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  • BMC Report On Deaths, Time Of Treatment Not Found, Reality 30 Patients Died After 3 Days Of Treatment

कोरोना मरीजों के डेथ ऑडिट से खुलासा:मौतों पर बीएमसी रिपोर्ट, इलाज का समय नहीं मिला, हकीकत- 3 दिन इलाज के बाद 30 मरीजों की मौत

सागर12 दिन पहले
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  • मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ रहे कोरोना मरीजों के डेथ ऑडिट से खुलासा
  • सरकार को गलत रिपोर्ट भेजकर खुद को बचा रहे जिम्मेदार

(श्रीकांत त्रिपाठी) जिले में अब तक 84 कोरोना पॉजिटिव मरीजों की मौत हो चुकी है। इनमें से 51 मरीजों ने बीएमसी में दम तोड़ा। इन सभी मौतों के जवाब में बीएमसी हर बार शासन को यह बताकर बच जाता है कि उन्हें मरीजों का इलाज करने का समय ही नहीं मिला लेकिन जब दैनिक भास्कर टीम ने एक-एक मौत की ऑडिट रिपोर्ट और तारीखों की पड़ताल की तो बीएमसी प्रबंधन का झूठ सामने आ गया।

पड़ताल में पता चला कि अब तक हुईं 51 मौतों में से 17 महिलाएं और 34 पुरुष थे। इनमें से 60 फीसदी मौत के मामलों में प्रबंधन के पास 3 से 10 दिन तक समय था, जबकि 40 फीसदी मौतें 24 घंटे के भीतर हुईं। इस स्थिति से साफ तौर पर जाहिर है कि कहीं न कहीं प्रबंधन से दवाओं और डॉक्टरों के मामले में भारी चूक हो रही है लेकिन अफसर व्यवस्थाएं सुधारने की जगह लीपापोती करने में लगे हैं। यदि आईसीयू की व्यवस्थाओं को गंभीरता से लेते तो बच सकती थी 30 मरीजों की जान बीएमसी में अब तक हुईं 51 मौत के मामले में 21 मरीजों को बचाने के लिए डॉक्टरों के पास 24 घंटे का भी समय नहीं था। लेकिन जब बाकी 30 मौतों की बात करें तो 15 मरीज 3 से 5 दिन, 9 मरीज 6 से 9 दिन और 6 मरीज इलाज के लिए 10 से भी अधिक दिन बीएमसी में भर्ती रहे। लेकिन बीएमसी के डॉक्टर इन्हें बचाने में नाकाम रहे। यदि समय रहते आईसीयू की व्यवस्थाओ‌ं में सुधार किया जाता तो इन मरीजों की जान बच सकती थी।

बीएमसी प्रबंधन की 3 बड़ी लापरवाही

  • एक माह से नहीं मरीजों की जान बचाने वाला इंजेक्शन

कोरोना संक्रमण के कारण पहले मरीज के फेफड़े संक्रमित होते हैं और फिर खून में थक्का बनने लगता है। शरीर में खून के थक्के न बने इसके लिए मॉलिकुलर वेट हेपरिन का इंजेक्शन लगाया जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि पिछले एक माह से यह इंजेक्शन बीएमसी में नहीं है।

  • ड्यूटी रोस्टर में चहेतों को कोविड वार्डों में नहीं भेजा

बीएमसी में इन दिनों ड्यूटी रोस्टर को लेकर भारी विवाद चल रहा है। एक खेमा वह है जो पिछले 6 माह से लगातार कोविड वार्डों में ड्यूटी कर रहा है और दूसरा खेमा अफसरों के चहेतों का है। जिन्हें यह कहकर ड्यूटी से बचाया जा रहा है कि वे दूसरे विभाग के डॉक्टर हैं।

  • मरीजों की शिफ्टिंग में हो रही देरी से भी बढ़ी मौतें

मौतों की तीसरी और सबसे अहम वजह है कि मरीजों की शिफ्टिंग में हो रही लेटलतीफी। मरीज के पॉजिटिव आने के बाद भी गंभीर अवस्था में उसे सारी वार्ड में एक से दो दिन तक आईसीयू में पलंग खाली होने का इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं जिसके चलते मरीजों का इलाज समय पर शुरू ही नहीं हो पाता।

इंजेक्शन खरीद लिए हैं
इंजेक्शन की खरीदी कर ली गई है। वहीं कुछ इंजेक्शन आईसीयू में भेजे जा चुके हैं। ड्यूटी रोस्टर को लेकर फेरबदल किया जा रहा है।
- डॉ. राजेश जैन, अधीक्षक बीएमसी

गंभीर मरीजों के लिए बीएमसी में 30 बेड का एक और आईसीयू आज से शुरू

कोरोना पॉजिटिव गंभीर मरीजों के लिए बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में 1 और आईसीयू शुरू हो जाएगा। बुधवार को बीएमसी डीन डॉ. जीएस पटेल ने निर्माण स्थल का जायजा लिया। यहां मौके पर मौजूद मेडिसिन विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ. रमेश पांडे और पीडब्ल्यूडी विभाग के इंजीनियर को गुरुवार से आईसीयू शुरू करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान सेंट्रल ऑक्सीजन की व्यवस्था और बेड क्षमता दिखी। उन्होंने छोटे बचे हुए काम को जल्द से जल्द निपटाने की बात कही। आईसीयू में 30 पलंग की व्यवस्था की जा रही है। यह आईसीयू हड्डी विभाग के 14 नंबर वार्ड में बनाया जा रहा है। 90 फीसदी काम पूरा हो गया है। गुरुवार से यह आईसीयू शुरू हो जाएगा। मेडिकल कॉलेज में अब 60 गंभीर कोरोना संक्रमित गंभीर मरीजों को भर्ती किया जा सकेगा। गौरतलब है कि बीएमसी में अभी कोरोना पॉजिटिव गंभीर मरीजों के लिए सिर्फ एक आईसीयू है। जिसमें मात्र 30 पलंग है। जबकि यहां पर 32 मरीजों को भर्ती किया गया है।

प्रोफेसर व कैंट टीआई सहित 32 पॉजिटिव

जिले में संक्रमितों की संख्या 1750 पर, पॉजिटिव में 10 युवा वर्ग के मरीज बुधवार को 32 नए पॉजिटिव मरीज सामने आए हैं। इनमें डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और कैंट थाना प्रभारी सहित ग्रामीण इलाकों के लोग शामिल है। इसके साथ ही जिले में संक्रमितों का आंकड़ा 1750 पर पहुंच गया है। रिपोर्ट के अनुसार गौरनगर विश्वविद्यालय कैंपस निवासी 56 वर्षीय प्रोफेसर की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। वर्तमान में वह कानपुर में है।

डॉक्टर उन्हें कानपुर में ही संक्रमण होने की संभावना जता रहे हैं। इसके अलावा कैंट थाने में पदस्थ 59 वर्षीय थाना प्रभारी भी पॉजिटिव पाए गए हैं। डॉक्टर उन्हें ड्यूटी के दौरान संक्रमण होने की संभावनाएं जता रहे हैं। नए पॉजिटिव में युवा वर्ग के 10 मरीज शामिल है। जबकि 22 मरीज 40 और इससे ज्यादा उम्र के हैं। पॉजिटिव में शहरी क्षेत्र के 14 तथा ग्रामीण अंचलों के 18 मरीज हैं। जिले के ग्रामीण अंचलों में मिले 18 नए पॉजिटिव पॉजिटिवों में ग्रामीण क्षेत्र के 18 लोग हैं। इनमें गौरझामर, खिमलासा, देवरी, केसली, बीना, खुरई और रहली के मरीज शामिल हैं।

कोविड-19 के बाद अब नॉन कोविड अस्पताल व कैजुअल्टी के वार्ड भी फुल

तेजी से फैल रहे कोरोना वायरस संक्रमण ने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज का मैनेजमेंट बिगाड़ दिया है। हालत यह है कि कोविड-19 अस्पताल के बाद अब नॉन कोविड अस्पताल और कैजुअल्टी के वार्ड भी फुल हो गए हैं। मरीजों को भर्ती करने के लिए अस्पताल में जगह नहीं बची है। प्रबंधन फ्लोर बेड लगाकर मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था करने की बात कह रहा है। कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के बाद जिला प्रशासन ने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में नॉन कोविड अस्पताल बंद कर दिया था। यहां सिर्फ कोविड मरीजों का इलाज चल रहा था। जुलाई में प्रबंधन ने यहां कोविड के अलावा नॉन कोविड अस्पताल की भी शुरुआत कर दी। लिहाजा कैजुअल्टी तथा अन्य विभागों में ओपीडी शुरू की गई। सितंबर माह में कोरोना वायरस पीड़ितों के अलावा सामान्य रोगों के मरीज भी तेजी से बढ़े। लिहाजा दोनों स्तर के अस्पताल में वार्ड फुल हो गए हैं। यही नहीं कैजुअल्टी वार्डों में भी मरीजों को भर्ती करने के लिए जगह नहीं बची है। मंगलवार की रात कैजुअल्टी वार्ड फुल हो गया था। इसके बाद आनन-फानन में रात में ही मरीजों को वार्डों में शिफ्ट करना पड़ा। लिहाजा नॉन कोविड मरीजों के लिए खोले गए 7 वार्ड भी फुल हो गए।

हम फ्लोर बेड लगाकर मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था बनाएंगे
यह बात सही है कि कोविड के बाद नॉन कोविड अस्पताल के वार्ड भी पूरी तरह भर गए हैं। मरीजों को भर्ती करने के लिए फ्लोर बेड लगाए जाएंगे। इसके अलावा मैंने व्यवस्थाएं बनाए रखने के लिए डीन डॉ. जीएस पटेल को मेडिसिन विभाग की सामान्य ओपीडी को फिलहाल स्थगित करने का सुझाव दिया है। जल्द ही इस संबंध में निर्णय हो जाएगा। इसके बाद व्यवस्थाएं सुचारू चलने लगेंगी।
- डॉ. राजेश जैन, अधीक्षक बीएमसी सागर

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