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  • Elderly School Driver Created Book Bank, Providing Books From One To Others, Has Helped 250 Students

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अच्छी पहल:बुजुर्ग स्कूल ड्राइवर ने बनाया बुक बैंक, एक से लेकर दूसरों को उपलब्ध करा रहे किताबें, 250 छात्रों की मदद कर चुके

सागर4 दिन पहले
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  • लॉकडाउन में नहीं खुले स्कूल तो बच्चों की किताबें नई रखीं हैं, इसलिए छात्र कर सकते हैं अदला-बदली

नमकमंडी निवासी 74 साल के राजकुमार भैय्यन जैन जरूरतमंद विद्यार्थियों को निशुल्क किताबें उपलब्ध करवा रहे हैं। वह विभिन्न विद्यार्थियों और अभिभावकों से संपर्क कर उनसे पूर्व की कक्षा की किताबें एकत्र करते हैं, इसके बाद उन्हें जरूरतमंद विद्यार्थियों को दे देते हैं। इस प्रकार इसी सत्र में अब तक वे 250 विद्यार्थियों की मदद कर चुके हैं। उनके घर में एक बुक बैंक भी तैयार हो गया है, जिसमें शहर की विभिन्न स्कूलों की किताबें रखी हुई हैं। इन्हीं को वे जरूरतमंद विद्यार्थियों को दे रहे हैं।

बुजुर्ग भैय्यन बताते हैं कि शहर के नामी स्कूलों में महंगी-महंगी किताबें विद्यार्थियों को खरीदनी पड़ती हैं। चूंकि मैं पहले स्कूल बस ही चलाया करता था, लिहाजा कई अभिभावकों को परेशान होते हुए मैंने देखा है। यहीं से मुझे सुझाव आया कि क्यों न पुरानी किताबों को दूसरे विद्यार्थियों को दे दिया जाए। क्योंकि बीते सत्र में कोरोना के चलते कक्षा लगी ही नहीं ऐसे में विद्यार्थियों की किताबें बिल्कुल नई की नहीं रखी हुई है इन्हीं किताबों को बेदू से विद्यार्थियों को देने का काम कर रहे हैं। इनसे अभिभावकों को 800 से लेकर 2500 रुपए तक की बचत हो रही है।

2000 जरूरतमंदों को कपड़े भी बांट चुके हैं

कई अभिभावक ऐसे भी होते हैं जो किताबें देने और लेने के समय यह कहते हैं कि उनका नाम सार्वजनिक न हो, इसका ध्यान भी मैं रख रहा हूं। मेरी सभी से यही अपील है कि अभी नया सत्र शुरु ही हुआ है लिहाजा जो अभिभावक पुरानी किताबें रखे हुए हैं, वह अभी ही उपलब्ध करा दें, जिससे जरूरतमंद विद्यार्थियों को वे समय से मिल सकें। कोई भी व्यक्ति मोबाइल नंबर- 7770947202 पर संपर्क कर निशुल्क किताबें ले और दे सकता है। बुजुर्ग भैय्यन जैन लोगों को कपड़े उपलब्ध करवा रहे हैं।

कोरोना काल में उन्होंने यह पहल तब शुरू की जब आर्थिक रूप से कमजोर लोग बेरोजगारी के चलते बुरी तरह से परेशान थे। अब वे लोगों को उनकी पसंद के कपड़े उपलब्ध करवाते हैं। दरअसल वो संपन्न लोगों से संपर्क कर उनसे कपड़े लेकर अपने घर आ जाते हैं। इसी से उन्होंने कपड़ा बैंक बना रखा है। वे मजदूर वर्ग एवं जरूरतमंद लोगों को अपने घर पर लेकर आते हैं और उन्हें उनके नाप के हिसाब से ही कपड़े देते हैं। इस दौरान वे लोगों से उनकी पसंद के कपड़े भी पूछ लेते हैं। इसके अलावा विभिन्न मंदिरों के बाहर भी वे कपड़े लेकर जाते हैं।

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