पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Sagar
  • Akshaya Tritiya Will Not Have Mass Wedding In Abuja Muhurta, 3 Thousand Couples Used To Take Turns

घरों में भी सख्ती:अक्षय तृतीया के अबूझ मुहूर्त में नहीं होंगे सामूहिक विवाह, 3 हजार जोड़े लेते थे फेरे

सागरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • कोरोना कर्फ्यू के चलते 10 लोगों की मौजूदगी में हो रहे हैं विवाह

अक्षय तृतीया के अबूझ मुहूर्त में इस बार 14 मई को विवाह तो होंगे, पर बहुत ही कम संख्या में। इसकी मुख्य वजह है कोरोना संक्रमण और कोरोना कर्फ्यू। दरअसल, जिले भर में अक्षय तृतीया पर सामूहिक विवाह सम्मेलन होते थे। मंत्री और विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में अपने अपने स्तर पर विवाह सम्मेलन कराते हैं। तो शासन के साथ ही विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठन भी सामूहिक विवाह सम्मेलन के आयोजन करते हैं।

इन सभी में शासन द्वारा निर्धारित उपहार सामग्री तो मिलती ही है इसके साथ ही आयोजकों द्वारा भी अपनी तरफ से वर वधु को उपहार भेंट किए जाते थे। जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग इन सामूहिक विवाह सम्मेलन में ही अपने बेटा बेटी का विवाह कराते हैं। इतना ही नहीं लोग इन सम्मेलनों के लिए महीनों पहले से ही अपनी तैयारी भी कर लेते हैं।

परंतु इस बार ऐसा नहीं हो सकेगा। ऐसे में अक्षय तृतीया के अबूझ मुहूर्त में जिले में होने वाले करीब 3000 सामूहिक विवाह नहीं होंगे। इस बार विवाह और निकाह को लेकर सख्ती बरती जा रही है। महज 10 लोगों की मौजूदगी में ही विवाह करने की अनुमति दी जा रही है। ऐसे में लोग विवाह की तारीखों को आगे बढ़ा रहे हैं।
सम्मेलन न होने से गरीब वर्ग परेशान
प्रशासन ने शादियों में दोनों पक्षों से 50 लोगों को शामिल होने की अनुमति दी। बाद में इसे घटाकर 10 लोगों की सीमित संख्या कर अनुमति कर दी जा रहा। ऐसे में सामूहिक विवाह होना तो दूर की बात है। सामूहिक विवाह न होने से गरीब तबके के लोगों को परेशानी हो रही है। क्योंकि सामूहिक विवाह में वे बहुत कम में अपनी बेटी के हाथ पीले कर देते थे। बदले में उपहार भी मिल जाते थे।

परशुराम प्राकट्योत्सव और ईद पड़ सकती है एक साथ
इस साल अक्षय तृतीया का पर्व 14 मई को है और इस दिन कई शुभ योग बन रहे हैं, जिससे इस तिथि का महत्व और अधिक हो गया है। पंडित रामगोविंद शास्त्री के मुताबिक धार्मिक दृष्टिकोण से भी अक्षय तृतीया को बेहद खास माना गया है। वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया के रूप में मनाया जाता है। कई जगहों पर इसे अखा तीज के नाम से भी जाना जाता है।

ऐसा माना जाता है कि अक्षय तृतीया का दिन बेहद शुभ और पुण्य देने के साथ ही सौभाग्य और संपन्नता प्रदान करने वाला होता है।वही इसी दिन भगवान परशुराम जी का प्राकट्योत्सव भी है जो विप्रसमाज घरों में रहकर ही मनाएगा। पंडित शिवप्रसाद तिवारी ने बताया इसी दिन मुस्लिम समाज का प्रमुख त्योहार ईदुल फितर भी है। ऐसे में गंगा जमुनी संस्कृति का संगम अक्षय तृतीया पर देखने को मिलेगा। सभी अपनी परंपरा निभाते हुए घर मे ही ईश्वर से महामारी से मुक्ति की प्रार्थना करेंगे।

खबरें और भी हैं...