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भास्कर एक्सपोज:5 वेंटिलेटर चालू; 67 धूल खा रहे, नतीजा- 36 दिन में 158 मौतें, इन्हें वेंटिलेटर मिलते तो बच सकती थी जान

सागरएक महीने पहलेलेखक: श्रीकांत त्रिपाठी
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  • कोरोना फेफड़ों को खा रहा और बीएमसी की घोर लापरवाही इंसानों को
  • प्रबंधन की दलील : वेंटिलेटर लगाने के बाद निगरानी के लिए विशेषज्ञ चाहिए, जो अब तक नहीं मिले

यह बात हैरान करने वाली है। एक बार इस आंकड़े पर गौर करिए। बुंदेलखंड मेडिकल काॅलेज में सिर्फ अप्रैल माह में 105 काेरोना संक्रमित मरीजों की मौत हुई है। मई के एक सप्ताह में 53 ने दम तोड़ा। 7 अप्रैल को 5 मरीजों की मौत ऑक्सीजन न मिलने की वजह से हुई। अब नजर डालिए दूसरे पहलू पर।

यहां 72 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं लेकिन इनमें से सिर्फ 5 वेंटिलेटर का कोविड आईसीयू में इस्तेमाल हो रहा है। बाकी स्टोर रूम में धूल खा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर सपोर्ट न दिए जाने के कारण आए दिन उनकी जान जा रही है।

बीएमसी में कोरोना संदिग्ध मरीजों को मिलाकर हर दिन औसतन 15 मरीज इलाज के अभाव में दम तोड़ देते हैं लेकिन प्रबंधन ने अब तक डेथ ऑडिट भी नहीं कराया। जिम्मेदारों को इन मौतों से कोई फर्क नहीं पड़ता।

न तो अब तक प्रबंधन ने मौतों का कारण जानने के लिए डेथ ऑडिट कराया और न ही मरीजों के इलाज में हो रही इस कमी की वजह जानने की कोशिश की। बीएमसी में काेविड आईसीयू में 64 बिस्तर, हाई डिपेंडेंसी यूनिट में 200 व काेविड आइसोलेशन में 236 पलंग आरक्षित हैं। यहां 400 से अधिक बिस्तरों पर ऑक्सीजन सप्लाई दी जा रही है। गंभीर मरीजाें के इलाज के लिए आईसीयू में 44 छाेटे और 28 बड़े वेंटिलेटर मौजूद हैं। लेकिन 500 बिस्तर के अस्पताल में सिर्फ 5 मरीजों को ही वेंटिलेटर की सुविधा मिल रही है। वह भी केवल कोविड आईसीयू में।

बीएमसी को केंद्र से मिले 44 वेंटिलेटर कमियां, 100 प्रतिशत ऑक्सीजन सप्लाई नहीं

वातावरण में 21 फीसदी ऑक्सीजन होती है। वहीं गहन चिकित्सा ईकाई में एफआईओ2 (फ्रेक्शन इंस्पिरेशन ऑफ ऑक्सीजन) 100 फीसदी देने की जरूरत होती है। लेकिन पीएम केयर के 44 वेंटिलेटर 100 प्रतिशत ऑक्सीजन नहीं दे पाते, ऐसे में इन्हें लगाने पर भी मरीज को फायदा नहीं होता।

वेंटिलेटर से फेफड़ों को आराम मिलता है

कोरोना संक्रमित मरीजों के फेफड़े 90 फीसदी तक खराब होने के बाद मरीज को वेंटिलेटर की आवश्यकता होती है। इससे न केवल फेंफड़ों का आराम मिलता है। बल्कि कई मामलों में फेफड़े रीजनरेट भी होने लगते हैं। मरीज को वेंटिलेटर लगाने के बाद क्लोज मॉनीटरिंग की आवश्यकता होती है। इसके लिए निश्चेतना, पल्मोनरी या मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों की जरूरत है। बीएमसी के पास जितने विशेषज्ञ हैं वे वार्डों की ड्यूटी में लगे हैं।

घटिया क्वालिटी के वेंटिलेटर लगाए

अक्टूबर माह में बीएमसी को 44 पीएम केयर वेंटीलेटर मिले थे। जो कि इतनी घटिया क्वालिटी के हैं कि इनके इस्तेमाल पर 28 दिसंबर को वेंटिलेटर में शॉर्ट सर्किट होने की घटना भी सामने आई थी। इसके बाद से डॉक्टर इसका इस्तेमाल करने से बचते हैं। वेंटिलेटर के इस्तेमाल को दिखाने के लिए बीएमसी प्रबंधन ने सभी 72 वेंटिलेटर अलग-अलग विभागों और वार्डों में आवंटित कर दिए हैं। दोनों कोविड आईसीयू में 15 से अधिक वेंटिलेटर रखे हुए हैं।

बीएमसी में वेंटिलेटर के लिए पर्याप्त नर्सिंग स्टाफ भी नहीं

मामले को लेकर जब भास्कर टीम ने वार्ड में ड्यूटी कर रहे डॉक्टरों से बात की तो उनका कहना था कि वेंटिलेटर लगाने के बाद मरीज की मॉनीटरिंग के लिए अलग से डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ की जरूरत होती है। जो 24 घंटे की रीडिंग और ऑक्सीजन सेचुरेशन आदि की रीडिंग ले सके। लेकिन फिलहाल स्थिति यह है कि वार्डों में ड्यूटी के लिए स्टाफ के लाले पड़े हैं।

मेडिकल कॉलेज को नहीं मिल रहे विशेषज्ञ
सीधी बात : डॉ. आरएस वर्मा, डीन बीएमसी

  • बीएमसी में 72 वेंटिलेटर हैं, इस्तेमाल क्यों नहीं?
  • वेंटिलेटर के इस्तेमाल के लिए तकनीकी स्टाफ की आवश्यकता होती है, विशेषज्ञ डॉक्टर ही नहीं मिल रहे।
  • किन विभागों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की जरूरत है?
  • पल्मोनरी, निश्चेतना और मेडिसिन विभाग में करीब 15 पद स्वीकृत हुए हैं। नियुक्ति के लिए खुला आमंत्रण है। अब तक एक भी आवेदन नहीं आया।
  • एनएचएम द्वारा स्वीकृत अन्य पदों की क्या स्थिति है?
  • एनएचएम द्वारा स्टाफ नर्स, लैब तकनीशियन, वार्ड बॉय और स्वीपर आदि के जितने भी पद स्वीकृत हुए थे, सभी पर नियुक्ति कर ली गई है। कमी सिर्फ विशेषज्ञ डॉक्टरों की है।

जल्द व्यवस्था शुरू कराएंगे

​​​​​​​यह विषय मेरे संज्ञान में है। इसके संबंध में प्रबंधन से चर्चा कर करूंगा। यह व्यवस्था जल्द शुरू होगी।
- गोपाल भार्गव, जिला कोविड प्रभारी

कमिश्नर से बात करूंगा

मेरे संज्ञान में अभी तक यह बात नहीं थी। मैं कमिश्नर और डीन से इस संबंध में बात करूंगा। जल्दी से जल्दी इन्हें चालू करवाने का प्रयास करुंगा।
- गोविंद सिंह राजपूत, राजस्व मंत्री

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