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विवि:कर्मचारियों के बच्चों को प्रवेश देने में नियमों का बहाना, पीएचडी की दी मंजूरी

सागर13 दिन पहले
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डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय  (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय (फाइल फोटो)
  • रेग्युलर कुलपति के अभाव में विवि में मनमानी के आरोप

डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में रेग्युलर कुलपति नहीं होने के कारण कर्मचारी कोटे के तहत होने वाले उनके बच्चों के एडमिशन इस बार अटक कर रह गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। जबकि स्पेशल काउंसिलिंग हो चुकी है और स्पोर्ट्स कोटे के एडमिशन बुधवार को होना है।

दरअसल कर्मचारियों द्वारा उनके बच्चों को एडमिशन के लिए व्यक्तिगत तौर पर आवेदन प्रभारी कुलपति और कुलसचिव को दिए गए हैं। जिस पर कर्मचारियों से कहा गया है कि जब रेग्युलर कुलपति आएंगे तब ही इस पर निर्णय होगा। जबकि पूर्व के वर्षों में कर्मचारी कोटे के तहत उनके बच्चों को एडमिशन मिलते रहे हैं। वहीं जब पिछले दिनों विश्वविद्यालय के अफसरों और शिक्षकों को पीएचडी करने की अनुमति देने की बात आई तो प्रभारी कुलपति द्वारा तुरंत इसकी स्वीकृति दे दी गई। उसमें यह कहीं नहीं लिखा या कहा गया कि रेग्युलर कुलपति के आने के बाद यह मामला रखा जाए।

इसी प्रकार विश्वविद्यालय में इन दिनों जो कार्य हो रहे हैं, उनमें लगने वाले शिलालेखों पर प्रभारी शब्द न लिखकर सीधे कुलपति और कुलसचिव ही लिखा जा रहा है। आरटीआई एक्टिविस्ट अरविंद भट्ट का आरोप है कि यहां मनमानी चल रही है। इस संबंध में हम केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रपति को भी शिकायत कर रहे हैं। अभाविप के जिला संयोजक श्रीराम रिछारिया ने बताया कि विश्वविद्यालय में रेग्युलर कुलपति नहीं होने के चलते इन दिनों सब कुछ मनमानी से हो रहा है।

हम लगातार इसकी शिकायत कर रहे हैं। कर्मचारियों के बच्चों को एडमिशन में पूर्व की तरह राहत मिलना ही चाहिए। वर्तमान कार्यकाल की जांच के लिए अब सांसद के माध्यम से राष्ट्रपति को शिकायत भेजेंगे।

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