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घर वापसी:लंबे लॉकडाउन का डर; घर लौट रहे मजदूर, किसी का काम नहीं चला तो किसी को पेमेंट नहीं मिला

सागर8 महीने पहले
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  • इंदौर से छात्र और अन्य जिलों से ऑटो व बसों में भरकर फिर अपने घरों को आने लगे मजदूर
  • अन्य जिलों के मजदूरों को शहर में एंट्री नहीं मिली

लॉकडाउन लगते ही एक बार फिर मजदूरों का पलायन अपने घरों की ओर शुरू हो गया है। भोपाल, इंदौर में रहने वाले मजदूर पिछले दो दिन से लगातार लौट कर आ रहे हैं। अधिकांश के मन में लंबा लॉकडाउन लगने का डर है। दो दिन के लॉकडाउन के दौरान सागर से होकर गुजरने वाले अन्य जिलों के मजदूरों को शहर में एंट्री नहीं दी गई।

पुलिस जवानों ने उन्हें लेहदरा नाका तिराहे पर रोककर बायपास के रास्ते शहर के बाहर निकाला। सिर्फ शहरी क्षेत्र या जिले के ग्रामीण क्षेत्र के मजदूरों को ही एंट्री दी गई। सोमवार को लॉकडाउन खत्म होने से मजदूरों को निकलने के लिए सभी रास्ते खोल दिए गए। बसों से आने वाले मजदूरों की बस स्टैंड पर स्क्रीनिंग की जा रही है।

विदिशा साड़ी बेचने गया था, कर्फ्यू में पैसे खत्म हुए तो घर लौट आए
शाहगढ़ के रहने वाले बाली सिंह ने बताया कि वे चार दिन पहले ही साड़ियां बेचने विदिशा गए थे। वे तीन-चार लोग साप्ताहिक बाजारों में दुकान लगाकर साड़ियां बेचने का काम करते हैं। जैसे ही विदिशा पहुंचे तो वहां लॉकडाउन लग गया। जो पैसे ले गए थे वे सारे रहने और खाने में खर्चा हो गए। धंधा-पानी कुछ हुआ नहीं। लॉकडाउन कहीं लंबा न खींच जाए। इस डर से वहां से वापस अपने घर लौटाए आए हैं।
लॉकडाउन में मैस भी बंद हो गई, खाने-पीन का भी नहीं था इंतजाम
इंदौर में रहकर एमबीए कर रहे अमितेष गुप्ता ने बताया कि वे जनवरी में इंदौर गए थे। वहां किराये का रूम लेकर रहते हैं, लेकिन खाना मैस में खाते हैं। अभी लॉकडाउन लगा तो मैस बंद हो गई। होटल, रेस्टोरेंट सब बंद होने से खाने तक का इंतजाम नहीं रहा। फिर लॉकडाउन बढ़ा दिया गया। तो हम लोग बाइक से ही इंदौर से अपने घर निकल अाए। अमितेष ने बताया कि वह सतना के रहने वाले हैं। लॉकडाउन के डर से वापस आ गए हैं।
कोरोना कर्फ्यू लगा तो ठेकेदार ने वापस जाने के लिए बोल दिया
रायसेन जिले में एक ठेकेदार के पास मजदूरी कर लौटे शिवकुमार सिंह ने बताया कि दो दिन पहले जैसे ही लॉकडाउन लगा तो ठेकेदार ने काम बंद करते हुए हम लोगों से घर जाने के लिए बोल दिया। जब उससे हिसाब करने के लिए कहा तो ठेकेदार ने पैसे भी नहीं दिए। शिवकुमार ने बताया कि वे और उनके साथ अन्य 13 लोग करीब तीन माह पहले उमरिया से रायसेन मजदूरी करने के लिए गए थे।

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