जांच रिपोर्ट:झील की जमीन पर 1.34 एकड़ में अतिक्रमण, एनजीटी का आदेश- कलेक्टर सीमांकन कराएं

सागर18 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • 2016-17 में भी रिपोर्ट बनी थी जिसमें तालाब पर 2.87 एकड़ जमीन पर बताया था कब्जा

तालाब में अतिक्रमण, ड्रेनेज का पानी तालाब में मिलने और तालाब का वर्तमान स्वरूप बदलने आदि बिंदुओं को लेकर (नेशनल ग्रीन ट्रब्यूनल) एनजीटी सेंट्रल जोन भोपाल बैंच में डॉ. जया ठाकुर ने याचिका दायर की है। जिस पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने कलेक्टर को निर्देश दिए हैं कि वे राजस्व, वेटलैंड अथॉरिटी और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एक प्रतिनिधि की एक कमेटी तैयार कर तालाब के पुराने रिकॉर्ड से उसका सीमांकन कराए और चिह्नित अतिक्रमणों की रिपोर्ट एनजीटी को सौंपे।

जिसके आधार पर तालाब का सीमांकन कराया गया था, जिसकी रिपोर्ट एनजीटी को सौंप दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार तालाब की जमीन पर 5447 स्क्वेयर मीटर (1.34 एकड़) कब्जा है। दिलचस्प बात यह है कि तात्कालीन कलेक्टर विकास नरवाल द्वारा कराए गए सीमांकन में तालाब की जमीन पर 2.89 एकड़ में अतिक्रमण पाया गया था, जो नई रिपोर्ट में घट गया है।

मामले की पैरवी कर रहे एडवोकेट वरूण ठाकुर ने बताया कि याचिकाकर्ता डॉ. ठाकुर की अपील पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने 23 जुलाई 2020 को जल निकाय पर अतिक्रमण के संबंध में कमेटी को रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। तालाब की सीमा न होने से अतिक्रमण की संभावनाएं हैं।

इसके लिए अतिक्रमण के वास्तविक क्षेत्र तक पहुंचने के लिए विस्तृत माप और बारीकी से सर्वेक्षण जरूरी है। तालाब क्षेत्र के चारों और आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां चल रही है। इन क्षेत्रों से बड़े छोटे नालों का पानी झील में छोड़ा जा रहा है। इसी के आधार पर कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक बड़े तालाब खसरा नंबर 435/1 में 35 अतिक्रमण कुल रकबा (4607 स्क्वेयर मीटर) मिला है, जबकि छोटे तालाब खसरा नंबर 437/2 में 1 अतिक्रमण 840 स्कवेयर मीटर पाया गया है।

3 साल से लिस्ट है फिर भी कार्रवाई नहीं

याचिकाकर्ता डॉ. ठाकुर ने बताया कि इस मामले में कुछ साल पहले किए गए सीमांकन के दौरान अतिक्रमण की सूची प्रशासन के पास मौजूद थी। फिर भी अधिकारियों द्वारा अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई नहीं की गई। मामले में संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाना चाहिए। इसको लेकर न्यायालय में भी पक्ष रखा जाएगा।

इन लोगों का है बड़े-छोटे तालाब में अतिक्रमण

तालाब के अंदर तक पक्के निर्माण हो चुके हैं। जिनकी रिपोर्ट बनने के बाद भी अफसर कार्रवाई करने से बच रहे हैं। दरअसल, तालाब की जमीन पर पूर्व सांसद लक्ष्मीनारायण यादव, आरएसएस कार्यालय समेत कुछ अन्य प्रभावशील लोगों ने अवैध निर्माण हैं। इसी के चलते अफसर भी इन लोगों पर हाथ डालने में कतरा रहे हैं।

खबरें और भी हैं...