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असर:कोरोना के कारण सामूहिक क्षमावाणी समारोह बंद, लोग सोशल मीडिया पर कह रहे-उत्तम क्षमा, मिच्छामि दुक्कड़म

सागरएक वर्ष पहले
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  • अनंत चतुर्दशी के दूसरे दिन से शहर में लगातार होते थे आयोजन, इस बार मंदिरों में भी भीड़ नहीं

दशलक्षण पर्व समापन के बाद जैन समाज में होने वाले क्षमावाणी समारोह सामूहिक रूप से नहीं हो रहे हैं। कोरोना के चलते इस बार इस तरह के आयोजनों की जगह सोशल मीडिया के माध्यम से संदेश भेज कर एक- दूसरे से क्षमा मांग कर क्षमावाणी मनाई जा रही है। लोग एक-दूसरे से उत्तम क्षमा और बदले में मिच्छामि दुक्कड़म कह रहे हैं।

मुनि सेवा समिति के सदस्य मुकेश जैन ढाना ने बताया कि कोरोना के चलते सरकार की गाइडलाइन के कारण सामूहिक कार्यक्रम इस बार समाज द्वारा नहीं किए जा रहे हैं। चूंकि वर्ष भर आपस में जाने-अनजाने में वाद-विवाद, व्यवहार आदि में जब लोग गलती करते हैं तो अनंत चतुर्दशी के दूसरे दिन से समाज के लोग सामूहिक रूप से एकत्र होकर के क्षमा याचना करते थे। साथ ही भविष्य में गलती न दोहराने का वादा भी करते थे। लेकिन इस बार जब यह मौका सामूहिक रूप से नहीं मिला तो समाज के लोगों ने पहली बार मोबाइल और सोशल मीडिया के माध्यम से आपसी बातचीत के माध्यम से एक दूसरे से क्षमा मांग रहे हैं। कुछ लोगों ने एक दूसरों के घरों में भी पहुंच करके क्षमा मांगी।

शान्तिनाथ शाखा ने मनाया पर्व, मांगी एक-दूसरे से क्षमा
अखिल भारत वर्षीय दिगंबर जैन महिला परिषद ब्राह्मी संभाग की शान्तिनाथ शाखा ने मनाया क्षमावाणी पर्व। प्रान्तीय उपाध्यक्ष डॉ. आशा जैन और संभागीय अध्यक्ष डॉ. राजुल सिंघई के निर्देशन में क्षमावाणी कार्यक्रम ऑनलाइन माध्यम से संपन्न हुआ। इस दौरान सभी पदाधिकारी और बहनों ने पिछले एक साल के दौरान हुई जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए एक-दूसरे से क्षमा मंगी। इस मौके पर सभी ने अपने विचार भी व्यक्त किए। शाखा अध्यक्ष अंजू सेठ ने बताया कि हर वर्ष शाखा की बहनें यह पर्व एक साथ धूमधाम से मनाती थीं। लेकिन इस बार कोरोना के चलते सभी बहने अपने ही घर से यह पर्व मना रहीं हैं। कार्यक्रम में चेअर पर्सन सुधा चौधरी, आरती सवाई, खुशबु, आदि बहनें शामिल रहीं।

क्षमा केवल वाणी से नहीं ह्रदय से होना चाहिए : मुनिश्री
कटनी में विराजमान मुनिश्री प्रमाण सागर महाराज के ऑनलाइन प्रवचन हो रहे हैं। मुनिश्री ने कहा कि क्षमावाणी उत्कृष्ट पर्व है। जैनों के अलावा जन-जन को भी इसे मनाना चाहिए। क्षमा मांगने से हमारे बीच में बैर की गांठ होती है, वह खुल जाती है। क्षमा केवल वाणी से नहीं ह्रदय से होना चाहिए। मिच्छामि दुक्कड़म इसका उपयोग आजकल होने लगा है यह सॉरी से बहुत अच्छा है, क्योंकि वह अंग्रेजी शब्द है और यह प्राकृत भाषा का शब्द है।

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