हथकरघा दिवस:प्रत्येक घर के सभी सदस्य के पास हथकरघा के एक जोड़ी वस्त्र अवश्य होना चाहिए : सुदत्त सागर

सागर2 महीने पहले
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  • आचार्यश्री विद्यासागर जी ने सागर जेल में की थी केंद्र की शुरुआत

श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर सानोधा में वर्षाकालीन चातुर्मास कर रहे मुनिश्री सुदत्त सागर महाराज एवं छुल्लक चंद्रदत्त सागर महाराज की प्रेरणा से राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया गया। जैन समाज द्वारा रैली भी निकाली गई। बच्चों ने अपने हाथ से चरखा और स्लोगन बनाए। हिंदुस्तान का ताना-बाना हथकरघा को है अपनाना स्वदेशी लाओ, विदेशी हटाओ आदि नारों के साथ नवयुवक मंडल, महिला मंडल, बालिका मंडल सभी रैली में शामिल हुए।

मुनिश्री ने कहा प्रत्येक जैन परिवार में जैन धर्म की ध्वजा होना चाहिए और विदेशी परंपरा को हटाने से ही हमारा भारत सोने की चिड़िया कहलाएगा। छुल्लक चंद्रदत्त सागर ने कहा प्रत्येक घर के सभी सदस्य के पास हथकरघा के एक जोड़ी वस्त्र अवश्य होना चाहिए। आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के द्वारा 7 अगस्त 2015 को बीना बारह में शुरु किया गया हथकरघा को आगे बढ़ाना है। संचालन धर्मेंद्र जैन ने किया। मंच व्यवस्था सनत कुमार एवं अतुल ने संभाली।

जेल में 54 हैंडलूम मशीनों से बन रहे पेंट, शर्ट और रूमाल, कलेक्टर ने निरीक्षण कर चलाया चरखा

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर शनिवार को कलेक्टर दीपक सिंह ने केन्द्रीय जेल पहुंचकर हथकरघा केन्द्र का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि हथकरघा केंद्र व केंद्रीय जेल में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में किए जा रहे अन्य प्रयास सराहनीय हैं। यहां सुधार बंदी इस कौशल के माध्यम से न केवल आत्मनिर्भर बन रहे हैं बल्कि, सागर केंद्रीय जेल को देश में एक नई पहचान भी दिला रहे हैं।

केंद्रीय जेल स्थित हथकरघा केंद्र में करीब 54 हैंडलूम मशीनों के द्वारा विभिन्न प्रकार के वस्त्रों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें साड़ी, पेंट, शर्ट, रुमाल शामिल हैं। जेल प्रांगण में स्थित दुकान के माध्यम से इन्हें बेचा जाता है। खादी, ऑर्गेनिक रूई और देसी तरीके से ये कपड़े बनाए जा रहे हैं। इस दौरान कलेक्टर ने हथकरघा केंद्र पर चरखा चलाना भी सीखा। धागा बनाया और देखा कैसे बड़ी कुशलता से सुधार बंदी हथकरघा से विभिन्न वस्त्रों का निर्माण कर सागर जेल को संपूर्ण देश में एक नई पहचान दे रहे हैं।

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