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बैजंती स्कूल की पढ़ाई भी फिर शुरू करेगी:डॉक्टरों की मेहनत रंग लाई, 5 साल बाद बैजंती ने मुंह से निगला निवाला

सागर16 दिन पहले
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नर्स बैजंती को गले से जूस पिलाती हुई। अब बैजंती खुद खाना खा लेती है। - Dainik Bhaskar
नर्स बैजंती को गले से जूस पिलाती हुई। अब बैजंती खुद खाना खा लेती है।
  • घर में खाना बनाते समय झुलसा था चेहरा, गले के पास एक छेद से सांस और लिक्विड डाइट लेती थी बैजंती

बंडा के पाटन गांव में रहने वाली 17 साल की बैजंती रावत को अब किसी से चेहरा छुपाने की जरूरत नहीं रही। अब वह अपने मुंह से निवाला खाकर खाने का स्वाद भी लेती है। इतना ही नहीं डॉक्टरों के दो और ऑपरेशन के बाद जल्द ही बैजंती स्कूल की पढ़ाई भी फिर शुरू करेगी।

यह सब नतीजा है डॉक्टरों की कड़ी मेहनत और बैजंती की इच्छा शक्ति का। गौरतलब है कि 12 साल की उम्र में बैजंती चूल्हे पर खाना बनाते समय बुरी तरह झुलस गई थी। इस हादसे में उसका चेहरा, छाती और हाथ जल गए। जैसे-तैसे बैजंती की जान तो बच गई, लेकिन इस हादसे में उसके नाक और मुंह के छिद्र बंद हो गए। जली हुई चमड़ी से चेहरा छाती तक ढक गया। लेकिन गले के पास एक छेद बचा रह गया। जिससे बैजंती 5 साल तक सांस और लिक्विड डाइट लेती रही। इतने कष्ट के बाद भी बैजंती को आस थी कि वह एक दिन फिर से ठीक होकर मुंह से खाना खा सकेगी। बैजंती की सर्जरी के लिए 12 लाख रुपए का खर्च होने के कारण उसके मजदूर पिता ऑपरेशन कराने में असमर्थ थे।

स्कूल जाने की जल्दबाजी में हुआ था हादसा, परिवार में सबसे बड़ी हैं बैजंती
बैजंती के पिता कल्लू पेशे से मजदूर हैं। परिवार में तीन भाई और तीन बहनें हैं। बैजंती सबसे बड़ी है। पिता कल्लू ने बताया कि वह आठवीं कक्षा में थी। परिवार में सबसे बड़े होने के कारण उसे खाना बनाकर स्कूल जाना पड़ता था। उस दिन रविवार था, स्कूल में शिक्षकों ने स्लेबस पूरा करने के लिए अतिरिक्त कक्षा रखी थी। सुबह 9 बजे स्कूल पहुंचना था, लेकिन घर में खाना बनाने की जिम्मेदारी भी थी। इसलिए चूल्हे की आग बढ़ाई और इसी दौरान उसका मुंह आग की चपेट में आ गया। आनन-फानन में परिवार के सदस्यों ने आग बुझाई ।

कॉस्मेटिक करेक्शन के बाद पहले की तरह दिखेगी बैजंती
आग में बुरी तरह झुलसने के कारण बैजंती का मुंह, नाक और चेहरा छाती से चिपक गया था। वह गले के पास एक छिद्र से सांस और लिक्विड डाइट लेती थी। ऑपरेशन के दौरान हमने सबसे पहले उसमें फंगस्नल करेक्शन किए हैं। ताकि वह सामान्य रुप से भोजन कर सके और सांस ले सके। अब आगे के चरण में मरीज के हाथ और कंधे की विकृतियों को सर्जरी कर दूर किया जाएगा। इसके बाद कॉस्मेटिक करेक्शन कर उसे पहले की तरह सामान्य बनाने की कोशिश की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया में अभी एक से डेढ़ साल का समय लग सकता है।
- डॉ. मनीष राय, एमसीएच प्लास्टिक सर्जन, डॉ. राय हॉस्पिटल

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