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कोरोना इफैक्ट / अक्षय तृतीया पर सात फेरे नहीं ले सके लोगों के लिए सीजन का अंतिम मौका, भड़ली नवमीं पर भी अबूझ मुहूर्त

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  • लॉकडाउन के चलते नहीं मिल सकी थी विवाह की अनुमति, अब अधिकतम 50 लोग हो सकेंगे शामिल

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

सागर. लॉकडाउन के कारण कई जोड़े विवाह बंधन में नहीं बंध पाए। जो कुछ विवाह हुए भी वह भी प्रशासन से अनुमति लेने के बाद महज 10-10 परिजनों की मौजूदगी में। लॉकडाउन खुलने की सुगबुगाहट के बीच मई और जून में बचे विवाह मुहूर्त को लेकर लोग अपने-अपने पंडितों को फोन करने लगे हैं। 
हालांकि सबसे ज्यादा उन वर-वधु के परिजन परेशान हैं, जिनकी कुंडली में विवाह के लिए शुभ मुहूर्त एक साल तक नहीं हैं। इसलिए वे 29 जून को भड़रिया नवमी के अबूझ मुहूर्त में शादी करना चाहते हैंं। अक्षय तृतीया पर लॉकडाउन की बंदिशों के चलते विवाह नहीं कर सके लोगों के लिए यह सीजन का अंतिम अक्षय मुहूर्त भी है। हालांकि इन सबके बाद भी लोगों के मन में कई तरह के सवाल हैं। यदि लॉकडाउन खुल जाता है तो कितने लोग विवाह में शामिल हो सकेंगे। हालांकि नई गाइडलाइन में भी यही कहा गया है कि अधिकतम 50 लोग इसमें हिस्सा ले सकेंगे। 
लोगों के मन में दूसरा सवाल यह भी है कि क्या मांगलिक कार्यक्रमों को सीमित कर विवाह विधि-विधान से किया जा सकता है? इसको लेकर पंडितों का कहना है कि हालात और परिस्थितियों को देखते हुए सीमित समय और सीमित संसाधनों में भी विवाह की सभी रस्में निभाई जा सकती हैं।
लॉकडाउन ने बढ़ा रखी है परिवारों की बेचैनी
अबूझ मुहूर्त है, इसलिए विवाह के बारे में विचार
लड़के-लड़की की कुंडली के मिलान में ही मुहूर्त निकलता है, लेकिन अबूझ मुहूर्त में ऐसी परेशानी नहीं होती है। इसलिए लोग 29 जून के बारे में सोचने लगे हैं। 15 मई के बाद और 30 जून तक करीब 14 दिन मुहूर्त हैं और इसके बाद 25 नवंबर से शादियां शुरू होंगी।
पांच माह बाद एकादशी से ही बजेंगी शहनाई 
देवउठनी एकादशी का दिन भी विशेष रूप से विवाह के लिए मंगलकारी है। इस दिन चतुर्मास के बाद भगवान विष्णु निंद्रा से जागते हैं, इसलिए यह तिथि अबूझ मुहूर्त मानी जाती है। इससे पहले मांगलिक कार्यों के आयोजन लगभग बंद होते हैं। इसी दिन से शुभ कार्यों के बंद दरवाजे खुलते हैं। 2020 में देवउठनी एकादशी की शुभ तिथि 25 नवंबर को है।
एक दिन में भी हो सकती हैं विवाह की सब रस्मे
पंडित रामगोविंद शास्त्री के मुताबिक लड़के और लड़की पक्ष के माता-पिता भाई-बहन इसमें शामिल हो जाएं। एक ही पंडित से दोनों घरों में विवाह का विधान कराया जा सकता है। कार्यक्रम को दो-तीन दिन की जगह सिर्फ एक दिन में ही किया जा सकता है। भोजन प्रसादी दोनों ही अपने अपने घरों में करें। 
पंडित केशव महाराज के मुताबिक हल्दी-तेल और कुल देवता की पूजा दिन में कर लें। शाम को मुहूर्त में फेरे कर शादी की रस्में संपन्न कर लें। दूल्हा सिर्फ पंडित के साथ मंदिर के पट पर माथा टेककर भी रस्में पूरी कर सकता है।

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