को सांस लेने में समस्या हुई। मैं चिल्लाया तब जाकर स्टाफ ने उन्हें दूसरा मास्क दिया। पिछले तीन दिन से बीएमसी लगातार मरीजों को एक वार्ड से दूसरे में शिफ्ट करने का खेल चल रहा है। हम दोनों को वार्ड 13 से 8 में शिफ्ट किया है। यहां 11 नंबर पलंग पर एक महिला जिंदगी और मौत के बीच सांसें गिन रही है, लेकिन उसे आईसीयू में शिफ्ट नहीं किया जा रहा।

बीएमसी में मरीज ज्यादा, ऑक्सीजन स्टॉक सिर्फ 6 दिन का.... बीएमसी में ऑक्सीजन सप्लाई के लिए सेंट्रल ऑक्सीजन प्लांट और कैप्सूल आकार का ऑक्सीजन टैंकर है। यह टैंकर 13 हजार किलोलीटर का है। इसमें एक बार में 1430 जम्बो सिलेंडरों के बराबर ऑक्सीजन भरी जाती है यानी 11,440 क्यूबिक मीटर गैस। आईसीयू में भर्ती कोरोना मरीज को एक मिनट में 17 लीटर ऑक्सीजन चाहिए।

एक घंटे में लगभग एक हजार लीटर यानी एक क्यूबिक मीटर। 24 घंटे में 24 क्यूबिक मीटर गैस दी जाती है। वर्तमान स्थिति में आईसीयू और आईसोलेशन को मिलाकर ऐसे यहां 50 मरीज भर्ती हैं। यानी एक दिन में करीब 1200 क्यूबिक मीटर गैस की जरूरत तो सिर्फ इन्हीं काे है। इसके अलावा एचडीयू के मरीजों को भी एक मिनट में 7 लीटर ऑक्सीजन चाहिए यानी एक दिन में 10 क्यूबिक मीटर। ऐसे यहां 15 से अधिक मरीज हैं। इसके अलावा बीएमसी के एसएनसीयू, पीआईसीयू, नॉन कोविड आईसीयू, ओटी और अन्य वार्डों को मिलाकर करीब 2000 क्यूबिक मीटर गैस प्रतिदिन खर्च हो रही है। जबकि पहले यह आंकड़ा 500 क्यूबिक मीटर गैस प्रतिदिन का था। इस तरह आज की स्थिति में 11440 क्यूबिक मीटर गैस का यह टैंक छह दिन के लिए भी पर्याप्त नहीं है।

महामारी से भी ज्यादा जानलेवा ये सिस्टम, अब समीक्षा-जांच की रस्म

(भास्कर हस्तक्षेप राजेंद्र दुबे, संपादक)

शहर में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच एक-एक सांस के लिए संघर्ष और मुश्किल हो गया है, क्योंकि जो लोग पॉजिटिव आए वे इस उम्मीद से बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुए कि उन्हें यहां अच्छा इलाज मिलेगा। बीएमसी प्रबंधन, जिम्मेदार अफसर और डॉक्टरों के सहयोग से वे कोरोना के खिलाफ जंग जीतकर फिर अपने घर लौट सकेंगे लेकिन बीएमसी के कुप्रबंधन की वजह से कोविड अस्पताल में मौत तांडव कर रही है। सांसों के लिए तड़प रहे मरीजों को वर्ल्ड हेल्थ डे पर ऑक्सीजन तक मुहैया नहीं कराई गई, यह गंभीर लापरवाही है। अब बीएमसी प्रबंधन इन मौतों की वजह छिपाकर अपनी खामियों पर पर्दा डाल रहा है। जिन मरीजों को सांस लेने में तकलीफ है और जो कोरोना पॉजिटिव होने की वजह से फेफड़ों के संक्रमण से ग्रसित थे, वे अचानक हृदयघात से कैसे मर सकते हैं?

अब चार मरीजों की मौत के बाद जिम्मेदार अफसर बीएमसी पहुंचे तो केवल समीक्षा और जांच की रस्म अदा करने। इस हादसे के बाद की पूरी स्क्रिप्ट कुछ ही घंटों में लिख ली। बस एक-दो सप्ताह का वक्त बीतने का इंतजार है। इसके बाद वही होगा, जो बाकी लापरवाही के बाद किया गया यानी जांच रिपोर्ट फाइलों के नीचे दबा दी जाएगी। पहली बार सागर जिले से प्रदेश सरकार में तीन मंत्री हैं, लेकिन दो दमोह चुनाव में व्यस्त है और एक खुद कोरोना पॉजिटिव होने से भोपाल में भर्ती हैं। फिर भी उनसे अपील है कि आप पर जनता की जिम्मेदारी है, उठिए...बीएमसी के जिम्मेदारों से सवाल कीजिए, आपदा के इस दौर में लोगों को मौत के मुहाने से बचाइए, ताकि आपका नाम तमाशा देखने वालों में शामिल न हों।

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